पिता की सलामती के लिए समस्तीपुर की मनीषा ने सीने पर रखे 9 कलश
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बिहार के समस्तीपुर जिले से पिता और बेटी के प्रेम, समर्पण और आस्था से जुड़ी एक भावुक खबर सामने आई है। वारिसनगर प्रखंड की मनीषा कुमारी ने अपने पिता की सेहत में सुधार के बाद मां दुर्गा के प्रति लिया गया संकल्प पूरा करने के लिए कठिन तपस्या शुरू की। समस्तीपुर की मनीषा ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन पंचगामा दुर्गा मंदिर परिसर में अपने सीने पर नौ कलश रखकर साधना आरंभ की। समस्तीपुर की मनीषा की इस साधना को देखने के लिए मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच उनके संकल्प और मां दुर्गा के प्रति आस्था की चर्चा होती रही।
पिता की गंभीर बीमारी के दौरान लिया था संकल्प
मनीषा कुमारी समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड की पूर्णाही पंचायत के चारों गांव की निवासी हैं। वह प्रमोद सिंह की पुत्री हैं। परिजनों के अनुसार, पिछले वर्ष उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए थे।
पिता की तबीयत को लेकर मनीषा काफी चिंतित रहती थीं। परिवार के लिए भी वह समय मुश्किल भरा था। इसी दौरान मनीषा ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए अपने पिता के स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
परिजनों के मुताबिक, मनीषा ने मनोकामना पूरी होने पर कठिन तपस्या करने का संकल्प लिया था। पिता की सेहत में सुधार होने के बाद उन्होंने अपने इस संकल्प को पूरा करने का निर्णय किया।
नवरात्र के पहले दिन शुरू की कठिन साधना
रविवार को शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ मनीषा वारिसनगर प्रखंड की पूर्णाही पंचायत के चारों गांव स्थित पंचगामा दुर्गा मंदिर पहुंचीं। मंदिर परिसर में उन्होंने अपने सीने पर नौ कलश रखकर तपस्या शुरू की।
इस दौरान मनीषा मां दुर्गा की आराधना में लीन रहीं। उनकी साधना को देखकर मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता बनी रही। पिता के प्रति बेटी का समर्पण और धार्मिक आस्था इस आयोजन की चर्चा का प्रमुख कारण बना।
मनीषा ने अपने संकल्प को नवरात्र के अवसर पर पूरा करने का रास्ता चुना। परिवार के सदस्यों के अनुसार, पिता की तबीयत में सुधार के बाद वह इस अनुष्ठान की तैयारी कर रही थीं।
मां और परिवार के सदस्य भी रहे मौजूद
तपस्या के दौरान मनीषा की मां और परिवार के अन्य सदस्य मंदिर परिसर में मौजूद रहे। परिजनों ने साधना के दौरान उनका सहयोग किया।
मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस अनुष्ठान को देखा। पिता के स्वास्थ्य को लेकर की गई प्रार्थना और उसके बाद संकल्प पूरा करने की उनकी कोशिश लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
हालांकि, इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मनीषा की सेहत से जुड़ी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सीने पर नौ कलश रखकर तपस्या करना शारीरिक रूप से कठिन हो सकता है, इसलिए ऐसी साधना में सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
पुजारी ललित बाबा ने बताई तपस्या की वजह
मंदिर के पुजारी ललित बाबा और समाजसेवी उपेंद्र प्रसाद ने मनीषा की तपस्या के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनीषा के पिता प्रमोद सिंह गंभीर रूप से बीमार थे।
पिता की बीमारी से परेशान होकर मनीषा ने मां दुर्गा से उनके स्वास्थ्य में सुधार की प्रार्थना की थी। उन्होंने मनोकामना पूरी होने पर कठिन साधना करने का संकल्प लिया था।
पुजारी और समाजसेवी के अनुसार, पिता की स्थिति में सुधार आने के बाद मनीषा अब नवरात्र में अपना संकल्प पूरा कर रही हैं। मंदिर परिसर में शुरू हुआ यह अनुष्ठान परिवार की आस्था से जुड़ा है।
पिता-बेटी के रिश्ते और आस्था की चर्चा
मनीषा की तपस्या की खबर सामने आने के बाद उनके संकल्प को लेकर चर्चा हो रही है। यह घटना बताती है कि परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी का असर उसके प्रियजनों पर कितना गहरा हो सकता है।
मनीषा ने अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर मां दुर्गा से प्रार्थना की और उनकी स्थिति में सुधार के बाद धार्मिक संकल्प पूरा करने का निर्णय लिया। उनके परिवार के लिए यह अनुष्ठान आस्था और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ा हुआ है।
नवरात्र के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ और अनुष्ठान करते हैं। मनीषा की साधना भी इसी धार्मिक माहौल में शुरू हुई है। हालांकि, इस तरह की कठिन तपस्या करते समय स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
