वैशाली नाव हादसे पर प्रशांत किशोर की बड़ी मांग, मुआवजा 25 लाख करने की अपील
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वैशाली नाव हादसे को लेकर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार से बड़ी मांग की है। प्रशांत किशोर ने गंगा नदी में नाव पलटने से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि चार लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की अपील की है। यह हादसा वैशाली जिले के रामपुर श्यामचंद गांव में पिछले सप्ताह हुआ था। नाव पलटने की घटना में नौ लड़कियों समेत 13 बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है और प्रभावित परिवारों की मदद को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने मुआवजा बढ़ाने की मांग क्यों की?
प्रशांत किशोर ने मंगलवार को रामपुर श्यामचंद गांव पहुंचकर ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को वर्तमान में चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलती है। उन्होंने बिहार सरकार से इस राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का आग्रह किया। प्रशांत किशोर के मुताबिक, पीड़ित परिवारों की प्रमुख शिकायतों में मुआवजे की राशि भी शामिल है। उन्होंने कोलकाता में हुई भगदड़ में मृत लोगों के परिजनों को दिए गए 25 लाख रुपये के मुआवजे का उल्लेख करते हुए बिहार सरकार से भी राशि बढ़ाने की मांग रखी। प्रशांत किशोर ने कहा कि अलग-अलग त्रासदियों में मौत होने के बावजूद मुआवजे की राशि को लेकर सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। हालांकि, यह उनकी ओर से रखी गई मांग है, सरकार की ओर से इस पर निर्णय की जानकारी अलग से सामने आनी बाकी है।
सीएम सम्राट चौधरी से गांव आने की अपील
प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी रामपुर श्यामचंद गांव आने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को इस बात से प्रभावित नहीं होना चाहिए कि यह विधानसभा क्षेत्र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का निर्वाचन क्षेत्र है या यहां किस राजनीतिक दल के समर्थक अधिक हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि हादसे में जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए सरकार की संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने दशहरा के मौके पर पीड़ित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने का वादा भी किया था। इसी सिलसिले में वह गांव पहुंचे और स्थानीय लोगों से बातचीत की।
नाव में दरार की शिकायत की जांच की मांग
जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने प्रशासन से ग्रामीणों की उस शिकायत की जांच कराने को कहा, जिसमें नाव में दरार होने के बावजूद उसे चलाए जाने की बात कही गई है। उनका कहना है कि यदि नाव की स्थिति को लेकर पहले से शिकायत थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए कि उसे नदी में चलाने की अनुमति कैसे मिली और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं। यह पहलू हादसे की जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, नाव में दरार होने और इसके बावजूद उसे चलाए जाने की शिकायत को अभी जांच के जरिए सत्यापित किया जाना बाकी है।
SDRF की देरी पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF के पहुंचने में कथित देरी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह इलाका बाढ़ की आशंका वाला क्षेत्र है, इसलिए आपदा से निपटने वाली टीमों की त्वरित उपलब्धता जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी भी नदी हादसे में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने प्रशासन से आपदा प्रबंधन की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य में देरी न हो।
स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत
प्रशांत किशोर ने गांव और आसपास के इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने ग्रामीणों के हवाले से दावा किया कि यदि बच्चों को स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाती, तो कुछ मौतों को टाला जा सकता था। यह एक स्थानीय दावा है, जिसकी पुष्टि संबंधित चिकित्सा या प्रशासनिक जांच से होनी बाकी है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उनकी मांग है कि बाढ़ और नदी किनारे बसे इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी मेडिकल उपकरण, ऑक्सीजन और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए।
हादसे के बाद उठ रहे कई अहम सवाल
वैशाली नाव हादसे ने नदी परिवहन और ग्रामीण इलाकों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। नाव की सुरक्षा, बचाव दल की पहुंच और स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे मुद्दे अब चर्चा में हैं। पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है। प्रशांत किशोर की 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग अब राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गई है। आगे देखना होगा कि बिहार सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और हादसे से जुड़े अन्य आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।