MLC चुनाव से पहले बढ़ा सस्पेंस, राजद का उम्मीदवार लगभग तय; आज खुलेगा नाम


 

MLC चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। MLC चुनाव के लिए एनडीए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुका है, लेकिन इंडिया गठबंधन की ओर से अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन होने के बावजूद राजद ने अपने उम्मीदवार के नाम पर औपचारिक मुहर नहीं लगाई है। हालांकि पार्टी सूत्रों का दावा है कि पूर्व विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राजद नेतृत्व ने संभावित उम्मीदवार को आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने का संकेत दे दिया है। माना जा रहा है कि अंतिम समय में उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी।

आज नामांकन का अंतिम दिन, राजद के सामने समय की चुनौती

बिहार विधान परिषद की नौ सीटों के लिए हो रहे द्विवार्षिक चुनाव में सोमवार नामांकन का अंतिम दिन है। ऐसे में सभी की नजरें राजद पर टिकी हैं।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी का उम्मीदवार सोमवार को ही नामांकन दाखिल करेगा। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के दिल्ली में होने के कारण अंतिम घोषणा में देरी हुई है। यही वजह है कि रविवार देर शाम तक भी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं और फिलहाल दिल्ली में हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बैठकों में व्यस्त हैं। दोनों नेताओं की मौजूदगी के बाद ही उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

सुनील कुमार सिंह क्यों माने जा रहे हैं सबसे बड़े दावेदार?

राजद के भीतर चल रही चर्चाओं में सुनील कुमार सिंह का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि संगठन और सदन दोनों स्तर पर उनका अनुभव उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाता है।

सूत्रों के अनुसार, उन्हें पहले से ही आवश्यक कागजात तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतिम समय में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो राजद की ओर से सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

जीत के लिए कितने वोट चाहिए?

विधान परिषद चुनाव में जीत का गणित भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में एक उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 वोटों की आवश्यकता होगी।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राजद के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। इसी वजह से पार्टी की एक सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विधायकों का समर्थन अपेक्षित रूप से बना रहता है तो राजद के उम्मीदवार की जीत की संभावना मजबूत रहेगी।

AIMIM ने भी किया था सीट का दावा

इस चुनाव से पहले एआईएमआईएम ने भी इंडिया गठबंधन के भीतर अपनी हिस्सेदारी का दावा पेश किया था। पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने राजद से एक सीट देने की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि राज्यसभा चुनाव के दौरान एआईएमआईएम ने अपना दावा छोड़कर इंडिया गठबंधन का समर्थन किया था। उस समय भविष्य में सहयोग का भरोसा दिया गया था।

हालांकि अब तक सीट बंटवारे को लेकर कोई सकारात्मक संकेत सामने नहीं आया है। ऐसे में राजद के अपने उम्मीदवार उतारने की संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है।

एनडीए की स्थिति क्यों मजबूत मानी जा रही है?

दूसरी ओर एनडीए पहले ही अपने नौ में से आठ उम्मीदवारों की तस्वीर लगभग साफ कर चुका है। विधानसभा में उसके पास करीब 202 विधायकों का समर्थन है।

संख्याबल के आधार पर एनडीए के लिए आठ सीटों पर जीत का रास्ता काफी आसान माना जा रहा है। यही वजह है कि चुनावी मुकाबले में सबसे अधिक चर्चा नौवीं सीट को लेकर हो रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मौजूदा समीकरणों में एनडीए और राजद दोनों अपने-अपने संभावित जीत के आंकड़े को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

आगे क्या होगा?

9 जून को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 18 जून को होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजद आधिकारिक तौर पर किस चेहरे पर भरोसा जताता है। सोमवार को नामांकन के साथ ही इस सस्पेंस से पर्दा उठने की संभावना है।

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह चुनाव सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत का संकेत भी माना जा रहा है।

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