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नीतीश कुमार से मिले CM सम्राट चौधरी, BJP-JDU के बीच तनाव की चर्चा तेज

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 बिहार की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिहार MLC चुनाव में हार के बाद जेडीयू प्रत्याशियों ने बीजेपी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। बिहार MLC चुनाव के नतीजों के बाद सहयोगी दलों के बीच नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात में डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दोनों दलों के बीच गठबंधन धर्म को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव में जेडीयू के कुछ प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पार्टी के उम्मीदवारों ने बीजेपी पर अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था। हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुलाकात को लेकर अलग वजह बताई। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नीतीश कुमार को बधाई देने पहुंचे थे।

नीतीश कुमार से मुलाकात पर क्या बोले सम्राट चौधरी?

दिल्ली के तीन दिवसीय दौरे से मंगलवार रात पटना लौटने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार सुबह नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की और इसकी वजह बताई। सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वह नीतीश कुमार को बधाई देने आए थे। उन्होंने बताया कि बिहार में गाद निकालने की नीति पर काम किया जा रहा है। नीतीश कुमार ने पहले भी इस मुद्दे को लगातार उठाया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नीतीश कुमार ने इस विषय पर जो पहल की थी, उसे अब आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के साथ भी समझौता किया गया है। इससे बिहार में बाढ़ की समस्या से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है। गाद निकालने का काम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सहयोग से किया जाएगा। सम्राट चौधरी ने इसे बिहार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

MLC चुनाव के बाद क्यों उठे BJP-JDU के रिश्तों पर सवाल?

बीजेपी और जेडीयू के बीच नाराजगी की चर्चा की मुख्य वजह हालिया एमएलसी चुनाव के नतीजे हैं। चुनाव में जेडीयू के कुछ उम्मीदवारों को हार मिली। इसके बाद पार्टी के नेताओं ने सहयोगी बीजेपी की भूमिका पर सवाल खड़े किए। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के उम्मीदवार रहे आनंद पुष्कर ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि सहयोगी दल ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया। आनंद पुष्कर ने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनके साथ छल हुआ है। उन्होंने बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि एनडीए के दोनों प्रमुख सहयोगियों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, अभी तक बीजेपी या जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन में किसी बड़े विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अभिषेक झा ने भी जताई थी नाराजगी

सिर्फ आनंद पुष्कर ही नहीं, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के उम्मीदवार रहे अभिषेक झा भी चुनाव परिणाम से नाराज बताए गए। अभिषेक झा ने भी सहयोगी दल की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए संवाददाता सम्मेलन करने का ऐलान किया था। हालांकि, बाद में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाल दिया। इसके बावजूद उनके रुख ने बीजेपी और जेडीयू के बीच राजनीतिक खींचतान की चर्चाओं को हवा दी। चुनाव में हार के बाद जेडीयू नेताओं की नाराजगी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों दल बिहार में लंबे समय से गठबंधन की राजनीति करते रहे हैं।

निर्दलीय MLC के बीजेपी को समर्थन देने से बढ़ी चर्चा

एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद दो निर्दलीय उम्मीदवारों का बीजेपी को समर्थन देना भी चर्चा का विषय बना। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीतने वाले राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी बंशीधर ब्रजवासी चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की खबरें सामने आईं। हालांकि, इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद बंशीधर ब्रजवासी ने सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने बीजेपी की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि पार्टी को समर्थन दिया है। बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कोई निर्दलीय उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल को समर्थन देता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है। वहीं, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा था कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगी।

क्या NDA में सबकुछ ठीक है?

बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन की मजबूती राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में एमएलसी चुनाव के बाद सामने आई नाराजगी को हल्के में नहीं देखा जा रहा है। आनंद पुष्कर और अभिषेक झा के बयानों ने दोनों दलों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, निर्दलीय एमएलसी के बीजेपी को समर्थन देने से भी जेडीयू के कुछ नेताओं की नाराजगी सामने आई है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान विकास, बाढ़ नियंत्रण और गाद निकालने की नीति जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने नीतीश कुमार के शासनकाल और उनके योगदान की भी सराहना की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब एनडीए के भीतर राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, सम्राट चौधरी की ओर से मुलाकात का कारण प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से बधाई देना बताया गया है। इसलिए इसे बीजेपी-जेडीयू के बीच चल रही नाराजगी का सीधा समाधान मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि एमएलसी चुनाव के बाद जेडीयू नेताओं की नाराजगी पर दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर समन्वय किस तरह आगे बढ़ता है।

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