Gaya Borewell Rescue: 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरा मासूम, NDRF ने ऐसे बचाई जान

 


Gaya Borewell Rescue ने गुरुवार रात पूरे बिहार की सांसें थाम दीं। Gaya Borewell Rescue अभियान में गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र के रंगू नगर में खेलते समय 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय पीयूष को करीब सात घंटे के कठिन अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि बच्चा लगभग 30 से 35 फीट की गहराई पर ही फंस गया था। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय प्रशासन और परिवार के संयुक्त प्रयासों से यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा।

कैसे हुआ हादसा? खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिरा मासूम

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे तीन वर्षीय पीयूष अपने घर के बाहर खेल रहा था। उस समय उसकी मां पास में घरेलू काम कर रही थीं और बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन था।

खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया। अचानक उसका पैर फिसला और वह बोरवेल में गिर गया। हालांकि वह नीचे तक नहीं पहुंचा और लगभग 30–35 फीट की गहराई पर फंस गया। यही बात उसके लिए सबसे बड़ी राहत साबित हुई।

घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंच गया।

परिवार की आवाज बनी मासूम की हिम्मत

रेस्क्यू अभियान के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को शांत रखना था। संकरी जगह और अंधेरे के कारण पीयूष काफी डरा हुआ था।

एनडीआरएफ की टीम लगातार उसे आवाज देकर हाथ बढ़ाने की अपील करती रही, लेकिन वह घबराया हुआ था। इसके बाद उसकी बड़ी मां और मां ने पाइप के जरिए उससे लगातार बात की।

परिजनों ने उसे हिम्मत देते हुए भरोसा दिलाया कि वह सुरक्षित बाहर आ जाएगा। परिवार की आवाज सुनकर बच्चा शांत रहा, जिससे रेस्क्यू टीम को अभियान आगे बढ़ाने में मदद मिली।

पहली कोशिश नाकाम, फिर 'हुक' तकनीक से मिली सफलता

घटना के बाद सबसे पहले स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ ने राहत कार्य शुरू किया। बाद में पटना से एनडीआरएफ की विशेष टीम भी मौके पर पहुंची।

शुरुआत में पाइप के माध्यम से बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन बोरवेल की संकरी बनावट और बच्चे के फंसे होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

इसके बाद एनडीआरएफ ने विशेष हुकनुमा उपकरण (हुक तकनीक) का इस्तेमाल किया। टीम ने अत्यंत सावधानी से उपकरण को बच्चे के कपड़ों में फंसाया और धीरे-धीरे ऊपर खींचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सात घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण अभियान

रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार करीब सात घंटे तक चला। रात का समय, सीमित जगह और बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की भीड़ अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना रही थी।

एनडीआरएफ के अनुसार, बच्चे के शरीर की स्थिति ऐसी थी कि सामान्य उपकरण आसानी से उसके पास नहीं पहुंच पा रहे थे।

इस बीच प्रशासन ने ऑक्सीजन और रोशनी की व्यवस्था की, जिससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत नहीं हुई और वह पूरे समय होश में रहा। यही कारण रहा कि अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका।

बाहर आते ही अस्पताल पहुंचाया गया

रेस्क्यू के बाद पीयूष को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया।

जांच में उसके एक पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने प्लास्टर करने के बाद उसे घर भेज दिया और कुछ दिनों बाद दोबारा जांच के लिए बुलाया है।

जानकारी के अनुसार, जब पीयूष बोरवेल में गिरा था, तब उसके हाथ में मोबाइल था। वह काफी देर तक मोबाइल पकड़े रहा, लेकिन बाहर निकालते समय मोबाइल बोरवेल में ही गिर गया।

खुले बोरवेल बने गंभीर खतरा

यह घटना एक बार फिर खुले बोरवेल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोग में नहीं आने वाले बोरवेल को तुरंत सुरक्षित तरीके से बंद करना चाहिए। इससे ऐसे हादसों की संभावना कम की जा सकती है। प्रशासन भी समय-समय पर खुले बोरवेल को बंद कराने की अपील करता रहा है।

 मुख्य बातें

  • गया जिले में 3 वर्षीय पीयूष 300 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया।
  • बच्चा लगभग 30–35 फीट की गहराई पर फंस गया था।
  • एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने करीब सात घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया।
  • विशेष हुक तकनीक की मदद से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
  • अस्पताल में जांच के दौरान उसके एक पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।
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