बिहार के 60 लाख गरीब परिवारों को मिल सकता है पक्का घर, CM सम्राट चौधरी ने PM मोदी से की बड़ी मांग
बिहार में पीएम आवास योजना को लेकर बड़ी उम्मीद जगी है। पीएम आवास योजना के तहत पक्का घर पाने का इंतजार कर रहे लाखों गरीब परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि बिहार में चिन्हित 60 लाख पात्र गरीब परिवारों को जल्द आवास स्वीकृत किया जाए। इससे राज्य के उन लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं जो वर्षों से अपने पक्के घर का सपना देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी बुधवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई बैठक के बाद दी। बैठक में ग्रामीण विकास, कृषि और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
पीएम आवास योजना के लिए 60 लाख पात्र परिवारों की पहचान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत व्यापक सर्वेक्षण कराया है। इस प्रक्रिया में बिहार में लगभग 1 करोड़ 4 लाख नए लोगों की पहचान की गई।
इनमें से करीब 60 लाख परिवार योजना की पात्रता शर्तों पर खरे उतरे हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि इन परिवारों को जल्द से जल्द आवास योजना का लाभ देने की मंजूरी प्रदान की जाए।
यदि केंद्र से स्वीकृति मिलती है तो यह देश के सबसे बड़े आवासीय सहायता अभियानों में से एक साबित हो सकता है।
मनरेगा की लंबित राशि जल्द मिलने की उम्मीद
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मनरेगा से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार के विकास के लिए बैकलॉग राशि जारी की है।
इसके साथ ही मनरेगा की लंबित देनदारियों के भुगतान को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार 30 जून से पहले लंबित राशि का भुगतान किए जाने की उम्मीद है।
इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं को गति मिलने की संभावना है। साथ ही मजदूरों और लाभार्थियों को भी राहत मिल सकती है।
बक्सर और लखीसराय में बन सकते हैं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से विशेष सहयोग मांगा है। मुख्यमंत्री ने बक्सर और लखीसराय में टमाटर तथा प्याज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
सरकार का मानना है कि इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और उन्नत खेती के तरीके उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में भी सुधार होने की संभावना है।
बिहार के फलों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बागवानी क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार आम, मखाना, प्याज, टमाटर और अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं विपणन को मजबूत करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए बिहार के फलों और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बढ़ने से किसानों की आमदनी में सीधा फायदा होगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मखाना बोर्ड के गठन पर भी जोर
बैठक में मखाना उद्योग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में मखाना बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस दिशा में सहयोग का आग्रह किया।
मखाना बिहार की पहचान से जुड़ा उत्पाद है और इसके संगठित विकास से हजारों किसानों और व्यापारियों को लाभ मिल सकता है।
कृषि और ग्रामीण विकास पर केंद्र-राज्य समन्वय
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय बिहार के विकास को नई गति दे सकता है। उन्होंने कृषि, बागवानी, ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।
बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है इस घोषणा का महत्व?
बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो अभी भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। यदि 60 लाख पात्र परिवारों को पीएम आवास योजना के तहत मंजूरी मिलती है तो इससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार आ सकता है।
साथ ही कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े प्रस्ताव राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए यह बैठक सिर्फ आवास योजना तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार के व्यापक विकास एजेंडे से भी जुड़ी रही।
