रोहिणी आचार्य संभालेंगी RJD की कमान? रामकृपाल के दावे से हलचल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना: रोहिणी आचार्य करीब एक साल बाद सिंगापुर से बिहार लौट आई हैं और उनके लौटते ही RJD के भीतर उनकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रोहिणी आचार्य ने अपनी पटना यात्रा को निजी बताते हुए कहा कि वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव के बुलावे पर माता-पिता से मिलने आई हैं। इसी बीच बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने दावा किया है कि उन्हें RJD की कमान संभालने के लिए बिहार बुलाया गया है। हालांकि, RJD की ओर से रोहिणी को पार्टी नेतृत्व सौंपने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
रोहिणी के पटना लौटते ही क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?
रोहिणी आचार्य 1 अक्टूबर 2026 को पटना पहुंचीं। एयरपोर्ट पर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए कौटिल्य नगर स्थित आवास पहुंचीं।
मीडिया से बातचीत में रोहिणी ने साफ कहा कि उनकी यात्रा को राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने बताया कि पिता ने बुलाया था और वह अपने माता-पिता के साथ रहने आई हैं।
यही बयान फिलहाल सबसे अहम है, क्योंकि उनकी ओर से RJD की जिम्मेदारी संभालने या सक्रिय राजनीति में लौटने की कोई घोषणा नहीं की गई है।
रामकृपाल यादव ने क्या दावा किया?
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने रोहिणी की वापसी को RJD के नेतृत्व से जोड़ते हुए दावा किया कि वह पार्टी की कमान संभालने के लिए बिहार आई हैं।
उनके मुताबिक RJD का पुराना नेतृत्व प्रभावी नहीं रहा और लालू यादव अब नए नेतृत्व को आगे ला सकते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में रोहिणी आचार्य का नाम लिया है।
यह बयान राजनीतिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव वर्तमान में RJD की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। लेकिन रामकृपाल यादव का बयान एक राजनीतिक दावा है, इसे RJD की आधिकारिक रणनीति या लालू यादव की घोषित योजना के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
पटना, बिहार: मंत्री रामकृपाल यादव ने नाराजगी खत्म कर रोहिणी आचार्या के लालू परिवार में लौटने पर कहा, "रोहिणी आचार्य नेतृत्व संभालेंगी। इसी के लिए आई हैं वह। राजनीति में तो थीं वह। अब चूंकि राजद तो विफल हो चुका है, तो अब नया नेतृत्व रोहिणी संभालेंगी। मेरी भतीजी हैं..." pic.twitter.com/7IKe1BbwvE
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 2, 2026
क्या रोहिणी और तेजस्वी के बीच फिर बढ़ेगा तनाव?
रोहिणी की बिहार वापसी ऐसे समय हुई है जब उनके और तेजस्वी यादव के बीच पिछले साल सामने आए पारिवारिक विवाद की चर्चा अभी भी राजनीतिक गलियारों में होती है।
नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद रोहिणी ने राजनीति छोड़ने और परिवार से दूरी बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने उस समय कुछ लोगों पर गंभीर आरोप भी लगाए थे। इसके बाद वह सिंगापुर लौट गई थीं।
हालांकि अब उन्होंने पिता के बुलावे पर बिहार लौटने की बात कही है। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि उनका अपने माता-पिता के साथ संपर्क बना हुआ है, लेकिन इससे परिवार के भीतर राजनीतिक जिम्मेदारियों का नया बंटवारा तय हो गया है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
लालू यादव का ‘सीक्रेट प्लान’ कितना सच?
रोहिणी के लौटने से यह सवाल जरूर उठ रहा है कि लालू यादव ने उन्हें ऐसे समय में क्यों बुलाया, जब RJD संगठन और बिहार की राजनीति में कई गतिविधियां चल रही हैं।
लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में लालू यादव की ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है जिसमें उन्होंने रोहिणी को पार्टी का नया नेतृत्व सौंपने की बात कही हो।
इसलिए फिलहाल दो बातें अलग-अलग हैं—रोहिणी का पिता के बुलावे पर बिहार लौटना एक पुष्टि किया हुआ तथ्य है, जबकि RJD की कमान संभालने की बात राजनीतिक दावा और अटकल का विषय है।
RJD में तेजस्वी की भूमिका पर क्या असर पड़ेगा?
तेजस्वी यादव RJD की राजनीति में प्रमुख चेहरा हैं और पार्टी ने उन्हें पिछले वर्षों में लगातार आगे बढ़ाया है। ऐसे में यदि भविष्य में रोहिणी को संगठन में कोई औपचारिक जिम्मेदारी दी जाती है, तो पार्टी के भीतर भूमिकाओं को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है।
लेकिन अभी रोहिणी ने खुद ऐसी कोई जिम्मेदारी स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल तेजस्वी के नेतृत्व को रोहिणी की वापसी से चुनौती मिलने की बात को संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में रोहिणी की सार्वजनिक गतिविधियां, RJD के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी और लालू परिवार की ओर से दिए जाने वाले बयान इस तस्वीर को ज्यादा स्पष्ट कर सकते हैं।
2024 में सारण से चुनाव भी लड़ चुकी हैं रोहिणी
रोहिणी आचार्य के लिए राजनीति पूरी तरह नई नहीं है। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव बिहार की सारण सीट से RJD उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली।
इसके अलावा 2022 में अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने के बाद भी वह सार्वजनिक चर्चा में रही थीं।
इस पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी बिहार वापसी को राजनीतिक नजरिए से देखना स्वाभाविक है। लेकिन उनकी मौजूदा यात्रा का उद्देश्य उन्होंने स्वयं निजी बताया है।
अब आगे क्या होगा?
रोहिणी आचार्य के पटना लौटने के बाद RJD और लालू परिवार की गतिविधियों पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी। खासकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उन्हें पार्टी के किसी संगठनात्मक कार्यक्रम में औपचारिक भूमिका मिलती है या वह फिलहाल परिवार के साथ ही रहेंगी।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि रोहिणी बिहार लौट चुकी हैं, लालू-राबड़ी ने उनका स्वागत किया है और मंत्री रामकृपाल यादव ने उनके RJD नेतृत्व संभालने का दावा किया है।
लेकिन RJD की कमान रोहिणी आचार्य को सौंपे जाने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे अभी तय राजनीतिक बदलाव के बजाय एक चर्चित दावा और संभावित घटनाक्रम के रूप में देखना ज्यादा तथ्यपरक होगा।
