PMCH में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से संकट, 56 ऑपरेशन रद्द; स्वास्थ्य मंत्री ने सुपरिंटेंडेंट को किया तलब


 पटना: PMCH जूनियर डॉक्टर हड़ताल का असर अब अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। PMCH जूनियर डॉक्टर हड़ताल के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पर्ची कटवाने से लेकर इलाज और ऑपरेशन तक की व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट को तलब किया है और जल्द समाधान का भरोसा दिया है। बुधवार से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण अस्पताल में कई नियमित सेवाएं प्रभावित हुई हैं। जानकारी के अनुसार करीब 56 निर्धारित ऑपरेशन स्थगित कर दिए गए हैं। इससे दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जबकि कई परिजन अस्पताल परिसर में जानकारी के लिए भटकते नजर आए।

PMCH में क्यों शुरू हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल?

पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पहले ही अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव, पीएमसीएच के प्राचार्य और अधीक्षक को लिखित रूप से इसकी सूचना भी दी थी। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। कई बार ज्ञापन और पत्र देने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सत्यम के अनुसार सभी जूनियर डॉक्टर नियमित कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं। हालांकि इमरजेंसी, आईसीयू और प्रसूति सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा गया है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा मिलती रहे।

मरीजों पर क्या पड़ा असर?

हड़ताल का सबसे अधिक असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा है। ओपीडी बंद रहने के कारण बड़ी संख्या में मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हुए। इसके अलावा लगभग 56 ऑपरेशन रद्द होने से पहले से भर्ती मरीजों की चिंता बढ़ गई है। कई मरीजों के परिजनों ने बताया कि उन्हें नई तारीख मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में पर्ची बनवाने, डॉक्टरों से मिलने और इलाज संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए लोगों को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर लगाने पड़े। इससे पूरे अस्पताल में अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने क्या कहा?

स्थिति बिगड़ने के बाद बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट को तलब किया है। मंत्री ने कहा कि जो भी समस्याएं सामने आई हैं, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि मरीजों को होने वाली परेशानी कम करने और अस्पताल की सामान्य व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही डॉक्टरों की मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।

डॉक्टरों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि कई बार मरीजों के परिजनों के साथ विवाद और मारपीट जैसी घटनाएं होती हैं, जिससे चिकित्सकों के लिए सुरक्षित वातावरण में काम करना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों ने मांग की है कि अस्पताल में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए। साथ ही चिकित्सकों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा एसोसिएशन ने अस्पताल में आवश्यक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, उपभोग्य सामग्रियों, जांच सुविधाओं, आईसीयू बेड और मरीज परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की भी मांग रखी है।

पहले भी उठ चुके हैं सुरक्षा के मुद्दे

पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर इससे पहले भी कई बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवाज उठा चुके हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच विवाद की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए और अस्पताल की बुनियादी सुविधाएं मजबूत हों, तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। उनका मानना है कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के अगले कदम पर है। यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो स्वास्थ्य सेवाएं जल्द सामान्य हो सकती हैं। वहीं मरीज और उनके परिजन भी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही ओपीडी और अन्य सेवाएं पूरी तरह बहाल होंगी।

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