वैभव सूर्यवंशी ने 11 गेंदों में ठोका तूफानी अर्धशतक, 94 रन की पारी से फाइनल में मचाया धमाल

वैभव सूर्यवंशी ने इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के बीच ट्राई नेशन वनडे सीरीज के फाइनल में ऐसी बल्लेबाजी की, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वैभव सूर्यवंशी ने दांबुला के रंगिरी इंटरनेशनल स्टेडियम में केवल 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और महज 29 गेंदों में 94 रन बनाकर भारतीय टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर भारत-ए ने शुरुआती 15 ओवरों में ही 153 रन बना लिए और श्रीलंकाई गेंदबाज पूरी तरह दबाव में नजर आए।
11 गेंदों में अर्धशतक, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं बनेगा
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी पारी के दौरान 10 चौके और 8 छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी की रफ्तार इतनी तेज थी कि उन्होंने केवल 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। हालांकि यह प्रदर्शन वनडे क्रिकेट के सबसे तेज अर्धशतकों में गिना जा सकता है, लेकिन इंडिया-ए के मुकाबलों को अंतरराष्ट्रीय वनडे का दर्जा प्राप्त नहीं है। इसी वजह से यह पारी आधिकारिक रिकॉर्ड बुक में शामिल नहीं होगी। वनडे इंटरनेशनल में सबसे तेज अर्धशतक का आधिकारिक रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स के नाम है, जिन्होंने 2015 में 16 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।
94 रन पर खत्म हुई विस्फोटक पारी
लगातार बड़े शॉट खेल रहे वैभव सूर्यवंशी अपने शतक से सिर्फ छह रन दूर रह गए। श्रीलंका-ए के कप्तान सहान अराच्चिगे ने उन्हें आउट कर अपनी टीम को पहली सफलता दिलाई। बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में सूर्यवंशी का शॉट सही तरीके से टाइम नहीं हो पाया और मिड-ऑफ पर विजयकांत वियासकांत ने आसान कैच लपक लिया। इसके साथ ही उनकी 94 रन की धमाकेदार पारी समाप्त हुई।
भारत-ए को मिली तूफानी शुरुआत
श्रीलंका-ए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। कप्तान सहान अराच्चिगे का मानना था कि शाम के समय बल्लेबाजी करना आसान रहेगा, इसलिए उनकी टीम लक्ष्य का पीछा करना चाहती थी। लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने इस रणनीति को शुरुआती ओवरों में ही गलत साबित कर दिया। तेज रन गति की बदौलत भारत-ए ने सिर्फ 15 ओवर में 153 रन बना लिए, जिससे श्रीलंका पर शुरुआती दबाव बन गया।
तिलक वर्मा ने बताया टीम का प्लान
भारत-ए के कप्तान तिलक वर्मा ने टॉस के दौरान कहा कि यदि उन्हें मौका मिलता तो वे भी पहले बल्लेबाजी करना पसंद करते। उनके अनुसार इस पिच पर 300 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी साबित हो सकता है। फाइनल मुकाबले के लिए भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया और अशोक शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। भारत तीन स्पिनर और तीन तेज गेंदबाजों के संतुलित आक्रमण के साथ मैदान पर उतरा।
पुराने विवाद के बाद फिर आमने-सामने आए खिलाड़ी
इस फाइनल मुकाबले से पहले वैभव सूर्यवंशी एक अन्य कारण से भी चर्चा में थे। लीग चरण के दौरान 15 जून को श्रीलंका-ए के खिलाफ खेले गए मुकाबले के बाद सुपर ओवर में भारत-ए की हार हुई थी। मैच के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलामबागे और वैभव सूर्यवंशी के बीच तीखी बहस हो गई थी। आरोप है कि उकसाने वाली टिप्पणी के बाद सूर्यवंशी ने हलामबागे को धक्का दे दिया था। इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों की एक बार फिर फाइनल में आमने-सामने की भिड़ंत पर भी क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रही।
दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन
भारत-ए
वैभव सूर्यवंशी, प्रियांश आर्या, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा (कप्तान), कुमार कुशाग्र, सूर्यांश शेडगे, अनुकुल रॉय, निशांत सिंधु, विप्रज निगम, अशोक शर्मा और यश ठाकुर।
श्रीलंका-ए
निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), अविष्का फर्नांडो, रविंदु फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा, सहान अराच्चिगे (कप्तान), नुवानिदु फर्नांडो, वनुजा सहान, मोहम्मद शिराज, दुलाज समुधिता, विजयकांत वियासकांत और कुगाथस माथुलन।