समझौता तोड़ा तो फिर सड़क पर उतरेंगे: CJP ने सरकार को दी नए आंदोलन की चेतावनी


 

NEET आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। NEET आंदोलन को समाप्त कराने के दौरान हुए समझौते के पालन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने का जो भरोसा दिया था, उसका पालन नहीं हो रहा है। इसी मुद्दे पर CJP ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करेगी।

पार्टी का कहना है कि बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्रों की गिरफ्तारी और हिरासत की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

क्या है पूरा मामला?

CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए दावा किया कि आंदोलन समाप्त कराने के समय सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि किसी भी आंदोलनकारी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं होगी।

पार्टी का आरोप है कि इसके बावजूद कई राज्यों में छात्रों को गिरफ्तार किया जा रहा है और कुछ स्थानों पर उन्हें पूछताछ तथा निगरानी का सामना करना पड़ रहा है।

CJP का कहना है कि यह समझौते की भावना के विपरीत है।

CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें

पार्टी ने केंद्र सरकार से कई मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की है।

इसके अलावा हिरासत में लिए गए छात्रों की तत्काल रिहाई, भविष्य में किसी भी आंदोलनकारी के खिलाफ नया मामला दर्ज नहीं करने और कानूनी सुरक्षा से जुड़े लिखित समझौते की प्रति उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

CJP ने कहा है कि यदि इन मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

पार्टी प्रवक्ताओं ने क्या कहा?

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी आंदोलन से जुड़े लोगों को परेशान किए जाने की सूचनाएं मिल रही हैं।

वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि युवाओं के साथ किया गया भरोसा टूटना स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार के आश्वासन के बाद ही आंदोलन समाप्त किया गया था।

सौरव दास ने यह भी कहा कि पार्टी की कानूनी टीम विभिन्न राज्यों में गिरफ्तार छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध करा रही है।

सरकार ने पहले क्या आश्वासन दिया था?

CJP के अनुसार, 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त होने के समय केंद्र सरकार की ओर से भरोसा दिया गया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

पार्टी का कहना है कि उसी भरोसे के आधार पर देशव्यापी आंदोलन समाप्त किया गया था। साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने का भी आश्वासन दिया गया था।

हालांकि इन दावों पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।

संसद में भी गूंजा छात्रों का मुद्दा

इस बीच संसद में भी छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा। विपक्षी दलों के सांसदों ने बिहार में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

विपक्ष ने इस पूरे मामले पर चर्चा की मांग करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है।

अगर मांगें नहीं मानी गईं तो क्या होगा?

CJP ने स्पष्ट कहा है कि यदि गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया, एफआईआर वापस नहीं ली गई और लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो पार्टी फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।

पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के भरोसे का सवाल है जिन्होंने आंदोलन के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।

इस विवाद से जुड़े अहम सवाल

CJP ने सरकार पर क्या आरोप लगाया है?

पार्टी का आरोप है कि आंदोलन समाप्त कराने के समय हुए समझौते के बावजूद छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी है।

CJP की मुख्य मांग क्या है?

सभी गिरफ्तार छात्रों की रिहाई, दर्ज एफआईआर वापस लेने और भविष्य में किसी भी आंदोलनकारी पर कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई है।

क्या सरकार की प्रतिक्रिया आई है?

फिलहाल इन आरोपों पर केंद्र सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या हो सकता है?

यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो CJP ने दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

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