PM आवास के बाहर राहुल गांधी हिरासत में, CJP आंदोलन ने मचाया सियासी तूफान
नई दिल्ली: CJP आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में सियासी हलचल और तेज हो गई है। CJP आंदोलन के समर्थन में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेता धरने में शामिल हुए। कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान राहुल गांधी को पुलिसकर्मियों द्वारा उठाकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
PM आवास के बाहर क्या हुआ?
मंगलवार को विपक्षी नेताओं ने लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों तथा छात्रों के हितों को लेकर अपनी बात रखी।
विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रदर्शन जारी रखा। कुछ देर बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नेताओं से धरना समाप्त करने का आग्रह किया।
जब प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ तो पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
राहुल गांधी को उठाकर ले जाने का वीडियो वायरल
प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिसकर्मी राहुल गांधी को उठाकर ले जाते दिखाई दिए।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। इसी कार्रवाई के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को भी हिरासत में लिया गया।
हालांकि, हिरासत के बाद नेताओं को नियमानुसार आगे की प्रक्रिया के तहत ले जाया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
CJP आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार CJP ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
20 जून से संगठन के समर्थक जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और भूख हड़ताल में शामिल हुए।
20 जुलाई को संगठन ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकाला। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ था?
20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर नोकझोंक हुई।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की भी खबरें सामने आईं।
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान कई लोग घायल हुए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।
विपक्ष की प्रमुख मांगें क्या हैं?
विपक्षी दलों ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्न मांगें उठाईं—
- NEET परीक्षा से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच।
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
- छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच।
- शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग।
वहीं सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर समय-समय पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते रहे हैं।
क्यों बढ़ गया है इस आंदोलन का राजनीतिक महत्व?
शुरुआत में यह आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। लेकिन अब इसमें विभिन्न विपक्षी दलों के शामिल होने से इसका राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
हालांकि, आंदोलन और उससे जुड़े सभी पक्षों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट होंगे।
एक नजर में पूरी घटना
- PM आवास के बाहर विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया।
- राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव धरने में शामिल हुए।
- दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया।
- राहुल गांधी को पुलिस द्वारा उठाकर ले जाने का वीडियो वायरल हुआ।
- CJP आंदोलन NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी है।
यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में संसद और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों जारी हैं।
