Bankipur Election: भरत तिवारी के पिता ने BJP के दावों को नकारा, सियासी विवाद ने पकड़ा नया मोड़
Bankipur Election से पहले Bankipur Election का राजनीतिक माहौल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर और गर्म हो गया है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी द्वारा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर लगाए गए आरोपों के बाद अब भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी का बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके परिवार से न तो प्रशांत किशोर और न ही किसी अन्य नेता ने चुनाव प्रचार के लिए संपर्क किया। इस बयान के बाद मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
बांकीपुर उपचुनाव में पहले से चर्चा में रहा यह मामला अब आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, जबकि परिवार की ओर से आए बयानों ने विवाद को और उलझा दिया है।
क्या था मनोज तिवारी का दावा?
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया था कि भरत तिवारी की मां आशा देवी से न्याय दिलाने के नाम पर चुनाव प्रचार करने का आग्रह किया गया था। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान आशा देवी ने स्वयं उन्हें इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी।
इस बयान के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया और विपक्षी दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।
भरत तिवारी के पिता ने क्या कहा?
भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके परिवार को चुनाव प्रचार के लिए किसी भी नेता या राजनीतिक दल की ओर से कोई फोन या संदेश नहीं मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर ने कभी चुनाव प्रचार करने का आग्रह नहीं किया। उनके इस बयान के बाद मनोज तिवारी के आरोपों पर नए सवाल उठने लगे हैं।
मां के बयान पर पिता की अलग सफाई
आशा देवी के कथित बयान को लेकर भी काशीनाथ तिवारी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद उनकी पत्नी मानसिक रूप से काफी आहत हैं और जो भी व्यक्ति न्याय का भरोसा देता है, वह उसकी बात पर विश्वास कर लेती हैं।
उनके अनुसार, इसे किसी राजनीतिक समझौते या चुनावी शर्त के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक दुखी परिवार की भावनात्मक स्थिति है।
बांकीपुर उपचुनाव में क्यों बढ़ा विवाद?
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला पहले से ही राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। उपचुनाव नजदीक आते ही विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को अलग-अलग तरीके से जनता के बीच उठा रहे हैं।
अब पिता और मां के अलग-अलग बयानों के सामने आने से विवाद और जटिल हो गया है। इससे चुनावी बहस विकास और स्थानीय मुद्दों से हटकर आरोप-प्रत्यारोप की दिशा में जाती दिखाई दे रही है।
बीजेपी के आरोपों पर विपक्ष के सवाल
परिवार की ओर से आए ताजा बयान के बाद विपक्षी दल बीजेपी के आरोपों पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि संवेदनशील मामले को चुनावी बहस का हिस्सा बनाया जा रहा है।
हालांकि बीजेपी अपने पहले के दावों पर कायम है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।
अब किसके दावे पर होगा भरोसा?
एक ओर मनोज तिवारी का आरोप है कि न्याय के बदले चुनाव प्रचार की बात कही गई थी। दूसरी ओर भरत तिवारी के पिता इस पूरे दावे को पूरी तरह गलत बता रहे हैं।
फिलहाल किसी भी पक्ष के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
क्या पड़ सकता है चुनाव पर असर?
बांकीपुर उपचुनाव में यह विवाद अब प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हो चुका है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से जनता के सामने रख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मतदाता अक्सर तथ्यों और आधिकारिक बयानों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है।
