संचिता बसु का भावुक खुलासा, प्रीति जिंटा की फिल्म ने बदल दी थी किस्मत

 

संचिता बसु का भावुक खुलासा, प्रीति जिंटा की फिल्म ने बदल दी थी किस्मत

संचिता बसु ने अपने हालिया इंटरव्यू में ऐसा भावुक खुलासा किया है जिसने उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया। संचिता बसु ने बताया कि उनके जन्म से पहले उनकी मां गर्भपात कराने अस्पताल पहुंच चुकी थीं, लेकिन अभिनेत्री प्रीति जिंटा की फिल्म क्या कहना का एक डायलॉग सुनने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। संचिता का कहना है कि यदि उस दिन उनकी मां का मन नहीं बदलता, तो शायद आज उनका अस्तित्व ही नहीं होता। उनका यह अनुभव सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

अभिनेत्री ने अपने संघर्ष, करियर, फिटनेस और परिवार से जुड़े कई पहलुओं पर भी खुलकर बात की। उनका इंटरव्यू न सिर्फ उनकी निजी जिंदगी की कहानी बताता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक छोटा-सा निर्णय किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है।

अस्पताल में बदला मां का फैसला

संचिता बसु ने बताया कि उनकी मां एक राष्ट्रीय स्तर की एथलीट थीं। कुछ व्यक्तिगत और पेशेवर परिस्थितियों के कारण वह गर्भपात कराने पटना की डॉक्टर पद्मश्री शांति राय के क्लिनिक पहुंची थीं।

उन्होंने बताया कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और इंजेक्शन भी लगाया जा चुका था। इसी दौरान अस्पताल के प्रतीक्षालय में प्रीति जिंटा की फिल्म 'क्या कहना' चल रही थी।

फिल्म का एक संवाद—"मेरा बच्चा कोई खराब दांत है क्या, जिसे तोड़कर फेंक दिया जाए?"—सुनकर उनकी मां भावुक हो गईं और उन्होंने गर्भपात नहीं कराने का फैसला लिया।

संचिता के अनुसार, यही पल उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

जन्मदिन पर आज भी बजता है वही गीत

संचिता ने बताया कि उनकी मां उस दिन के फैसले को कभी नहीं भूलतीं।

इसी वजह से उनके हर जन्मदिन पर फिल्म क्या कहना का एक गीत जरूर बजाया जाता है। वह इसे अपनी जिंदगी और परिवार के लिए बेहद भावनात्मक परंपरा मानती हैं।

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है कि जिस फिल्म ने उन्हें जन्म लेने का मौका दिया, आज वही फिल्म इंडस्ट्री उनका कार्यक्षेत्र है।

'शान्विका' ने बदल दी करियर की दिशा

संचिता बसु इन दिनों वेब सीरीज 'ठुकरा के मेरा प्यार' के दूसरे सीजन में शान्विका का किरदार निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह किरदार सिर्फ बदले की कहानी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, संघर्ष और साहस की कहानी है। इसमें एक ऐसी महिला का सफर दिखाया गया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानती।

संचिता का मानना है कि इस भूमिका ने उन्हें अभिनय के कई नए आयाम सीखने का अवसर दिया।

पहला बड़ा ब्रेक बना सबसे यादगार

अभिनेत्री ने कहा कि यदि उन्हें पूरी जिंदगी किसी एक किरदार से पहचाना जाए, तो वह शान्विका ही होगा।

उन्होंने बताया कि यह उनका पहला बड़ा अभिनय अवसर था। इस किरदार में उन्हें कॉलेज छात्रा, विवाहित महिला और फिर आत्मनिर्भर महिला जैसे अलग-अलग रूप निभाने का मौका मिला।

उनके अनुसार यह अनुभव उनके अभिनय करियर की मजबूत नींव बना।

संघर्ष के दिनों को लेकर क्या बोलीं?

संचिता ने अपने शुरुआती संघर्ष को भी याद किया।

उन्होंने बताया कि किराए के मकान की छत पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। उस समय वह अक्सर खुद पर संदेह करती थीं।

आज भी किसी नए प्रोजेक्ट या एपिसोड के रिलीज से पहले घबराहट होती है। अगर उन्हें अपने पुराने दिनों वाली खुद को कोई सलाह देनी हो तो वह सिर्फ यही कहेंगी—"ओवरथिंकिंग मत करो, मेहनत पर भरोसा रखो।"

फिटनेस का राज बताया

फिटनेस को लेकर भी संचिता ने अपनी दिनचर्या साझा की।

उन्होंने कहा कि फिट रहने के लिए भूखा रहना जरूरी नहीं है। वह नियमित रूप से जिम जाती हैं और घर का बना सादा भोजन पसंद करती हैं।

उनकी डाइट में चावल, दाल, सब्जी, ओट्स, चिया सीड्स और प्रोटीन शेक शामिल हैं। उनका मानना है कि संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

रोल मॉडल बनने से ज्यादा जिम्मेदारी महसूस करती हैं

संचिता ने बताया कि वह असल जिंदगी में काफी शांत स्वभाव की हैं, लेकिन शान्विका का किरदार निभाने के बाद उनके सोचने का नजरिया बदला है।

अब जब युवा लड़कियां उन्हें संदेश भेजकर बताती हैं कि उनके किरदार से उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा मिली, तो उन्हें खुशी और जिम्मेदारी दोनों महसूस होती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि वह अभी केवल 21 वर्ष की हैं और अभिनय के साथ-साथ अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं।

मां को देती हैं अपनी हर सफलता का श्रेय

इंटरव्यू के अंत में संचिता बसु ने अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी मां ने उस दिन अस्पताल में अपना निर्णय नहीं बदला होता, तो उनका जीवन ही नहीं होता। इसलिए आज जो भी सफलता उन्हें मिली है, उसका सबसे बड़ा श्रेय वह अपनी मां को देती हैं।

उनके अनुसार, मां का वही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ और सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।

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