बिहार में शिक्षकों से वेतन की वसूली तेज, कैमूर में 93 लाख का मामला
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बिहार में शिक्षकों के दोहरे वेतन भुगतान का मामला अब कई जिलों में शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कैमूर में 201 शिक्षकों के खातों में पदोन्नति के बाद दो बार वेतन पहुंचने से 93 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ था। वहीं, भागलपुर और बांका में भी शिक्षकों के दोहरे वेतन भुगतान और अतिरिक्त निकासी से जुड़े मामलों में वसूली तेज कर दी गई है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर और बांका में चिह्नित 43 मामलों में कुल 1.22 करोड़ रुपये की वसूली होनी है। इसमें से 67.61 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए जा चुके हैं। इसके अलावा भागलपुर के करीब 350 अन्य शिक्षक भी संभावित अतिरिक्त भुगतान की जांच के दायरे में हैं।
कैमूर में 201 शिक्षकों के खातों में कैसे पहुंचा दोहरा वेतन?
कैमूर जिले में वर्ष 2025 के दौरान 201 शिक्षकों को विशिष्ट शिक्षक से प्रधान शिक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी। पद परिवर्तन के बाद अगस्त महीने का वेतन जारी करते समय विभागीय स्तर पर गलती हो गई।
बताया गया है कि इन शिक्षकों के बैंक खातों में प्रधान शिक्षक के वेतन के साथ विशिष्ट शिक्षक का वेतन भी भेज दिया गया। इस वजह से कुल 93 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि खातों में पहुंच गई।
मामला सामने आने के बाद तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने संबंधित शिक्षकों को अतिरिक्त भुगतान वापस करने के लिए पत्र जारी किया था। हालांकि, नोटिस के बावजूद निर्धारित समय में पूरी राशि वापस नहीं आई।
अब राज्य के अलग-अलग जिलों में वेतन भुगतान की गड़बड़ियों की जांच तेज होने के बाद कैमूर में भी रिकवरी की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
जांच समिति कर रही वेतन रिकॉर्ड का मिलान
कैमूर में जिलाधिकारी के निर्देश पर वेतन भुगतान से जुड़े मामलों की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। समिति संबंधित शिक्षकों के वेतन अभिलेखों और भुगतान के रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
इस बीच कुछ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने विभाग को प्रमाणपत्र देकर दावा किया है कि उनके संस्थान में किसी शिक्षक को दोहरा वेतन नहीं मिला। विभाग अब इन प्रमाणपत्रों की वास्तविक वेतन रिकॉर्ड से जांच कर रहा है।
जांच का दायरा केवल अगस्त 2025 के अतिरिक्त भुगतान तक सीमित नहीं है। वर्ष 2014-15 से 2019-20 के बीच शिक्षकों की हड़ताल अवधि में हुए भुगतान से जुड़ी शिकायतों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन मामलों में वास्तव में अतिरिक्त भुगतान हुआ और किन मामलों में रिकॉर्ड या तकनीकी त्रुटि के कारण भ्रम की स्थिति बनी।
एनपीएस की राशि वापस मांगने पर शिक्षकों ने उठाए सवाल
कैमूर में रिकवरी की कार्रवाई के बीच शिक्षकों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस की राशि को लेकर आपत्ति जताई है।
प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि अगस्त महीने में उनके बैंक खातों में वेतन दो बार आया था, लेकिन एनपीएस का अंशदान केवल एक बार ही जमा हुआ। ऐसे में उनका सवाल है कि जब एनपीएस की राशि दोहराई नहीं गई, तो उसकी वसूली किस आधार पर की जा रही है?
शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों से इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि वेतन की अतिरिक्त राशि और एनपीएस अंशदान की गणना अलग-अलग तरीके से होनी चाहिए।
अब इस मामले में विभागीय रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि रिकवरी को लेकर किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
भागलपुर-बांका में 43 मामलों में 1.22 करोड़ की वसूली
भागलपुर प्रमंडल में भी सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज हुई है।
क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के अनुसार, भागलपुर और बांका जिलों में कुल 43 मामले चिह्नित किए गए हैं। इन मामलों में 1.22 करोड़ रुपये की वसूली होनी है। अब तक 67.61 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए जा चुके हैं।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति इस प्रकार है:
भागलपुर में रिकवरी की स्थिति
चिह्नित मामले: 31
कुल वसूली योग्य राशि: 1.04 करोड़ रुपये
अब तक वसूली: 53.43 लाख रुपये
शेष राशि: 51.24 लाख रुपये
बांका में रिकवरी की स्थिति
चिह्नित मामले: 12
कुल वसूली योग्य राशि: 18.20 लाख रुपये
अब तक वसूली: 14.18 लाख रुपये
शेष राशि: 4.01 लाख रुपये
अधिकारियों के मुताबिक, ये आंकड़े औपबंधिक रिपोर्ट पर आधारित हैं। अंतिम समीक्षा के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की जांच
भागलपुर में अतिरिक्त वेतन भुगतान के मामलों के अलावा फर्जी शिक्षिका तनुश्री के नाम पर कथित वित्तीय गड़बड़ी की भी जांच चल रही है।
इस मामले में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन की बात सामने आई है। विभागीय कार्रवाई के तहत संबंधित बैंक खाते में मौजूद 46.87 लाख रुपये की राशि को होल्ड यानी फ्रीज कराया गया है।
मामले के मुख्य आरोपित संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब कथित गबन की शेष राशि की वापसी के लिए आरोपित के परिवार के सदस्यों से भी संपर्क किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में अंतिम वित्तीय स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
भागलपुर के 350 अन्य शिक्षक भी जांच के दायरे में
शिक्षा विभाग की जांच अब पहले से चिह्नित मामलों से आगे बढ़ रही है। भागलपुर जिले के करीब 350 ऐसे शिक्षकों के बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है, जिनके निर्धारित वेतन स्लैब से अधिक राशि मिलने की आशंका है।
फिलहाल इन शिक्षकों की सूची संभावित है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के स्तर पर वेतन रिकॉर्ड और बैंक भुगतान का मिलान किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद ही तय होगा कि कितने शिक्षकों के खातों में वास्तव में अतिरिक्त भुगतान हुआ है। केवल जांच सूची में नाम होने से किसी शिक्षक को दोषी नहीं माना जा सकता।
शिक्षा विभाग की शिक्षकों से अपील, अतिरिक्त राशि लौटाएं
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों से अपील की है कि यदि उनके बैंक खाते में निर्धारित वेतन से अधिक राशि आई है, तो वे नियमानुसार उसे वापस जमा कर दें।
विभाग का मानना है कि समय पर अतिरिक्त भुगतान लौटाने से अनावश्यक विभागीय कार्रवाई और अन्य कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बिहार में वेतन भुगतान की गड़बड़ियों को लेकर जांच और रिकवरी की प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है। अब शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि विभाग जांच पूरी कर किस आधार पर अंतिम वसूली तय करता है।
