उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का अस्तित्व किसी भी परिस्थिति में समाप्त नहीं होगा। पटना में आयोजित रालोमो के राज्य महाधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एनडीए में विलय की चर्चाएं पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा थी, है और आगे भी बनी रहेगी।
रविवार को रवींद्र भवन में आयोजित सम्मेलन के दौरान कुशवाहा ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया में कई बार रालोमो के विलय की खबरें चलाई गईं, लेकिन उनमें कोई सच्चाई नहीं थी। उन्होंने कहा कि किसी एक पद या राजनीतिक परिस्थिति के कारण पार्टी का अस्तित्व खत्म नहीं हो सकता।
रालोमो और जदयू की विचारधारा पर क्या बोले कुशवाहा?
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जदयू और रालोमो की विचारधारा काफी हद तक समान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की विचारधारा अलग है। उनके अनुसार, राजनीतिक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन इससे गठबंधन और दलों की मूल पहचान प्रभावित नहीं होती।
उन्होंने दावा किया कि रालोमो की राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी राज्य सरकार में हिस्सेदार है और भविष्य में भी बनी रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
एनडीए में बने रहने का दोहराया भरोसा
महाधिवेशन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एनडीए के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कायम है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन धर्म का पालन करती है और गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी का सम्मान भी करती है।
कुशवाहा ने कहा कि एनडीए में बने रहने को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ी है।
निशांत कुमार को लेकर भी दिया बयान
अपने संबोधन में उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले उनकी ओर से यह सुझाव दिया गया था कि निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए।
कुशवाहा का मानना है कि जदयू के भविष्य और संगठनात्मक मजबूती के लिए निशांत कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि वह राजनीति में आते हैं तो उन्हें सिर्फ मंत्री नहीं बल्कि उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
दीपक प्रकाश को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?
राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं।
हाल ही में घोषित एमएलसी चुनाव उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उनके मंत्री पद के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। ऐसे में एमएलसी चुनाव में मौका नहीं मिलने के कारण राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि उपेंद्र कुशवाहा ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि किसी एक पद के कारण पार्टी की दिशा और अस्तित्व तय नहीं होता।
रालोमो संगठन में हुए बड़े बदलाव
राज्य महाधिवेशन में संगठनात्मक फेरबदल की भी घोषणा की गई। विधायक आलोक कुमार सिंह को एक बार फिर रालोमो का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
इसके अलावा प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव नियुक्त किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दो नामांकन दाखिल हुए थे, लेकिन दोनों उम्मीदवारों ने अंतिम निर्णय का अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंप दिया। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने नए पदाधिकारियों की घोषणा की।
बिहार की राजनीति में क्या संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में एमएलसी चुनाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
रालोमो के विलय की अटकलों को खारिज कर कुशवाहा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेगी। साथ ही उन्होंने एनडीए के प्रति अपनी निष्ठा दोहराकर गठबंधन में किसी तरह की असहजता की संभावनाओं को भी कम करने का प्रयास किया है।
आने वाले दिनों में एमएलसी चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियां यह तय करेंगी कि बिहार की राजनीति में रालोमो की भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है।
