Supreme Court में दीपक प्रकाश की मंत्री कुर्सी पर सवाल, बिहार सरकार से जवाब तलब
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👉 WhatsApp से जुड़ेंDeepak Prakash Minister Case को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। Deepak Prakash Minister Case की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार से पूछा कि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने बिना छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे रह सकता है। अदालत ने इस मुद्दे को कानूनी प्रश्न बताते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
यह मामला बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संवैधानिक प्रावधानों का पालन किए बिना उन्हें लगातार दूसरी बार मंत्री बनाया गया, जबकि वे अब तक बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो वह छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है।
अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह कानून की व्याख्या से जुड़ा मामला है और राज्य सरकार को इसका स्पष्ट उत्तर देना होगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
याचिका में क्या लगाए गए हैं आरोप?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के।
याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुसार गैर-विधायक को मंत्री बनाए जाने पर अधिकतम छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो मंत्री पद पर बने रहने की अनुमति समाप्त हो जाती है।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि दीपक प्रकाश को दो बार मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जबकि वे अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं।
बिहार सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यह मामला पहले से न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है।
सरकार की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्देश देगा, उसका पालन किया जाएगा। फिलहाल राज्य सरकार इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करेगी।
दीपक प्रकाश कब बने मंत्री?
वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल में दीपक प्रकाश को शामिल करते हुए पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी सौंपी थी।
उस समय भी वे बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। बाद में राजनीतिक बदलाव के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी और दीपक प्रकाश को फिर से पंचायती राज मंत्री बनाया गया।
याचिका में इसी क्रम को आधार बनाकर उनकी नियुक्ति की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है।
संविधान में क्या है प्रावधान?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि किसी गैर-विधायक को मंत्री बनाया जाता है तो उसे छह महीने के भीतर राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होता है।
यदि निर्धारित अवधि में सदस्यता प्राप्त नहीं होती, तो वह व्यक्ति मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है। हालांकि, वर्तमान मामले में इन संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या और उनका अनुपालन ही विवाद का मुख्य विषय है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अदालत के समक्ष राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी, जबकि याचिकाकर्ता भी अपने तर्क प्रस्तुत करेगा। अंतिम निर्णय आने तक इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश की मंत्री नियुक्ति पर बिहार सरकार से जवाब मांगा।
- कोर्ट ने पूछा कि बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक मंत्री कैसे रह सकता है।
- याचिका में लगातार दूसरी बार मंत्री बनाए जाने को चुनौती दी गई है।
- बिहार सरकार ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है और अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
- मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद होगा।
