बिहार के हर टोल प्लाजा पर मिलेगी एंबुलेंस, सड़क हादसों में बचेंगी ज्यादा जानें
बिहार में टोल प्लाजा एंबुलेंस सुविधा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार की नई पहल के तहत टोल प्लाजा एंबुलेंस सुविधा सभी हाईवे स्थित टोल प्लाजा पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक सहायता देना और उन्हें कम समय में नजदीकी ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाना है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।
पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य के हर प्रमुख हाईवे पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता को और प्रभावी बनाया जाएगा।
हर टोल प्लाजा पर तैनात होगी एंबुलेंस
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे मेडिकल भाषा में "गोल्डन ऑवर" कहा जाता है।
इसी अवधि में यदि घायल व्यक्ति को समय पर इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी सोच के तहत हर टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि हाईवे पर मौजूद टोल प्लाजा आपातकालीन सेवाओं के लिए सबसे उपयुक्त केंद्र बन सकते हैं क्योंकि वे सड़क नेटवर्क से सीधे जुड़े होते हैं।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बनेंगे नए ट्रॉमा सेंटर
राज्य सरकार ट्रॉमा केयर सिस्टम को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बिहार में ट्रॉमा सेंटरों की संख्या बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां नए ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में नौ ट्रॉमा सेंटर परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रॉमा सेंटरों की संख्या बढ़ने से सड़क हादसों के बाद गंभीर मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज मिल सकेगा।
पीएमसीएच में सांस के मरीजों को 24 घंटे इमरजेंसी सेवा
जनसुनवाई के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की।
उन्होंने बताया कि सांस संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए अब पीएमसीएच में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा उपलब्ध रहेगी। इससे अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य गंभीर मरीजों को किसी भी समय विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों में बढ़ेगी सुविधाएं, रेफर की समस्या होगी कम
बिहार सरकार लंबे समय से सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बेवजह बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने की समस्या को कम करने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि मरीजों को उनके नजदीकी अस्पताल में ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने इस दिशा में 15 अगस्त तक सुधारात्मक कदमों की समयसीमा भी तय की है। लक्ष्य यह है कि जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन विकसित कर अधिकांश बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव बनाया जाए।
जिला अस्पतालों को बनाया जा रहा अधिक सक्षम
स्वास्थ्य विभाग जिला अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने पर काम कर रहा है। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आवश्यक संसाधनों का विस्तार भी किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यदि जिला अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो मरीजों को राजधानी या बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख कम करना पड़ेगा।
इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव भी घटेगा और मरीजों का समय तथा खर्च दोनों बचेंगे।
सरकारी अस्पतालों में भरोसा बढ़ाने की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि राज्य के लोगों को चौबीसों घंटे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं विभिन्न सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे और वहां उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करेंगे। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को समय पर इलाज मिले और सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा मजबूत हो।
सरकार चाहती है कि सरकारी अस्पताल केवल इलाज के केंद्र न रहें, बल्कि लोगों के विश्वास के केंद्र के रूप में भी स्थापित हों।
सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत में सड़क दुर्घटनाएं मौत का एक बड़ा कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
बिहार में टोल प्लाजा पर एंबुलेंस और नए ट्रॉमा सेंटर की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो हाईवे पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है।
