नेपाल में बाढ़ से तबाही, बिहार में गंडक नदी को लेकर अलर्ट, जानें कितना खतरा

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 नेपाल में भूस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर तबाही मचा दी है। गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई मकान, बाजार और पुल बह गए। नेपाल में बाढ़ से तीन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। हादसे के बाद 82 लोगों को सुरक्षित बचाया गया, जिनमें नौ विदेशी नागरिक शामिल हैं, जबकि पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद बिहार में गंडक नदी को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। बिहार के जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर बैराज पर पानी के प्रवाह की निगरानी तेज कर दी है। हालांकि, विभाग का कहना है कि नेपाल में भूस्खलन वाले स्थान से बिहार की दूरी करीब 200 किलोमीटर है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस घटना का बिहार पर असर नगण्य रहने की संभावना है। इसके बावजूद गंडक नदी के किनारे रहने वाले लोगों और संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है।

नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी ने मचाई भारी तबाही

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक तेज बहाव आने से कई इलाकों में नुकसान हुआ। बाढ़ का पानी मकानों, बाजारों और पुलों को बहा ले गया। तीन जलविद्युत परियोजनाएं भी इसकी चपेट में आई हैं। स्थानीय स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 82 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें नौ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। वहीं, पांच लोगों के लापता होने की सूचना है। उनकी तलाश के लिए अभियान जारी है। नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। हालात को देखते हुए बचाव कार्य में सेना को भी लगाया गया है। भूस्खलन के बाद नदी में अचानक पानी बढ़ने से प्रभावित क्षेत्रों में खतरा पैदा हो गया।

बिहार में गंडक नदी को लेकर क्यों बढ़ी सतर्कता?

नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक पानी बढ़ने की खबर के बाद बिहार के जल संसाधन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। खास तौर पर पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी के जलस्राव पर नजर रखी जा रही है। नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में बदलाव का असर बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे के इलाकों पर पड़ सकता है। इसी वजह से विभाग ने संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों को अलर्ट मोड में रहने को कहा है। हालांकि, विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, इस बार बिहार में बड़े असर की आशंका कम है। अधिकारियों का कहना है कि भूस्खलन वाली जगह बिहार से करीब 200 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा, नेपाल में देवघाट के पास नदी के जलस्तर में सीमित वृद्धि दर्ज की गई है।

वाल्मीकिनगर बैराज पर कितना पानी पहुंचने का अनुमान?

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडकी नदी का पानी वाल्मीकिनगर बैराज से करीब 80 किलोमीटर ऊपर नेपाल के देवघाट से आगे निकल चुका है। वहां नदी के जलस्तर में अधिकतम 32 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। विभाग के आकलन के अनुसार, इस बढ़ोतरी का वाल्मीकिनगर बैराज पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है। अनुमान है कि पानी के प्रवाह में लगभग 15,000 क्यूसेक की वृद्धि हो सकती है, जिसके बाद स्थिति सामान्य प्रवाह के करीब लौट सकती है। दी गई जानकारी के मुताबिक, इस पानी को वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने में करीब छह घंटे लग सकते हैं। फिलहाल बैराज से लगभग 50,000 क्यूसेक पानी गुजर रहा है। हालांकि, नदी के प्रवाह में बदलाव मौसम, बारिश और नेपाल के ऊपरी क्षेत्रों की स्थिति पर भी निर्भर करेगा। इसलिए जल संसाधन विभाग की निगरानी अहम बनी हुई है। बैराज पर पानी की मात्रा में बदलाव होने पर संबंधित अधिकारियों को आगे के कदम तय करने होंगे।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने क्या कहा?

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल में बूढ़ी गंडकी का प्रवाह पहले रुक गया था। इसके बाद अचानक पानी तेज गति से आगे बढ़ा। उनके अनुसार, यह पानी बिहार में गंडक नदी के रास्ते आगे गुजरेगा। उन्होंने कहा कि भूस्खलन स्थल बिहार से लगभग 200 किलोमीटर दूर है। इस दूरी को देखते हुए बिहार पर इसका असर नगण्य रहने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग के इंजीनियरों को सतर्क रहने को कहा गया है। सरकार और जल संसाधन विभाग की निगरानी का उद्देश्य नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर समय रहते प्रतिक्रिया देना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर बिहार में बड़े नुकसान की आशंका कम बताई जा रही है, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

गंडक किनारे रहने वाले लोगों को क्या करना चाहिए?

नेपाल में बाढ़ की घटना के बाद बिहार के नदी किनारे बसे लोगों को प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। नदी का जलस्तर तेजी से बदलने की स्थिति में सावधानी बरतना जरूरी है।

  • नदी के बढ़ते पानी को देखने के लिए किनारे या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में न जाएं।
  • प्रशासन की ओर से जारी अलर्ट और निर्देशों का पालन करें।
  • निचले इलाकों में रहने वाले लोग जरूरी सामान और दस्तावेज सुरक्षित रखें।
  • बच्चों और बुजुर्गों को नदी के किनारे जाने से रोकें।
  • पानी बढ़ने या स्थानीय प्रशासन के निर्देश मिलने पर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहें।

इन सावधानियों का उद्देश्य किसी भी संभावित आपात स्थिति में जोखिम कम करना है। फिलहाल विभाग के आकलन में बिहार पर असर सीमित रहने की संभावना जताई गई है, लेकिन नदी के जलस्तर में बदलाव पर नजर रखना जरूरी है।

पहले भी नेपाल की बाढ़ से बढ़ी थी चिंता

नेपाल में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण नदियों में अचानक पानी बढ़ने की घटनाएं बिहार के लिए चिंता का विषय रही हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को भी नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आई थी। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश या भूस्खलन होने पर नदियों का प्रवाह अचानक बदल सकता है। इसका असर नीचे की ओर बसे इलाकों में पानी के स्तर पर पड़ सकता है। हालांकि, हर घटना का प्रभाव बारिश की तीव्रता, नदी में पानी की मात्रा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल नेपाल के गोरखा जिले में हुए नुकसान के बाद बिहार का जल संसाधन विभाग वाल्मीकिनगर बैराज पर निगरानी बनाए हुए है। अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, इस बार बिहार पर असर नगण्य रहने की संभावना है। फिर भी स्थिति में बदलाव होने पर प्रशासन की ओर से जारी अपडेट पर ध्यान देना जरूरी है।

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