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125 यूनिट मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील पर चिराग पासवान ने दिया समर्थन, सम्राट सरकार के फैसले पर कही बड़ी बात

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बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सक्षम लोगों से स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री की इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने इसे सकारात्मक सोच बताते हुए कहा कि राज्य का विकास करना है तो राजस्व बढ़ाना भी जरूरी है। चिराग पासवान के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में मुफ्त बिजली और सरकारी राजस्व का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। एक तरफ सरकार समर्थक इसे राज्य के विकास में लोगों की भागीदारी से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।

चिराग पासवान ने क्यों किया मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन?

मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने कहा कि विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए बिहार का विकास जरूरी है। राज्य तभी आगे बढ़ेगा, जब उसके पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन और मजबूत राजस्व व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग विभागों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने के उपाय कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपील भी इसी दिशा में एक कदम है। चिराग के मुताबिक, यह सिर्फ पैसे बचाने का मामला नहीं है, बल्कि बिहार को आगे ले जाने की सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग अगर स्वेच्छा से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ते हैं तो इससे राज्य के विकास में योगदान मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने फिलहाल लोगों से आग्रह किया है। यह कोई अनिवार्य फैसला नहीं है। जो लोग इस पहल के लिए आगे आएंगे, उनकी पार्टी उनका धन्यवाद करेगी और उन्हें बधाई देगी।

क्या 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना होगी बंद?

मुख्यमंत्री की अपील के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना बंद होने वाली है?

फिलहाल मुख्यमंत्री की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने केवल आर्थिक रूप से संपन्न और आयकर देने वाले लोगों से स्वेच्छा से इस सुविधा का लाभ छोड़ने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1 नवंबर को पटना में आयोजित पाटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद-2.0 के दौरान यह अपील की थी। उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार बिजली सब्सिडी पर हर साल करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। उनके मुताबिक, प्रति परिवार सालाना लगभग 8 हजार से 10 हजार रुपये की सब्सिडी का खर्च आता है। इसलिए मुख्यमंत्री चाहते हैं कि जो परिवार आर्थिक रूप से सक्षम हैं और बिजली बिल का भुगतान कर सकते हैं, वे खुद आगे आकर इस सुविधा को छोड़ने पर विचार करें। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मुख्यमंत्री की अपील को योजना समाप्त करने के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह स्वैच्छिक पहल है।

मुफ्त बिजली के मुद्दे पर आरजेडी ने सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री की अपील पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं ने सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव, भाई वीरेंद्र समेत पार्टी के कई नेताओं ने सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर टिप्पणी की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार के खजाने की स्थिति ठीक नहीं है। इसी वजह से लोगों से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील की जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पहल को बिहार के विकास और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने से जोड़कर पेश किया जा रहा है। चिराग पासवान ने भी विपक्ष के सवालों के बीच मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अलग-अलग राजनीतिक तर्क सामने आ रहे हैं। एक तरफ सरकार इसे सक्षम लोगों की स्वैच्छिक भागीदारी बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे राज्य की वित्तीय स्थिति से जोड़कर सवाल उठा रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण यूनिट से भी बढ़ेगा बिहार का राजस्व

चिराग पासवान ने बिहार के आर्थिक विकास को लेकर खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय राज्य में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयां स्थापित करने की दिशा में काम करेगा। इससे बिहार में उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ राज्य के राजस्व को भी मजबूती मिल सकती है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे किसानों की उपज को बेहतर बाजार मिल सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। चिराग का कहना था कि बिहार को विकसित बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें आम लोगों, उद्योगों और आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की भागीदारी भी जरूरी है।

निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में जाने पर क्या बोले चिराग?

बातचीत के दौरान चिराग पासवान से निर्दलीय विधान पार्षद राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी से जुड़े सवाल भी पूछे गए। इन दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने की चर्चा पर चिराग ने कहा कि उन्हें इस संबंध में आधिकारिक जानकारी नहीं है। भाजपा और संबंधित निर्दलीय विधान पार्षद ही इस बारे में फैसला ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निर्दलीय विधान पार्षदों को किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने में कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, इस तरह के मामले में कानूनी बाध्यताओं को लेकर चिंताएं हो सकती हैं। चिराग ने इस मुद्दे पर ज्यादा विस्तार से बोलने से परहेज किया और फैसला संबंधित पक्षों पर छोड़ दिया।

रामलीला मैदान की रैली पर भी विपक्ष को घेरा

चिराग पासवान ने विपक्ष की रामलीला मैदान में आयोजित रैली को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने इस रैली को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन उनके मुताबिक मैदान में उम्मीद के अनुसार भीड़ नहीं पहुंची। उन्होंने दावा किया कि ड्रोन से ली गई तस्वीरों में रैली की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही थी। चिराग ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल जनता से जुड़ने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने रैली के आयोजन के समय पर भी सवाल उठाए। चिराग का कहना था कि त्योहारों के मौसम में इस तरह के बड़े आयोजन से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। साथ ही व्यापारियों के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, रैली में भीड़ और विपक्ष की लोकप्रियता को लेकर चिराग की ये टिप्पणियां उनका राजनीतिक आकलन हैं।

बिहार में मुफ्त बिजली पर आगे क्या होगा?

125 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर मुख्यमंत्री की अपील के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों में कितने लोग स्वेच्छा से इस सुविधा को छोड़ने के लिए आगे आते हैं। चिराग पासवान ने इस पहल को समर्थन देकर एनडीए के सहयोगी दल के रूप में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। वहीं, आरजेडी इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रही है। फिलहाल इतना साफ है कि मुख्यमंत्री की अपील स्वैच्छिक है और मुफ्त बिजली योजना बंद करने की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले समय में इस पहल पर लोगों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।

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