6 माह बाद भी नहीं हटा सरकारी जमीन से अतिक्रमण, मुख्यमंत्री पोर्टल पहुंचा धोबिया खड्डा पोखर मामला
खगड़िया के धोबिया खड्डा पोखर अतिक्रमण मामला अब मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंच गया है। धोबिया खड्डा पोखर अतिक्रमण मामला पिछले छह माह से स्थानीय प्रशासन के समक्ष लंबित होने का आरोप लगाया जा रहा है। नगर परिषद क्षेत्र के संसारपुर वार्ड संख्या-38 के निवासी दीपक कुमार ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि सरकारी गैर-मजरूआ आम भूमि, सार्वजनिक सड़क और पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित मामले की अंतिम सुनवाई भी हो चुकी है, इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में निराशा बढ़ रही है। अब इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
छह माह से कार्रवाई का इंतजार, मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
दीपक कुमार ने मुख्यमंत्री को भेजे आवेदन में कहा है कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पिछले छह महीनों के दौरान जिला प्रशासन, नगर परिषद और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई आवेदन दिए गए।
उन्होंने बताया कि परिवाद संख्या 421110108042606890 पर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष अंतिम सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद मौके पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक हित दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सरकारी गैर-मजरूआ आम भूमि पर अतिक्रमण का आरोप
आवेदन के अनुसार विवादित भूमि सरकारी गैर-मजरूआ आम श्रेणी की है। आरोप है कि वर्षों पुरानी सार्वजनिक सड़क पर कथित अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इसी मार्ग से स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय ब्रह्मदेव चौधरी के घर तक पहुंचने का रास्ता था, जो अब पूरी तरह अवरुद्ध बताया जा रहा है।
आवेदन में दावा किया गया है कि प्रशासनिक अभिलेखों और जांच रिपोर्ट में भी संबंधित भूमि को सरकारी बताया गया है।
प्रशासनिक कार्यालयों के करीब होने के बावजूद उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि विवादित स्थल जिला पदाधिकारी आवास, पुलिस लाइन और पुलिस अधीक्षक आवास से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ऐसे में सवाल उठाया गया है कि प्रशासनिक कार्यालयों के इतने निकट होने के बावजूद सरकारी भूमि से कथित अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका।
हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री से क्या-क्या मांग की गई?
मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में कई प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें शामिल हैं:
- सरकारी भूमि की निष्पक्ष मापी कराई जाए।
- कथित अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक सड़क बहाल की जाए।
- धोबिया खड्डा पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
- पोखर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की योजना बनाई जाए।
- यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
- शिकायतकर्ता और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई होने से स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर
यह मामला अब मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंचने के बाद चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग मामले की समीक्षा करेगा।
यदि जांच में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन की अगली पहल पर बनी हुई है।
मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
सरकारी भूमि, सार्वजनिक सड़क और जलस्रोतों पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों का सीधा असर स्थानीय नागरिकों की आवाजाही, पर्यावरण और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ता है।
ऐसे मामलों में समय पर जांच और कार्रवाई न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक होती है, बल्कि भविष्य में इस तरह के विवादों को रोकने में भी मददगार साबित होती है।
