समस्तीपुर में फर्जी APK से महिला स्वास्थ्यकर्मी के खाते से 2.07 लाख गायब
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समस्तीपुर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जहां फर्जी APK फाइल के जरिए एक महिला स्वास्थ्यकर्मी के दो बैंक खातों से कुल 2,07,869 रुपये निकाल लिए गए। समस्तीपुर में हुई इस साइबर ठगी की शिकार महिला कल्याणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत मालीपुर स्थित एचएससी में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) के पद पर कार्यरत हैं।
पीड़िता की पहचान चकमेहसी थाना क्षेत्र के नीमचकहैदर गांव निवासी गोल्डी के रूप में हुई है। वह सुनील कुमार चौधरी की पुत्री हैं। घटना के बाद उन्होंने साइबर थाना में लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराई और मामले में कार्रवाई की मांग की है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने फर्जी APK फाइल डाउनलोड करवाकर इस घटना को अंजाम दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि पीड़िता को फाइल किस माध्यम से भेजी गई और दोनों खातों से रकम किस तरह निकाली गई।
फर्जी APK फाइल से कैसे हुई साइबर ठगी?
APK का पूरा नाम Android Package Kit है। यह Android मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फाइल फॉर्मेट है। सामान्य तौर पर ऐप Google Play Store जैसे विश्वसनीय माध्यमों से इंस्टॉल किए जाते हैं, लेकिन ठग कई बार लोगों को किसी लिंक या संदेश के जरिए संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाते हैं।
ऐसी फाइल में नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर हो सकता है। उसे इंस्टॉल करने या अनावश्यक अनुमतियां देने पर मोबाइल की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में ठग इसी तरीके से निजी जानकारी, बैंकिंग से जुड़े विवरण या ओटीपी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, समस्तीपुर के इस मामले में फाइल के भीतर किस तरह का सॉफ्टवेयर था और ठगी की पूरी तकनीकी प्रक्रिया क्या रही, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इसकी वास्तविक जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
दो बैंक खातों से निकाले गए 2,07,869 रुपये
इस घटना में महिला स्वास्थ्यकर्मी के दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल 2 लाख 7 हजार 869 रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह रकम कितनी-कितनी करके निकाली गई और दोनों खातों से लेनदेन किस समय हुआ, इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
पीड़िता गोल्डी ने घटना की जानकारी साइबर थाना को दी है। उन्होंने लिखित शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराई और मामले में कार्रवाई की मांग की है।
साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत करना महत्वपूर्ण होता है। यदि खाते से अनधिकृत लेनदेन हुआ है, तो तुरंत बैंक और संबंधित साइबर हेल्पलाइन को जानकारी देने से लेनदेन की जांच तथा रकम रोकने की कोशिश में मदद मिल सकती है। हालांकि, रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
फर्जी APK और ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें?
मोबाइल पर आने वाले हर लिंक या ऐप को सुरक्षित मानना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बैंक, सरकारी योजना, नौकरी, स्वास्थ्य सेवा या केवाईसी अपडेट के नाम पर भेजे गए अनजान लिंक पर सावधानी बरतनी चाहिए।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
अनजान APK डाउनलोड न करें: WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध लिंक से ऐप इंस्टॉल करने से बचें।
ऐप की अनुमति जांचें: किसी ऐप को SMS, कॉन्टैक्ट, स्क्रीन या अन्य संवेदनशील सुविधाओं की अनुमति देने से पहले उसकी जरूरत समझें।
बैंकिंग जानकारी साझा न करें: ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और कार्ड की गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं।
ऐप केवल विश्वसनीय स्रोत से लें: ऐप के नाम और डेवलपर की जांच करें। केवल परिचित नाम देखकर किसी ऐप पर भरोसा न करें।
खाते की गतिविधि देखते रहें: बैंक से आने वाले लेनदेन संदेशों पर ध्यान दें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत कार्रवाई करें।
अगर किसी संदिग्ध ऐप को इंस्टॉल करने के बाद खाते से पैसे निकलने लगें, तो तुरंत बैंक से संपर्क कर डिजिटल भुगतान या खाते को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। जरूरत के अनुसार ऐप हटाने के साथ मोबाइल की सुरक्षा जांच भी कराएं।
साइबर ठगी होने पर कहां करें शिकायत?
भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर पीड़ित 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
शिकायत करते समय बैंक से मिले लेनदेन संदेश, ट्रांजैक्शन आईडी, संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट और संबंधित अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें। शिकायत के साथ सही जानकारी देने से जांच में सहायता मिल सकती है।
समस्तीपुर की इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि मोबाइल पर फाइल डाउनलोड करते समय सावधानी जरूरी है। फर्जी APK के जरिए हुई कथित ठगी की पूरी प्रक्रिया जांच के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल पीड़िता ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की है।
