भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नया मोड़, रात में परिजनों से मिले एसपी राज, निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा


 भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार में सियासी और सामाजिक हलचल लगातार तेज बनी हुई है। भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में बुधवार को आयोजित महापंचायत के कुछ घंटों बाद ही भोजपुर के एसपी राज पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एसपी ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया और उनकी बातों को गंभीरता से सुनने की बात कही। बताया जा रहा है कि एसपी राज देर रात अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने करीब एक घंटे तक परिवार के सदस्यों, माता-पिता और अन्य परिजनों से बातचीत की।

एसपी राज ने परिजनों से क्या कहा?

मुलाकात के दौरान एसपी राज ने परिवार को आश्वस्त करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वह अपनी बात रखने नहीं बल्कि पीड़ित परिवार की बात सुनने आए हैं। परिजनों ने भी अपनी चिंता और नाराजगी खुलकर जाहिर की। परिवार का कहना था कि इस बार उन्हें किसी तरह का धोखा नहीं मिलना चाहिए और मामले में हर कदम पूरी जांच के बाद ही उठाया जाना चाहिए। एसपी राज ने भरोसा दिलाया कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

मां ने की CBI जांच और कार्रवाई की मांग

भरत तिवारी की मां ने मुलाकात के दौरान बेटे की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। परिवार की ओर से यह भी मांग की गई कि यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। मुलाकात के दौरान एसपी ने परिवार की सभी बातें ध्यान से सुनीं और जांच प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने का आश्वासन दिया।

सरकार ने न्यायिक जांच आयोग को दी मंजूरी

दूसरी ओर बिहार सरकार ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने विभागीय अधिसूचना के माध्यम से न्यायिक जांच आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से गठित इस आयोग की अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा करेंगे। आयोग को घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। यह आयोग निर्धारित शर्तों और जांच बिंदुओं के आधार पर मामले की समीक्षा करेगा। इसके बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।

न्यायिक जांच आयोग की भूमिका क्या होगी?

न्यायिक जांच आयोग का मुख्य उद्देश्य घटना के हर पहलू की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करना है। आयोग यह पता लगाएगा कि एनकाउंटर की परिस्थितियां क्या थीं और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। साथ ही आयोग उन तथ्यों की भी समीक्षा करेगा जिनको लेकर समाज के विभिन्न वर्गों और परिजनों ने सवाल उठाए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

महापंचायत में उठी 'भरत तिवारी नगर' की मांग

बुधवार को आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान मौजूद लोगों ने एक विशेष मांग भी रखी। महापंचायत में कहा गया कि जवइनिया गांव के विस्थापित और पीड़ित लोगों को जिस स्थान पर बसाया जा रहा है, उस क्षेत्र का नाम "भरत तिवारी नगर" रखा जाए। लोगों का तर्क था कि भरत तिवारी ने गांव के लोगों की समस्याओं को उठाया था और उनके संघर्ष को आने वाली पीढ़ियां याद रखें। महापंचायत में मौजूद लोगों ने इस मांग को लेकर सरकार और प्रशासन से सकारात्मक पहल करने की अपील भी की।

आगे क्या?

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब दो समानांतर प्रक्रियाएं चल रही हैं। एक तरफ पुलिस स्तर पर जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने न्यायिक जांच आयोग गठित कर दिया है। परिजनों की मांग, महापंचायत में उठी आवाज और सरकार के फैसले के बाद अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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