कांग्रेस के अलग उम्मीदवार उतारने पर तेजस्वी ने तोड़ी चुप्पी, कहा- विवाद नहीं

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


बिहार की राजनीति में राजद-कांग्रेस के बीच विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। राजद-कांग्रेस ने 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए अलग-अलग उम्मीदवार उतारे हैं। चार सीटों पर दोनों दल आमने-सामने भी होंगे। इसके बाद महागठबंधन में दरार की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा है कि गठबंधन में किसी तरह का विवाद नहीं है। तेजस्वी यादव ने साफ किया कि महागठबंधन में शामिल दल पहले भी विधान परिषद और स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग लड़ते रहे हैं। उनके मुताबिक, इसे आपसी मतभेद या गठबंधन टूटने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

MLC चुनाव में अलग-अलग मैदान में राजद और कांग्रेस

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को चुनाव होना है। इस चुनाव के लिए राजद और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। खास बात यह है कि चार सीटों पर कांग्रेस और राजद के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होगा। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के बीच सबकुछ ठीक चल रहा है। हालांकि, तेजस्वी यादव ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि चुनावी परिस्थितियों के अनुसार सहयोगी दल कई बार अलग-अलग चुनाव लड़ते रहे हैं।

तेजस्वी बोले- विवाद या मतभेद जैसी कोई बात नहीं

दिल्ली से पटना लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और स्थानीय निकायों के चुनाव में सहयोगी दलों का अलग-अलग चुनाव लड़ना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने वाम दलों, कांग्रेस और राजद का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे चुनावों में पार्टियां पहले भी अपने-अपने उम्मीदवार उतारती रही हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति को महागठबंधन के अंदर विवाद से जोड़ना सही नहीं होगा। तेजस्वी के इस बयान से साफ है कि राजद फिलहाल कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर किसी सार्वजनिक टकराव की स्थिति स्वीकार नहीं कर रहा है। पार्टी की कोशिश यही संदेश देने की है कि चुनावी मुकाबला गठबंधन की व्यापक राजनीति से अलग है।

पिछली बार भी अलग लड़े थे, पांच सीटें जीती थीं

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में पिछले विधान परिषद चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों से जुड़े पिछले चुनाव में महागठबंधन के सहयोगी दल अलग-अलग मैदान में उतरे थे। तेजस्वी के मुताबिक, पिछली बार राजद ने अलग चुनाव लड़कर पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार भी पार्टी बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इस बयान को राजद की चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी एक तरफ कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाए रखने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ परिषद चुनाव में अपने संगठन और जनाधार के दम पर मुकाबला करने का संकेत दे रही है।

कांग्रेस ने भी विवाद की अटकलों को किया खारिज

तेजस्वी यादव से पहले कांग्रेस की ओर से भी महागठबंधन में किसी विवाद की संभावना को खारिज किया जा चुका है। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा था कि पार्टी ने उम्मीदवार उतारने का फैसला अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं और जनता के बीच पार्टी की राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया है। कांग्रेस का मानना है कि बिहार में बीजेपी के खिलाफ वह एक मजबूत राजनीतिक चुनौती के रूप में उभर रही है। ऐसे में विधान परिषद के चुनाव में अलग उम्मीदवार उतारना पार्टी की अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। यानी दोनों दलों के बयानों से फिलहाल यही संकेत मिल रहा है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद महागठबंधन के राजनीतिक समीकरण को खत्म मानना जल्दबाजी होगी।

6 अक्टूबर को CEC के खिलाफ विपक्ष का विरोध मार्च

विधान परिषद चुनाव के अलावा तेजस्वी यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर एक कार्ययोजना तैयार की है। हालांकि, उन्होंने योजना के विस्तृत बिंदुओं की जानकारी नहीं दी। तेजस्वी ने दावा किया कि विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगा। तेजस्वी ने ज्ञानेश कुमार और उन्हें उस पद तक पहुंचाने वालों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनके मुताबिक किए गए 'पापों' के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।

क्या राजद-कांग्रेस में सचमुच बढ़ रही दूरी?

राजद और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवार उतारने से राजनीतिक चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन केवल इस आधार पर दोनों दलों के बीच गठबंधन में दरार की पुष्टि नहीं की जा सकती। स्थानीय निकाय, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की राजनीतिक प्रकृति विधानसभा चुनाव से अलग होती है। इन सीटों पर सहयोगी दल कई बार अपने संगठन को मजबूत करने और स्थानीय समीकरणों के आधार पर अलग रणनीति अपनाते हैं। इसलिए फिलहाल तेजस्वी यादव और कांग्रेस की ओर से दिए गए बयानों को देखें तो दोनों दल महागठबंधन के भीतर किसी बड़े विवाद से इनकार कर रहे हैं। असली तस्वीर चुनावी नतीजों और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ज्यादा स्पष्ट होगी।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1