बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, 4000 अमीनों की होगी तैनाती
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बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों और अमीनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल से आम लोगों के जमीन और राजस्व से जुड़े काम प्रभावित न हों, इसके लिए सरकार वैकल्पिक व्यवस्था करने जा रही है। इसके तहत विशेष सर्वेक्षण अमीनों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
मंत्री के मुताबिक, हड़ताल पर गए कई कर्मचारी और अमीन वापस काम पर लौट चुके हैं। हालांकि, जो कर्मचारी अब भी काम से दूर हैं, उनके स्थान पर दूसरे कर्मियों की तैनाती की तैयारी पूरी कर ली गई है।
4000 तक विशेष सर्वेक्षण अमीनों को मिल सकती है जिम्मेदारी
दिलीप जायसवाल ने बताया कि राजस्व विभाग ने कामकाज जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत लगभग 3,200 से 4,000 विशेष सर्वेक्षण अमीनों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग में करीब 13,000 अमीन सर्वेक्षण कार्य में लगे हुए हैं। इनमें से उपलब्ध अमीनों की मदद से हड़ताल के कारण खाली हुई जिम्मेदारियों को संभालने की योजना बनाई गई है।
सरकार की कोशिश है कि कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद जमीन से जुड़े जरूरी काम नहीं रुकें। खासकर दाखिल-खारिज, राजस्व अभिलेख और सर्वेक्षण से संबंधित कार्यों में आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, कितने अमीनों को किस क्षेत्र में तैनात किया जाएगा और उन्हें कौन-कौन से कार्य सौंपे जाएंगे, इसका विस्तृत कार्यक्रम विभागीय स्तर पर स्पष्ट होना बाकी है।
हड़ताल पर गए कर्मचारियों के डोंगल भी किए जा रहे बंद
मंत्री ने कहा कि हड़ताल पर गए कर्मचारियों के डोंगल भी बंद किए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकारी कामकाज को जारी रखने में मदद मिलेगी और हड़ताल का असर राजस्व संबंधी सेवाओं पर कम किया जा सकेगा।
उन्होंने साफ कहा कि जो कर्मचारी वापस काम पर आ रहे हैं, उनका स्वागत है। लेकिन सरकार की अपील और सकारात्मक बातचीत के बावजूद जो कर्मचारी काम पर नहीं लौटेंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य राजस्व विभाग के कामकाज को सामान्य बनाए रखना है। मंत्री ने संकेत दिया कि किसी भी स्थिति में आम जनता को सरकारी सेवाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
राजस्व कर्मचारियों की मांगों पर सरकार ने क्या कहा?
दिलीप जायसवाल ने बताया कि जब उन्होंने लगभग तीन-चार महीने पहले मंत्री पद संभाला था, उस समय राजस्व कर्मचारी, अमीन और अंचल अधिकारी अलग-अलग मांगों को लेकर हड़ताल पर थे।
सरकार ने तीनों वर्गों के कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया। मंत्री के अनुसार, अंचल अधिकारियों की हड़ताल समाप्त हो चुकी है और वे अपना काम कर रहे हैं।
वहीं राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की मांगों पर विभाग दो बार बातचीत कर चुका है। मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों की उचित मांगों पर सरकार सकारात्मक फैसला लेने के लिए तैयार है।
हालांकि, कर्मचारियों की एक प्रमुख मांग पदनाम में बदलाव से जुड़ी है। वे अपने वर्तमान पदनाम को बदलकर सहायक राजस्व अधिकारी (Assistant Revenue Officer) करने की मांग कर रहे हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मांग को तत्काल स्वीकार करना संभव नहीं है। सरकार सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय ले सकती है।
17 साल की पदोन्नति प्रक्रिया को कम करने पर विचार
राजस्व कर्मचारियों की पदोन्नति का मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि सामान्य तौर पर राजस्व अधिकारी के पद तक पहुंचने में लगभग 17 वर्ष का समय लग जाता है।
कर्मचारियों की इस समस्या को देखते हुए सरकार पदोन्नति प्रक्रिया में एक अतिरिक्त चरण जोड़ने पर विचार कर सकती है।
मंत्री के अनुसार, प्रस्ताव के तहत 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदनाम, ग्रेड और वेतनमान में बदलाव का लाभ देने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
इससे कर्मचारियों को लंबे समय तक एक ही पद पर काम करने की स्थिति से राहत मिल सकती है। हालांकि, यह अभी विचाराधीन प्रस्ताव है। इसे सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के साथ इस विषय पर सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है। सरकार चाहती है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकले और विभाग का काम भी प्रभावित न हो।
आम लोगों के जमीन से जुड़े काम पर क्या पड़ेगा असर?
राजस्व विभाग का काम सीधे आम नागरिकों से जुड़ा होता है। जमीन के रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज, मापी, सर्वेक्षण और अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं के लिए लोगों को अंचल कार्यालयों और संबंधित कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में कर्मचारियों की लंबी हड़ताल से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। कई लोगों के जमीन से जुड़े आवेदन और जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पाते।
विशेष सर्वेक्षण अमीनों की वैकल्पिक तैनाती से विभाग को कामकाज जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कितनी जल्दी कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपती है और अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवस्था कैसे लागू होती है।
फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि हड़ताल के कारण राजस्व विभाग का कामकाज ठप नहीं होने दिया जाएगा।
कर्मचारियों और सरकार के बीच आगे क्या होगा?
बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर अब सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत का अगला दौर महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कामकाज सामान्य रखने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों की पदनाम परिवर्तन और पदोन्नति से जुड़ी मांगें भी चर्चा में हैं।
सरकार ने उचित मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया है, लेकिन काम पर वापस नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
अब देखना होगा कि सरकार की सख्ती और बातचीत की पहल के बाद कितने कर्मचारी काम पर लौटते हैं और विशेष सर्वेक्षण अमीनों की तैनाती से आम लोगों को कितनी राहत मिलती है।
