5 महीने तक पुलिस को गुमराह करता रहा इंस्पेक्टर! पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला पत्नी हत्याकांड का राज


 

मुंगेर: मधु कुमारी हत्याकांड में पांच महीने बाद ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे बिहार को चौंका दिया। मधु कुमारी हत्याकांड की जांच में पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और बैलेस्टिक रिपोर्ट ने इंस्पेक्टर पति के उस दावे को गलत साबित कर दिया, जिसमें पत्नी की मौत को आत्महत्या बताया गया था। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इंस्पेक्टर चंदन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब मामले में हत्या, दहेज उत्पीड़न और अन्य धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

यह मामला मुंगेर के सफियासराय थाना क्षेत्र का है, जहां 11 अप्रैल 2026 को मधु कुमारी की गोली लगने से मौत हुई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन जांच की दिशा बाद में पूरी तरह बदल गई।

क्या है पूरा मामला?

11 अप्रैल 2026 की शाम मधु कुमारी की घर में गोली लगने से मौत हो गई थी।

उनके पति और पुलिस इंस्पेक्टर चंदन कुमार ने दावा किया कि मधु ने मानसिक तनाव के कारण खुद को गोली मार ली। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

दूसरी ओर, मृतका के मायके वालों ने शुरू से ही इस दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद से मधु को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और घरेलू विवाद लगातार होते थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच की दिशा

मामले की जांच में सबसे अहम भूमिका मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने निभाई।

डॉक्टरों ने पाया कि गोली मधु की छाती के बीचों-बीच लगी थी और पीठ की तरफ से बाहर निकली थी। रिपोर्ट में गोली की दिशा, प्रवेश और निकास के निशान तथा घाव की प्रकृति का विश्लेषण किया गया।

जांच के दौरान विशेषज्ञों ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियां सामान्य आत्महत्या के मामलों से मेल नहीं खातीं और प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका बनती है। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

FSL और बैलेस्टिक रिपोर्ट से मिला अहम सबूत

पोस्टमार्टम के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) और बैलेस्टिक जांच कराई गई।

पुलिस के अनुसार, जांच में बरामद गोली का मिलान इंस्पेक्टर चंदन कुमार की सर्विस रिवॉल्वर से हुआ। यही रिपोर्ट इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य बनी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने हत्या के एंगल पर कार्रवाई तेज कर दी और आरोपी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया।

पांच महीने तक जांच क्यों चली?

घटना के बाद शुरुआती स्तर पर पुलिस आत्महत्या के दावे की भी जांच कर रही थी।

हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक परीक्षण और बैलेस्टिक रिपोर्ट आने में समय लगा। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का दोबारा विश्लेषण किया।

इसी प्रक्रिया के बाद जांच एजेंसियों ने हत्या की आशंका को मजबूत माना और आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।

एसपी ने क्या कहा?

मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद के अनुसार, वैज्ञानिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में कार्रवाई की गई है।

उन्होंने बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर को पहले निलंबित किया गया था और अब उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस के मुताबिक, मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 498A (दहेज उत्पीड़न) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

परिवार शुरू से हत्या का आरोप लगाता रहा

मधु कुमारी के परिजनों ने शुरुआत से ही आत्महत्या की थ्योरी को खारिज किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह के बाद से उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। परिवार ने दहेज उत्पीड़न के आरोप भी लगाए थे।

जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया।

एक नजर में पूरा मामला

  • 11 अप्रैल 2026 को मधु कुमारी की गोली लगने से मौत हुई।
  • इंस्पेक्टर पति ने शुरुआत में घटना को आत्महत्या बताया।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली की दिशा और घाव पर सवाल उठे।
  • FSL और बैलेस्टिक जांच में सर्विस रिवॉल्वर से गोली चलने की पुष्टि हुई।
  • पुलिस ने इंस्पेक्टर पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
  • हत्या और दहेज उत्पीड़न सहित विभिन्न धाराओं में जांच जारी है।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिलहाल पुलिस आरोपपत्र और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है। अंतिम निर्णय अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

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