पटना में 25 अक्टूबर को खड़गे का बड़ा कार्यक्रम, कांग्रेस ने बनाई खास रणनीति
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बिहार की राजनीति में 25 अक्टूबर का दिन कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पटना में आयोजित डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जयंती समारोह का उद्घाटन करेंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे का यह दौरा बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में उनकी पहली यात्रा होगी। पटना के बापू सभागार में होने वाले इस कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन के जरिए कांग्रेस आधुनिक बिहार के निर्माण में श्रीकृष्ण सिंह के योगदान और उनकी राजनीतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
25 अक्टूबर को पटना पहुंचेंगे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 147वीं जयंती के उपलक्ष्य में बिहार कांग्रेस ने विशेष समारोह आयोजित किया है। यह कार्यक्रम 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में होगा। समारोह का उद्घाटन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे।
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को हुआ था। उनकी जयंती के अवसर पर बिहार कांग्रेस ने चार दिन बाद विशेष कार्यक्रम रखने का फैसला किया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को श्री बाबू के विचारों, सामाजिक सुधारों और बिहार के विकास में उनके योगदान से परिचित कराना है।
राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने प्रेस वार्ता कर कार्यक्रम की जानकारी दी। दोनों नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से समारोह में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद खड़गे का पहला दौरा
मल्लिकार्जुन खड़गे का पटना दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद यह उनकी पहली बिहार यात्रा होगी। ऐसे में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर इस कार्यक्रम पर रहेगी।
इसके अलावा, कांग्रेस की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली में मेगा रैली आयोजित करने की तैयारी भी चल रही है। इस रैली से पहले खड़गे का बिहार दौरा पार्टी की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, पटना में होने वाले समारोह को लेकर उपलब्ध जानकारी में किसी नई राजनीतिक घोषणा या चुनावी रणनीति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनाना और उनके योगदान को याद करना है।
समारोह में शामिल होंगे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
बिहार कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में पार्टी के सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया है। आयोजकों के अनुसार, बिहार के 20 से अधिक जिलों के लोगों को भी समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।
राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक बिहार के निर्माण में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन और सामाजिक समानता की दिशा में उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने भी श्री बाबू के सामाजिक परिवर्तन से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर में दलितों के प्रवेश के प्रसंग को याद करते हुए उनकी सामाजिक समानता की सोच पर जोर दिया।
आयोजकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को भी निमंत्रण देने की बात कही है। हालांकि, उनके समारोह में शामिल होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
कौन थे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें बिहार केसरी कहा जाता है?
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह बिहार के इतिहास के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 21 अक्टूबर 1887 को नवादा जिले के खनवां गांव में हुआ था। लोग उन्हें प्यार से ‘बिहार केसरी’ और ‘श्री बाबू’ कहते थे।
स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ-साथ उन्होंने बिहार के प्रशासन और विकास में भी अहम भूमिका निभाई। वर्ष 1937 में प्रांतीय सरकार बनने पर वह बिहार के पहले प्रधानमंत्री बने। उस दौर में प्रांतीय सरकारों के प्रमुख को प्रधानमंत्री कहा जाता था।
आजादी के बाद भी उनका राजनीतिक सफर जारी रहा। वह 1946 से 31 जनवरी 1961 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनके लंबे कार्यकाल में राज्य के प्रशासनिक और विकास संबंधी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
जमींदारी उन्मूलन और सामाजिक समानता में रहा योगदान
श्रीकृष्ण सिंह की राजनीतिक विरासत में जमींदारी प्रथा के उन्मूलन को विशेष महत्व दिया जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में जमींदारी व्यवस्था समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इस बदलाव का उद्देश्य भूमि व्यवस्था में मौजूद असमानताओं को कम करना था।
सामाजिक समानता के मुद्दे पर भी उनका योगदान चर्चा में रहता है। देवघर के बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर में दलितों के प्रवेश से जुड़ा प्रसंग उनकी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कांग्रेस नेताओं ने इसी उदाहरण के जरिए सामाजिक भेदभाव के खिलाफ उनके प्रयासों को याद किया।
बिहार कांग्रेस का कहना है कि नई पीढ़ी को श्री बाबू के व्यक्तित्व और विचारों से परिचित कराना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। पार्टी उनके ऐतिहासिक योगदान को लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कह रही है।
पटना समारोह पर रहेगी सबकी नजर
25 अक्टूबर को होने वाला यह समारोह कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक विरासत को याद करने का अवसर है। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी के कारण राजनीतिक हलकों में भी कार्यक्रम पर नजर रहेगी।
अब देखना होगा कि बापू सभागार में आयोजित समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेता अपने संबोधन में श्रीकृष्ण सिंह की विरासत के किन पहलुओं पर जोर देते हैं। फिलहाल पार्टी ने कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समानता, बिहार के विकास और श्री बाबू के योगदान को प्रमुखता देने की तैयारी की है।
