संसद मार्च पर दिल्ली में बवाल, 118 पुलिसकर्मी घायल; आज फिर प्रदर्शन का ऐलान


 

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही CJP संसद मार्च राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। सोमवार को आयोजित CJP संसद मार्च के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। पुलिस ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, आंदोलनकारी संगठन ने साफ कर दिया है कि उनका प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा और मंगलवार को भी संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा।

दिल्ली में सोमवार को हुए घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आज होने वाला प्रदर्शन किस दिशा में जाता है और हालात कितने शांतिपूर्ण रहते हैं।

संसद मार्च के दौरान कैसे बिगड़े हालात?

जानकारी के अनुसार, CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। शुरुआती घंटों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ी, तनाव बढ़ने लगा।

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन किया और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई।

स्थिति जल्द ही नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी और जंतर-मंतर, जनपथ तथा रायसीना रोड जैसे प्रमुख इलाकों में पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

पुलिस का दावा: 118 जवान और अधिकारी घायल

दिल्ली Police के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

पुलिस का कहना है कि 15 से 20 सरकारी वाहनों को क्षति पहुंची है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक संपत्ति और दुकानों में भी नुकसान की सूचना मिली है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें वरिष्ठ स्तर के कई अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। घायल कर्मियों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई गई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती करनी पड़ी और कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया।

प्रदर्शनकारियों को भी चोटें, कई लोग हिरासत में

पुलिस के अनुसार, झड़पों के दौरान लगभग 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि हिरासत में लिए गए सभी लोग आंदोलन से जुड़े थे या भीड़ में अन्य लोग भी शामिल थे।

आज फिर संसद मार्च का ऐलान

सोमवार देर रात कई प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए। इसके बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की कि आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा और मंगलवार को भी संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा। साथ ही जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली न करने की बात भी कही गई है।

इस घोषणा के बाद प्रशासन ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी व्यवस्था तैनात की गई है।

अभिजीत दीपके ने खत्म किया अनशन

आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके ने अपना भूख हड़ताल कार्यक्रम समाप्त कर दिया।

उन्होंने कुछ दिन पहले शुरू किया गया अनशन करीब ढाई दिन बाद खत्म किया। हालांकि, अनशन समाप्त करने के बावजूद उन्होंने आंदोलन वापस लेने से इनकार किया और कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखेगा।

इस कदम को आंदोलन की रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि विरोध कार्यक्रम जारी रहेगा।

जेपी नड्डा से हुई बातचीत, समाधान नहीं निकला

तनावपूर्ण माहौल के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की भी कोशिश हुई।

CJP प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो चरणों में मुलाकात की। पहली बैठक में प्रतिनिधियों से उनकी मांगों का विस्तृत विवरण मांगा गया, जबकि बाद में लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में संगठन की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस सहमति या आश्वासन नहीं मिल सका। सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त करने और शांति बनाए रखने की अपील की गई।

केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ स्तर पर हालात की समीक्षा की गई और सुरक्षा एजेंसियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि स्थिति संभालने में संयम बरता जाए और आवश्यक होने पर ही बल प्रयोग किया जाए।

मंगलवार के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। संसद परिसर और आसपास के इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

क्या है आगे की चुनौती?

विशेषज्ञों का मानना है कि मंगलवार का प्रदर्शन प्रशासन और आंदोलनकारी दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होगा। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन टकराव की स्थिति बनने पर कानून-व्यवस्था की चुनौती और बढ़ सकती है।

फिलहाल राजधानी में स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है और आने वाले घंटों में घटनाक्रम का अगला चरण तय होगा।


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