बिहार में खुलेंगे 100 मछली बिक्री केंद्र, अब एक जगह मिलेगी ताजी मछली
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बिहार में मछली खाने और खरीदने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब ताजी और जीवित मछलियां खरीदने के लिए अलग-अलग बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार सुधा बूथ की तर्ज पर बिहार में 100 फ्रेश कैच कियोस्क खोलने जा रही है। इन केंद्रों पर लोगों को साफ-सुथरे वातावरण में ताजी और जीवित मछलियां मिलेंगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को पटना के मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन परिसर में राज्य के पहले फ्रेश कैच कियोस्क का उद्घाटन किया। सरकार की इस पहल से मछली पालकों को बाजार और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत मछली की बिक्री के लिए आधुनिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। इन केंद्रों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि बिहार की स्थानीय मछलियों को बेहतर बाजार मिल सके।
बिहार में सुधा बूथ की तर्ज पर खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क
बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य में कुल 100 फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित करना है। इन केंद्रों पर उपभोक्ताओं को अलग-अलग प्रजातियों की ताजी और जीवित मछलियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
अभी कई जगहों पर लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाली मछलियां खरीदने के लिए स्थानीय बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद खरीदारी के लिए एक व्यवस्थित केंद्र उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मीठापुर में पहले कियोस्क का उद्घाटन कर इस पहल की शुरुआत की। उन्होंने केंद्र का निरीक्षण भी किया और वहां उपलब्ध मछलियों की विभिन्न प्रजातियों को देखा।
सरकार का उद्देश्य मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ मछली की बिक्री व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर और डिजिटल पेमेंट की मिलेगी सुविधा
फ्रेश कैच कियोस्क को सामान्य मछली बाजार से अलग आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां मछलियों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम होंगे।
इन बिक्री केंद्रों पर निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है:
कोल्ड चेन: मछलियों को उचित तापमान पर सुरक्षित रखने की व्यवस्था।
डीप फ्रीजर: मछलियों की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने में मदद।
डिस्प्ले काउंटर: ग्राहकों को मछलियों की उपलब्ध प्रजातियां दिखाने की सुविधा।
स्वच्छ पानी: सफाई और रखरखाव के लिए पानी की व्यवस्था।
जल निकासी: गंदे पानी के निस्तारण के लिए उचित इंतजाम।
बिजली और बैकअप: केंद्रों का संचालन सुचारू रखने की सुविधा।
डिजिटल भुगतान: ग्राहकों को ऑनलाइन भुगतान का विकल्प।
अपशिष्ट प्रबंधन: मछली से निकलने वाले कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था।
इन सुविधाओं से ग्राहकों को स्वच्छ वातावरण में मछली खरीदने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय मत्स्य उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
मछली पालकों की आमदनी बढ़ाने पर सरकार का जोर
फ्रेश कैच कियोस्क योजना का एक बड़ा उद्देश्य बिहार के मछली पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
सरकार स्थानीय मत्स्य उत्पादकों और कियोस्क संचालकों के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार करना चाहती है। इससे मछलियों की नियमित आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार किसानों और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के लिए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर बाजार पर काम कर रही है।
उन्होंने बिहार के दूध, सब्जियों और मछलियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
इस पहल से मत्स्य पालन को ग्रामीण रोजगार और कारोबार के नए अवसरों से जोड़ने की संभावना है।
दुग्ध उत्पादकों के खाते में भेजे गए 68.51 करोड़ रुपये
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादकों के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से 1,06,063 लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल 68.51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई।
यह भुगतान 5,832 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से 1,46,66,061 लीटर दूध की आपूर्ति के एवज में किया गया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का भुगतान सीधे बैंक खाते में उपलब्ध कराना है, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो और भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बने।
कार्यक्रम में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने विभाग की योजनाओं और कॉम्फेड की गतिविधियों की जानकारी भी दी।
बिहार में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए 50 लाख लीटर का लक्ष्य
राज्य सरकार दूध उत्पादन और संग्रहण को भी बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच बिहार में 4,804 नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया गया। वर्तमान में राज्य में कुल 33,897 समितियां सक्रिय हैं।
फिलहाल प्रतिदिन लगभग 23.90 लाख किलोग्राम दूध का संग्रहण हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख लीटर करने का लक्ष्य रखा गया है।
दूध संग्रहण और परिवहन की निगरानी के लिए पटना में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी शुरू किया गया है। इसके माध्यम से पूरी व्यवस्था की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए 18003456199 टोल फ्री नंबर पर 'सुधा संपर्क' कॉल सेंटर भी संचालित किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए खुलेंगे जीविका-सुधा बिक्री केंद्र
सरकार दुग्ध कारोबार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए जीविका के सहयोग से राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग के अनुसार, 31 मार्च 2027 तक इन केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य है। इसके साथ ही 3,200 सुधा सखी तैयार करने की योजना भी बनाई गई है।
महिलाओं को पशु औषधि बिक्री केंद्रों के संचालन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
पशुओं की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल, डुमरांव में बछिया पालन केंद्र, मुंगेर में सीमेन स्टेशन और 12 टोटल मिक्स्ड राशन संयंत्र स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
सुधा ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सुधा ब्रांड को बिहार से बाहर भी मजबूत पहचान दिलाना चाहती है। इसके लिए दूध प्रसंस्करण, उत्पादों की गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक पर काम किया जा रहा है।
असम के तेजपुर में प्रतिदिन 20 हजार लीटर क्षमता वाली इकाई शुरू होने की जानकारी भी कार्यक्रम में दी गई। आगे अन्य स्थानों पर भी इकाइयां स्थापित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने पटना के जैविक उद्यान में सुधा कैफेटेरिया और तरकारी दुकान का उद्घाटन किया। इसके बाद मीठापुर में फ्रेश कैच कियोस्क और सुधा पार्लर का भी उद्घाटन किया।
उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
बिहार में 100 फ्रेश कैच कियोस्क खुलने से मछली खरीदने वाले ग्राहकों को एक व्यवस्थित बिक्री केंद्र मिल सकेगा। यहां स्वच्छता, उचित भंडारण और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
दूसरी ओर, स्थानीय मछली पालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक नया बाजार मिल सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मत्स्य कारोबार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन 100 कियोस्क को कितनी तेजी से स्थापित करती है और आम लोगों को इनका लाभ कब से मिलने लगता है।
