कांग्रेस नेता से भिड़े सौरव दास, बोले- अपनी रणनीति पर फिर सोचिए
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👉 WhatsApp से जुड़ेंकांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया एक्टिविस्ट विजय थोट्टाथिल के एक पोस्ट पर सौरव दास और उनके बीच तीखी बहस देखने को मिली। सौरव दास ने कांग्रेस नेता के उस दावे पर पलटवार किया, जिसमें मुंबई में प्रदर्शन के दौरान NSUI और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने और अन्य लोगों को प्रदर्शन की अनुमति मिलने पर सवाल उठाया गया था।
यह पूरा मामला गांधी जयंती के दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया था।
विजय थोट्टाथिल ने क्या आरोप लगाया?
खुद को कांग्रेस कार्यकर्ता बताने वाले केरल के सोशल मीडिया एक्टिविस्ट विजय थोट्टाथिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुंबई में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाया।
उन्होंने दावा किया कि मुंबई में ‘कॉकरोचों’ को बेरोकटोक घूमने दिया जा रहा है, जबकि NSUI और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के सड़क पर उतरने पर उन्हें हिरासत में लिया जाता है।
विजय ने अपने पोस्ट में प्रदर्शन और मीडिया कवरेज को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कांग्रेस के प्रदर्शन को अपेक्षित मीडिया कवरेज नहीं मिल रहा, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को ज्यादा चर्चा मिल रही है।
उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल किया कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और किसका प्लान लागू किया जा रहा है।
सौरव दास ने दिया तीखा जवाब
विजय थोट्टाथिल के पोस्ट पर सौरव दास ने सीधे जवाब दिया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं की हिरासत के मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
सौरव दास ने कहा कि अगर प्रदर्शन में शामिल लोगों को तुरंत हिरासत में लिया जा रहा है, तो कांग्रेस को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस की कथित नाकामी के लिए दूसरों को जिम्मेदार नहीं ठहराने की बात भी कही। इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई।
सौरव दास का जवाब मूल रूप से इस बात पर केंद्रित था कि किसी विरोध प्रदर्शन की रणनीति और उसके नतीजों का मूल्यांकन खुद प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक संगठन को करना चाहिए।
विजय थोट्टाथिल ने फिर पूछे सवाल
सौरव दास के जवाब के बाद विजय थोट्टाथिल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केवल ‘अपनी रणनीति पर फिर से सोचिए’ कहना उनके सवाल का जवाब नहीं है।
विजय ने दोबारा पूछा कि अगर NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस यानी IYC के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उन्हें हिरासत में क्यों लिया जाता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर कुछ अन्य समूहों को प्रदर्शन करने की अनुमति मिलती है तो कांग्रेस से जुड़े प्रदर्शनकारियों के मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया जाता है।
विजय ने अपने जवाब में यह सवाल भी रखा कि क्या सरकार कांग्रेस के आंदोलन से डरती है या फिर दूसरे समूहों के प्रदर्शन को अपेक्षाकृत ‘दोस्ताना’ मानती है।
गांधी जयंती पर क्यों हुआ प्रदर्शन?
यह विवाद गांधी जयंती के दिन हुए उन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में सामने आया, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।
दिल्ली के अलावा देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें सामने रखीं।
इसी दौरान मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से भी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इस आंदोलन और उसके तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर क्या है विवाद?
कॉकरोच जनता पार्टी का नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग तरह की राजनीतिक बहस देखने को मिली।
विजय थोट्टाथिल ने अपने पोस्ट में इसी समूह और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई की तुलना करते हुए सवाल उठाया। उनका आरोप था कि एक समूह को ज्यादा स्वतंत्रता और मीडिया का ध्यान मिल रहा है, जबकि कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और उन्हें अनुमति दिए जाने के संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं है। इसलिए इन दावों को संबंधित नेताओं और सोशल मीडिया पोस्ट के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बढ़ी राजनीतिक बहस
इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाई और मीडिया कवरेज को लेकर सोशल मीडिया बहस को तेज कर दिया है।
एक पक्ष प्रदर्शन की रणनीति और उसके परिणामों पर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष यह जानना चाहता है कि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन के साथ प्रशासन का रवैया एक जैसा क्यों नहीं है।
फिलहाल सौरव दास और विजय थोट्टाथिल के बीच सोशल मीडिया पर हुई यह बहस इसी बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गई है। आने वाले समय में यदि संबंधित संगठन या प्रशासन इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हैं, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
