बेतिया स्कूल में बड़ा बवाल! आपत्तिजनक हालत में मिले शिक्षक-शिक्षिका, छात्रों ने किया हंगामा
बेतिया स्कूल विवाद: शिक्षक-शिक्षिका पर छात्रों के गंभीर आरोप, जांच शुरू, विभागीय कार्रवाई की तैयारी
बेतिया स्कूल विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। बेतिया स्कूल विवाद से जुड़ी इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में छात्रों द्वारा शिक्षक और शिक्षिका को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देखने का दावा किया गया। इसके बाद स्कूल परिसर में अभिभावकों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और काफी देर तक हंगामा होता रहा। सूचना मिलने पर पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा मामले की जांच शुरू कर दी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मामला नरकटियागंज प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बरवा का है। आरोप है कि स्कूल में नियमित पढ़ाई शुरू होने के दौरान एक शिक्षक और एक शिक्षिका को विद्यालय के एक कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया।
इसकी जानकारी मिलते ही छात्रों ने अन्य लोगों को बताया, जिसके बाद अभिभावक भी स्कूल पहुंच गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्कूल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।
पुलिस और शिक्षा विभाग ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को शांत कराया। इसके बाद दोनों शिक्षकों को सुरक्षा के बीच स्कूल परिसर से बाहर निकाला गया।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) संजय कुमार भी विद्यालय पहुंचे। उन्होंने छात्रों और अन्य लोगों से बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी ली। अधिकारियों ने कहा कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
विभागीय कार्रवाई की तैयारी
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होने के कारण विभागीय कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।
पहले भी सामने आने का दावा
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने दावा किया कि इससे पहले भी दोनों शिक्षकों को लेकर इसी तरह की शिकायत सामने आई थी। हालांकि उस समय मामला पंचायत स्तर पर सुलझा दिया गया था और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंची।
इन दावों की भी अब जांच की जा रही है। शिक्षा विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि यदि पहले कोई शिकायत हुई थी तो उसे नियमानुसार दर्ज क्यों नहीं किया गया।
शिक्षकों ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, आरोपी शिक्षक रामप्रवेश पासवान और शिक्षिका गीतांजलि कुमारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। दोनों का दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
इस कारण मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और सुरक्षित वातावरण का स्थान होता है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए बेहद जरूरी है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। शिक्षा विभाग भी अपनी अलग विभागीय जांच चला रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत कार्रवाई संभव है, जबकि आरोप गलत साबित होने की स्थिति में संबंधित शिक्षकों को नियमानुसार राहत मिल सकती है।
इस मामले ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि स्कूलों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास शिक्षा संस्थानों पर बना रहे।
