दीपक प्रकाश को बड़ी राहत! MLC सीट खाली होने से बच सकता है मंत्री पद

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पटना: बिहार की राजनीति में दीपक प्रकाश MLC सीट को लेकर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। दीपक प्रकाश MLC सीट खाली होने की संभावना से उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट फिलहाल कम होता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार शुक्रवार शाम करीब 4 बजे विधान परिषद सभापति से मिलकर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली होने वाली सीट से दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम फैसला चुनाव प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

देवेश कुमार क्यों दे सकते हैं इस्तीफा?

सूत्रों के मुताबिक देवेश कुमार अपनी विधान परिषद सीट दीपक प्रकाश के लिए खाली कर सकते हैं। देवेश कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में 17 मार्च 2021 को निर्वाचित हुए थे।

उनका कार्यकाल अगले साल 16 मार्च को समाप्त होना था। लेकिन अब अगर वह इस्तीफा देते हैं तो सीट खाली होगी और उस पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम दीपक प्रकाश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि वह वर्तमान में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

मंत्री पद पर क्यों खड़ा हुआ संवैधानिक सवाल?

दीपक प्रकाश को लेकर विवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि वह मंत्री बनने के बाद निर्धारित समय के भीतर विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन सके।

संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई व्यक्ति बिना सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री रह सकता है। इसके बाद उसे किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है।

पिछले दिनों दीपक प्रकाश को एमएलसी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला था। इस वजह से उनके मंत्री पद की संवैधानिक स्थिति पर सवाल उठने लगे थे।

अब अगर विधान परिषद की सीट खाली होती है और दीपक प्रकाश चुनाव जीतकर सदन पहुंचते हैं, तो इस विवाद का समाधान निकल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला

दीपक प्रकाश के मंत्री पद को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं, तो उन्हें मंत्री पद पर बनाए रखने की संवैधानिक वैधता क्या है।

याचिका संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जुड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे। इसके बाद सरकार के इस्तीफे के बाद उन्होंने 7 मई 2026 को दोबारा मंत्री पद की शपथ ली।

याचिका में कहा गया है कि छह महीने की अवधि दोबारा शुरू नहीं हो सकती। इसलिए उनके मंत्री पद को लेकर संवैधानिक सवाल बने हुए हैं।

MLC चुनाव से खुल सकता है नया रास्ता

फिलहाल दीपक प्रकाश के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। ऐसे में उनकी राजनीतिक स्थिति दो मोर्चों पर निर्भर करती है।

पहला, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला देता है। दूसरा, क्या वह विधान परिषद की सीट हासिल कर पाते हैं।

अगर देवेश कुमार इस्तीफा देते हैं और दीपक प्रकाश एमएलसी चुनाव जीत जाते हैं, तो उनके मंत्री पद पर उठ रहे कई संवैधानिक सवालों का समाधान हो सकता है।

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मंत्री पद बचाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीतिक रणनीति दोनों साथ-साथ दिखाई दे रही हैं।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर देवेश कुमार के संभावित इस्तीफे, एमएलसी उपचुनाव और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।

अगर घटनाक्रम दीपक प्रकाश के पक्ष में आगे बढ़ता है तो यह उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। वहीं, अदालत का फैसला इस पूरे मामले की अंतिम दिशा तय करेगा।

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