शिवहर में दिवंगत रसोइया के पति को मिले ₹4 लाख, डीएम ने सौंपा डमी चेक
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शिवहर: बिहार के शिवहर जिले में दिवंगत रसोइया-सह-सहायक के आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशानुसार बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना के तहत दिवंगत रसोइया-सह-सहायक के पति उपेंद्र साह को 4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया गया। राशि बैंक खाते में हस्तांतरित होने के बाद जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने लाभार्थी को डमी चेक सौंपा।
यह सहायता ऐसे परिवार के लिए महत्वपूर्ण है, जिसने अपने परिजन को खोया है। अनुग्रह अनुदान का उद्देश्य दिवंगत कर्मी के आश्रितों को आर्थिक संबल देना और कठिन समय में उनकी आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।
किसे और कितनी राशि का मिला लाभ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपेंद्र साह शिवहर जिले के डुमरी कटसरी प्रखंड के नयागांव ग्राम पंचायत के निवासी हैं। उनके पिता का नाम सत्यनारायण साह है। उनकी पत्नी बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत रसोइया-सह-सहायक के रूप में कार्यरत थीं।
कार्यरत रहने के दौरान उनकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनुग्रह अनुदान स्वीकृत किया गया। इसके तहत उपेंद्र साह को कुल 4,00,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
यह राशि दिवंगत कर्मी के आश्रित पति को सहायता के रूप में दी गई है। इससे परिवार को दैनिक जरूरतों, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कुछ राहत मिल सकती है।
डीएम प्रतिभा रानी ने सौंपा डमी चेक
अनुग्रह अनुदान की राशि लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाने के बाद शिवहर की जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने उपेंद्र साह को डमी चेक सौंपा। यह चेक राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया से जुड़ी सहायता का प्रतीकात्मक दस्तावेज है।
प्रशासन की ओर से की गई इस पहल के माध्यम से दिवंगत कर्मी के परिवार तक सरकारी सहायता पहुंचाई गई। ऐसे मामलों में आर्थिक सहयोग मिलने से आश्रित परिवार को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सहायता के लिए आवेदन की तारीख, राशि स्वीकृति की तारीख और भुगतान की विस्तृत प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।
क्या है रसोइया-सह-सहायक अनुग्रह अनुदान?
बिहार राज्य मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और इससे जुड़े कार्यों में रसोइया-सह-सहायक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये कर्मी स्कूलों में मध्याह्न भोजन व्यवस्था को संचालित करने में सहयोग करते हैं।
ऐसे कर्मी की मृत्यु होने पर पात्र आश्रितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान संबंधित सहायता व्यवस्था के तहत लागू हो सकता है। इसका उद्देश्य परिवार को अचानक उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों से उबरने में मदद करना है।
शिवहर में उपेंद्र साह को मिला चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान इसी प्रकार की सहायता का उदाहरण है। हालांकि, इस मामले में पात्रता की विस्तृत शर्तों और अन्य औपचारिकताओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
शोकाकुल परिवार को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद
परिवार के किसी कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर घर की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में सरकारी सहायता परिवार को तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद दे सकती है।
उपेंद्र साह को मिली राशि से उनके परिवार को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन की यह पहल दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को सहायता उपलब्ध कराने के महत्व को भी सामने लाती है।
इस तरह के अनुदान से प्रभावित परिवारों को कठिन समय में सहारा मिल सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पात्र परिवारों तक सहायता की जानकारी पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें लाभ मिल सके।
