धर्मेंद्र प्रधान का सियासी सफर: छात्र नेता से मोदी के भरोसेमंद मंत्री तक, फिर अचानक इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सबसे चर्चित नेताओं में गिना जाता है। धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र राजनीति से शुरुआत कर केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और चुनावी रणनीतिकार के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, NEET-UG परीक्षा विवाद और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री पद से उनका इस्तीफा देश की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बन गया है। ऐसे में उनका राजनीतिक सफर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।
लंबे समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान का करियर कई उतार-चढ़ाव से होकर गुजरा। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियां और चुनौतियां।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक जीवन ओडिशा के तालचेर कॉलेज से शुरू हुआ। पढ़ाई के दौरान वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में सक्रिय रहे।
कॉलेज के दिनों में उन्होंने छात्र राजनीति में हिस्सा लिया और बाद में उत्कल विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। हालांकि, अपने राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव वह जीत नहीं सके। इसके बावजूद उन्होंने संगठन में सक्रिय रहकर अपनी पहचान बनाई।
RSS से जुड़ाव और BJP में बढ़ता प्रभाव
धर्मेंद्र प्रधान का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव बचपन से माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संघ के साथ उनकी सक्रियता ने उनके संगठनात्मक कौशल को मजबूत किया।
समय के साथ उन्होंने ओडिशा में भाजपा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी नेताओं का मानना है कि राज्य में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनका बड़ा योगदान रहा।
चुनावी रणनीतिकार के रूप में बनाई अलग पहचान
धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में भी गिना जाता है।
उन्होंने विभिन्न राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रभारी के रूप में काम किया और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड सहित कई राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में भूमिका निभाई। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा है।
मोदी सरकार में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली।
उन्होंने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और बाद में शिक्षा मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्री रहने के कारण उन्हें सरकार की उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से भी जोड़ा गया।
शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में बढ़े विवाद
2021 में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण शिक्षा सुधारों पर काम हुआ, लेकिन इसी दौरान कई विवाद भी सामने आए।
NCERT पाठ्यक्रम, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के संशोधित नियम और बाद में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर रही।
NEET विवाद के बाद आया बड़ा राजनीतिक मोड़
NEET-UG परीक्षा विवाद के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए गए। इस दौरान परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और हाल की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुखी किया है। इसके बाद उनके इस्तीफे ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दिया।
ओडिशा की राजनीति में अब भी मजबूत मानी जाती है पकड़
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्रीय स्तर पर बदलाव के बावजूद ओडिशा की राजनीति में धर्मेंद्र प्रधान का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
भाजपा संगठन में उनकी लंबे समय की भूमिका और चुनावी अनुभव उन्हें पार्टी के प्रमुख नेताओं में बनाए रखता है। भविष्य में उन्हें कौन-सी जिम्मेदारी मिलती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।
क्यों चर्चा में है धर्मेंद्र प्रधान का सफर?
धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक जीवन संगठन, चुनाव प्रबंधन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का मिश्रण रहा है। छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का उनका सफर कई उपलब्धियों और चुनौतियों से भरा रहा।
हालिया घटनाक्रम के बाद उनका इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी बहस का अहम हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में उनकी अगली राजनीतिक भूमिका पर भी सभी की नजर रहेगी।
