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अनंत सिंह का नीरज कुमार पर बड़ा हमला, बोले- एक गलती बता दें, साथ हो जाऊंगा

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मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने एक बार फिर जेडीयू नेता नीरज कुमार के साथ अपने पुराने विवाद को लेकर खुलकर बात की है। अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने ही नीरज कुमार को विधान परिषद का टिकट दिलाने के लिए पार्टी के भीतर पैरवी की थी, लेकिन चुनाव जीतने के बाद नीरज कुमार ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। अब इस पूरे विवाद पर अनंत सिंह ने कहा है कि उनकी एक गलती बता दी जाए, वह नीरज कुमार के साथ हो जाएंगे। एक स्थानीय यूट्यूब चैनल लाइव सिटीज को दिए इंटरव्यू में अनंत सिंह ने जेडीयू की बैठक, नीरज कुमार से नाराजगी, पार्टी से निष्कासन और नीतीश कुमार के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा जैसे कई मुद्दों पर जवाब दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जेडीयू की बैठक में ही उन्होंने साफ कर दिया था कि वह नीरज कुमार के लिए वोट नहीं मांगेंगे।

नीरज कुमार को टिकट दिलाने का अनंत सिंह ने किया दावा

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक खींचतान कोई नई बात नहीं है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के दौरान यह विवाद खुलकर सामने आया था। अनंत सिंह का दावा है कि उन्होंने नीरज कुमार को पहली बार एमएलसी का टिकट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके लिए उन्होंने नीतीश कुमार और ललन सिंह से भी बात की थी। अनंत सिंह के मुताबिक, जब नीरज कुमार चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे तो उनका व्यवहार बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने बाद में उन्हें पहचानने तक से इनकार कर दिया। इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने जेडीयू के अंदर लड़कर नीरज कुमार को टिकट दिलाया था। इसके बावजूद चुनाव जीतने के बाद नीरज कुमार ने उनसे दूरी बना ली। हालांकि, ये सभी बातें अनंत सिंह ने अपने पक्ष में कही हैं। नीरज कुमार का पक्ष इस इंटरव्यू में शामिल नहीं है।

अनंत सिंह ने दोनों नेताओं का नार्को टेस्ट कराने की कही बात

नीरज कुमार के साथ विवाद पर सवाल पूछे जाने पर अनंत सिंह ने एक अलग ही चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं का नार्को टेस्ट करा लिया जाए। इससे पता चल जाएगा कि कौन सच बोल रहा है और कौन गलत। अनंत सिंह ने यह भी कहा कि अगर उनकी कोई गलती है तो उन्हें बता दी जाए। वह नीरज कुमार के साथ हो जाएंगे। उनके इस बयान से साफ है कि वह अभी भी नीरज कुमार के साथ अपने विवाद को लेकर नाराज हैं। हालांकि, उन्होंने बातचीत और विवाद खत्म करने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। अनंत सिंह के मुताबिक, जेडीयू की बैठक में उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह नीरज कुमार के लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे और न ही उनके पक्ष में वोट मांगेंगे।

ललन सिंह ने फोन कर अनंत सिंह से क्या कहा?

अनंत सिंह ने इंटरव्यू में जेडीयू की बैठक के बाद ललन सिंह से हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि बैठक खत्म होने के बाद ललन सिंह ने उन्हें फोन किया था। इस दौरान ललन सिंह ने कहा कि नीरज कुमार के साथ उनका जो भी व्यक्तिगत मामला है, उसे वे आपस में देखें, लेकिन इस विवाद में पार्टी का नाम नहीं आना चाहिए। अनंत सिंह के इस खुलासे ने जेडीयू के अंदर उनके और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। दरअसल, विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की थी। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना था।

'जब तक जिंदा हूं, नीतीश कुमार को ही नेता मानूंगा'

नीरज कुमार से विवाद के बीच अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक वह जिंदा रहेंगे, नीतीश कुमार को ही अपना नेता मानेंगे। अनंत सिंह ने कहा, "मैं जब तक जिंदा रहूंगा, नीतीश कुमार को नेता मानूंगा। नीतीश कुमार नहीं रहते तो बिहार ही नहीं रहता।"

उनके इस बयान की राजनीतिक रूप से काफी अहमियत है, क्योंकि जेडीयू ने नीरज कुमार के खिलाफ बगावती रुख अपनाने के बाद अनंत सिंह पर कार्रवाई की थी। पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही उनकी पत्नी नीलम देवी की सदस्यता भी वापस ले ली गई। जब इंटरव्यू में अनंत सिंह से पार्टी की इस कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। उनके लिए जनता ही सबसे बड़ी है। उन्होंने कहा कि पार्टी को जो कार्रवाई करनी है, वह करे। अनंत सिंह ने दोहराया कि उनकी कोई गलती नहीं है।

जेडीयू से निष्कासन के बाद भी पार्टी नेताओं का फोन नहीं आया

अनंत सिंह ने बातचीत के दौरान यह भी दावा किया कि जेडीयू से निष्कासन के बाद पार्टी के किसी भी नेता ने उनसे फोन पर संपर्क नहीं किया। उनके मुताबिक, पार्टी की सदस्यता खत्म होने के बाद भी किसी नेता ने उनसे इस बारे में बातचीत नहीं की। सरकारी आवास खाली करने के नोटिस को लेकर भी अनंत सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह निर्धारित समय पर आवास खाली कर देंगे और अपने गांव लदमा वापस चले जाएंगे। इस बयान से उन्होंने साफ कर दिया कि फिलहाल आवास खाली करने के मुद्दे पर वह किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं करना चाहते।

विधायकी जाने पर क्या दोबारा चुनाव लड़ेंगे अनंत सिंह?

जेडीयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर भी कार्रवाई शुरू होने की बात सामने आई है। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उनकी विधायकी चली जाती है और उपचुनाव की स्थिति बनती है तो क्या वह फिर से चुनाव लड़ेंगे?

इस पर अनंत सिंह ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पहले वह अपने क्षेत्र में जाएंगे और कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद ही आगे का फैसला लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जनता और कार्यकर्ताओं से पूछकर तय करेंगे कि किस पार्टी में जाना है और किस पार्टी में नहीं। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अनंत सिंह अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहते। वह अपने क्षेत्र के लोगों की राय जानने के बाद ही आगे की रणनीति बनाएंगे।

अनंत सिंह के अगले कदम पर टिकी राजनीतिक नजरें

नीरज कुमार के साथ विवाद, जेडीयू से छह साल का निष्कासन और विधानसभा सदस्यता पर मंडराते संकट के बीच अनंत सिंह का अगला कदम बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है, वहीं दूसरी तरफ जेडीयू की कार्रवाई को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होती है तो क्या वह दोबारा चुनाव मैदान में उतरेंगे? या फिर किसी दूसरे राजनीतिक दल के साथ अपनी नई पारी शुरू करेंगे?  फिलहाल अनंत सिंह ने फैसला जनता और कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया है। आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक रणनीति पर सबकी नजर रहेगी। 

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