शुभ दीपावली

रोशनी और खुशियों का यह पावन पर्व आपके जीवन को जगमगा दे!

मुजफ्फरपुर जमीन फर्जीवाड़ा: निलंबित CO और RO गिरफ्तार, मचा हड़कंप

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 

मुजफ्फरपुर जमीन फर्जीवाड़ा: निलंबित CO और RO गिरफ्तार, मचा हड़कंप

मुजफ्फरपुर जमीन फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुशहरी के निलंबित अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी (RO) करुण करण को गिरफ्तार किया है। मुजफ्फरपुर जमीन फर्जीवाड़ा का यह मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज कराने से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों की मेडिकल जांच कराई गई और फिर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब मामले में नामजद अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर निवासी विजय कुमार की पुश्तैनी जमीन से संबंधित है। शिकायतकर्ता विजय कुमार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार में अवर सचिव के पद से सेवानिवृत्त हैं।

उनकी शिकायत के अनुसार, परिवार की 70 डिसमिल जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे दूसरे लोगों के नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई। शिकायत में जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसी क्रम में मुशहरी के तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की कार्रवाई से जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला फिर चर्चा में आ गया है।

दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर क्यों उठे सवाल?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। इसके आधार पर जमीन का स्वामित्व दूसरे व्यक्ति के नाम दिखाने और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराने की कोशिश हुई।

शिकायत के मुताबिक, वैशाली जिले के सदर थाना क्षेत्र के सेलमपुर निवासी कृष्णनंदन पासवान ने जमीन का खरीदार होने का दावा किया था। विजय कुमार ने संबंधित दस्तावेजों की जांच का हवाला देते हुए कहा कि जिस दस्तावेज संख्या का इस्तेमाल किया गया, वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिली।

इसी कथित विसंगति के कारण जमीन के दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, दस्तावेजों में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

CO महेंद्र शुक्ला को पहले किया गया था निलंबित

इस मामले में मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव की ओर से भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध खबर के अनुसार, जिलाधिकारी ने मुशहरी के तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला से संबंधित रिपोर्ट सरकार को भेजी थी।

इसके बाद राज्य सरकार ने महेंद्र शुक्ला को निलंबित कर दिया था। उन पर मुशहरी अंचल में जमीन से जुड़े दस्तावेजों और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी के खिलाफ दाखिल-खारिज से जुड़े एक अन्य मामले में भी आरोप सामने आए थे। हालांकि, अलग-अलग मामलों में आरोपों और उनकी स्थिति का आकलन संबंधित अभिलेखों तथा आधिकारिक जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

अब इस मामले में CO और RO की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को यह पता लगाना है कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी और इसमें किन लोगों ने किस स्तर पर भूमिका निभाई।

आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, जमीन से जुड़े इस मामले में कुल आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इनमें बेलसंड के लोजपा (रामविलास) विधायक अमित कुमार रानू के भाई का नाम भी शामिल बताया गया है।

प्राथमिकी में तत्कालीन अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण करण, कर्मचारी अनुज कुमार और अंचल से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी बताए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के जरिए कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्राथमिकी में नाम आने या आरोप लगने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। सभी आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।

पुलिस अब किन बिंदुओं पर कर रही है जांच?

दो अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। पुलिस और संबंधित एजेंसियों के लिए जमीन के मूल दस्तावेज, कथित बिक्री से जुड़े कागजात और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज बदलावों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के मूल स्वामित्व दस्तावेजों की पुष्टि।

  • कथित खरीद-बिक्री के दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच।

  • दाखिल-खारिज आवेदन और उससे जुड़े राजस्व अभिलेखों की पड़ताल।

  • मामले में नामजद कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच।

  • कथित अनियमितताओं में दस्तावेज तैयार करने से लेकर रिकॉर्ड बदलने तक की प्रक्रिया का पता लगाना।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस इस मामले में दो अन्य राजस्व कर्मचारियों की तलाश भी कर रही है। उनकी पहचान, गिरफ्तारी की स्थिति और जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

जमीन के दाखिल-खारिज में सावधानी क्यों जरूरी?

दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन की प्रक्रिया में जमीन के हस्तांतरण के बाद राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया जमीन के रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में मदद करती है, लेकिन केवल म्यूटेशन दर्ज हो जाना अपने आप में स्वामित्व का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

जमीन खरीदने या विरासत में मिली संपत्ति से जुड़े कामों में मूल दस्तावेज, निबंधन अभिलेख, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित आदेशों की जांच जरूरी है। दस्तावेजों में अंतर मिलने पर संबंधित राजस्व कार्यालय या कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

मुजफ्फरपुर का यह मामला जमीन के रिकॉर्ड की जांच और पारदर्शी प्रक्रिया के महत्व को सामने लाता है। फिलहाल पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका थी और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी कैसे हुई।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1