राम मंदिर दान चोरी मामले में SC का बड़ा फैसला, CBI जांच की मांग पर लगी रोक
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अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद शीर्ष अदालत ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। अदालत ने साफ किया कि अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा करने का मतलब आरोपों को सही या गलत ठहराना नहीं है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति दी गई है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों, संपत्ति में निवेश और पैसों के लेन-देन की पड़ताल की गई। सरकार के मुताबिक, मंदिर की कलाकृतियों और अन्य चढ़ावे का ऑडिट भी कराया गया, जिसमें सभी वस्तुएं सुरक्षित मिलीं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बंद की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाएं?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थीं।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने कहा कि कथित चोरी नकदी की गिनती के दौरान हुई थी।
सरकार की दलील थी कि जांचकर्ताओं ने आरोपों से जुड़े कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच की। इसमें जमा रकम और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता लगाया गया। कुछ आरोपियों की ओर से संपत्ति खरीदने की जानकारी भी सामने आई।
सरकार ने इन तथ्यों को जांच का आधार बताते हुए कहा कि अब मामला ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं समझी।
45 दिनों की CCTV फुटेज के कारण जांच में आई चुनौती
सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज का मुद्दा भी उठा। सरकार की ओर से बताया गया कि मंदिर परिसर में उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रहती है। इसके बाद पुरानी रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट हो जाती है।
ऐसे में कथित घटना से जुड़ी पुरानी फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी। हालांकि, जांच एजेंसियों ने केवल वीडियो रिकॉर्डिंग पर निर्भर रहने के बजाय बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांचकर्ताओं ने आरोपियों के खातों में जमा रकम का पिछली अवधि से मिलान किया। इसके अलावा संपत्ति की खरीद से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई।
सरकार की ओर से उदाहरण देते हुए बताया गया कि एक संपत्ति के बिक्री दस्तावेज में कीमत 15 लाख रुपये दर्ज थी, जबकि उसकी वास्तविक कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई। सरकार ने इस अंतर को कथित नकद भुगतान और संदिग्ध आय से जोड़कर जांच का हिस्सा बताया।
हालांकि, ये बातें सरकार की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इनकी अंतिम सत्यता का निर्धारण मुकदमे की सुनवाई के दौरान होगा।
ऑडिट में सुरक्षित मिलीं मंदिर की कलाकृतियां और भेंट
मामले की सुनवाई में मंदिर की संपत्ति और चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मंदिर में रखी कलाकृतियों और श्रद्धालुओं की ओर से दी गई भेंट का ऑडिट कराया गया है।
सरकार के अनुसार, जांच और ऑडिट में सभी कलाकृतियां तथा चढ़ावे से जुड़ी वस्तुएं सुरक्षित पाई गईं। यानी कथित गड़बड़ी का आरोप मुख्य रूप से नकदी की गिनती और उसके कथित गबन से संबंधित है।
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर भी मौखिक टिप्पणी की। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि जरूरी उपाय पहले ही किए जा चुके हैं।
मंदिर में दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि श्रद्धालु बड़ी संख्या में धार्मिक स्थलों पर नकद और अन्य रूपों में भेंट चढ़ाते हैं।
याचिकाकर्ता अब ट्रायल कोर्ट की मदद कर सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को एक महत्वपूर्ण राहत दी। अदालत ने कहा कि वे संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चलने वाली कार्यवाही के दौरान कोर्ट की सहायता कर सकते हैं।
पीठ ने माना कि इस मामले में सार्वजनिक हित का पहलू भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे केवल आरोपी और राज्य के बीच का सामान्य विवाद नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि कानून के तहत अपराध से प्रभावित पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया में सहायता करने का अधिकार मिलता है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट के सामने अपनी बात रखने और कार्यवाही में सहयोग करने की स्वतंत्रता दी गई।
इसका अर्थ यह नहीं है कि याचिकाकर्ताओं को जांच या मुकदमे का नियंत्रण मिल गया है। मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी कार्रवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार करेंगे।
क्या अब राम मंदिर दान चोरी मामले में CBI जांच होगी?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया है। पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल होने और राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
अब मामले में आगे की प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में चलेगी। वहां उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और आरोपों के आधार पर कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के सही या गलत होने पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। इसलिए आरोपियों की जिम्मेदारी और मामले की वास्तविक स्थिति का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
राम मंदिर से जुड़े इस मामले में अब सबकी नजर ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आए बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत में किस तरह प्रस्तुत किए जाते हैं।
