52 साल पुराना लता-रफी का गाना, तोता-मैना के प्यार ने जीता दिल

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 

52 साल पुराना लता-रफी का गाना, तोता-मैना के प्यार ने जीता दिल

बॉलीवुड के पुराने गानों की बात हो और लता मंगेशकर व मोहम्मद रफी की आवाज का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। साल 1974 में आई फिल्म चोर मचाए शोर का गीत एक डाल पर तोता बोले, एक डाल पर मैना आज भी संगीत प्रेमियों के बीच अपनी खास जगह रखता है। इस गाने में शशि कपूर और मुमताज की चुलबुली नोकझोंक ने प्यार के इजहार को बेहद दिलचस्प बना दिया। करीब 52 साल बाद भी एक डाल पर तोता बोले, एक डाल पर मैना पुराने हिंदी फिल्मी गीतों को पसंद करने वाले लोगों की यादों में बसा है।

इस गीत की खासियत इसका सरल अंदाज, रोमांटिक बोल और दो दिग्गज गायकों की आवाज है। प्रेमी-प्रेमिका की बातचीत को तोते और मैना के रूपक से पेश करके गाने को एक अलग पहचान दी गई।

शशि कपूर और मुमताज की जोड़ी ने गाने को बनाया यादगार

फिल्म चोर मचाए शोर में शशि कपूर और मुमताज की जोड़ी दिखाई दी थी। गाने में दोनों कलाकारों के बीच प्यार भरी नोकझोंक देखने को मिलती है। इसकी प्रस्तुति में रूठना, मनाना और एक-दूसरे के करीब आने की भावनाएं सहज अंदाज में सामने आती हैं।

गीत में तोता और मैना का इस्तेमाल प्रेमी-प्रेमिका के प्रतीक के रूप में किया गया है। दोनों किरदारों के बीच संवाद जैसा महसूस होने वाला यह गीत सुनने वालों को एक प्यारी प्रेम कहानी का अहसास कराता है।

उस दौर के कई रोमांटिक गीतों में जहां प्यार का इजहार गंभीर अंदाज में होता था, वहीं इस गाने ने शरारत और हल्के-फुल्के हास्य के जरिए अपनी बात कही। यही वजह है कि यह गीत पुरानी फिल्मों के संगीत की चर्चा में आज भी याद किया जाता है।

लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज का जादू

इस गाने को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। दोनों गायकों ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए हैं। उनकी आवाजों की अलग-अलग खूबियां इस गीत में भी सुनने को मिलती हैं।

गाने के बोल रविंद्र जैन और कवि इंद्रजीत सिंह तुलसी से जुड़े हैं, जबकि संगीत रविंद्र जैन ने तैयार किया था। सरल शब्दों और याद रहने वाली धुन ने गीत को आम श्रोताओं के लिए भी सहज बनाया।

इस गीत की लोकप्रियता में इसके संगीत और फिल्मांकन दोनों की भूमिका रही। शशि कपूर और मुमताज की अदाकारी ने गीत के रोमांटिक भाव को पर्दे पर जीवंत किया। यही मेल इसे केवल सुनने वाला गाना नहीं, बल्कि फिल्म के एक यादगार दृश्य के रूप में भी स्थापित करता है।

1974 में रिलीज हुई थी फिल्म 'चोर मचाए शोर'

चोर मचाए शोर साल 1974 में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन अशोक रॉय ने किया था और इसका निर्माण एन.एन. सिप्पी ने किया था। कहानी विजय शर्मा और रेखा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी प्रेम कहानी में कई मुश्किलें आती हैं।

फिल्म में शशि कपूर ने विजय शर्मा और मुमताज ने रेखा का किरदार निभाया था। कहानी में विजय रेखा से प्यार करता है, लेकिन रेखा के पिता इस रिश्ते के खिलाफ होते हैं। आगे चलकर विजय पर ऐसे अपराधों के आरोप लगते हैं, जिन्हें उसने नहीं किया होता। इसके बाद कहानी में संघर्ष और घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है।

फिल्म में डैनी डेन्जोंगपा, असरानी और मदन पुरी जैसे कलाकार भी नजर आए। रोमांस, हास्य और कहानी में आने वाले उतार-चढ़ाव ने फिल्म को उस दौर के दर्शकों के लिए मनोरंजक बनाया।

'ले जाएंगे, ले जाएंगे' जैसे गाने भी हुए लोकप्रिय

चोर मचाए शोर का संगीत केवल एक गीत तक सीमित नहीं रहा। फिल्म में 'ले जाएंगे, ले जाएंगे' और 'घुंघरू की तरह बजता ही रहा' जैसे गीत भी शामिल थे, जिन्हें पुराने हिंदी फिल्मी संगीत के शौकीन आज भी सुनते हैं।

फिल्म के गीतों की विविधता इसकी संगीत विरासत का अहम हिस्सा है। रोमांटिक धुनों से लेकर भावनात्मक गीतों तक, संगीत ने फिल्म की पहचान को मजबूत बनाया।

पुराने हिंदी गानों की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि वे किसी खास दौर की यादों से जुड़े रहते हैं। कई श्रोताओं के लिए ऐसे गीत परिवार, बचपन, रेडियो और पुराने सिनेमा की यादें ताजा कर देते हैं। नई पीढ़ी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इन गीतों तक पहुंच रही है।

52 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है यह गाना?

इस गीत की स्थायी लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं। पहली, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गज गायकों की आवाज। दूसरी, रविंद्र जैन का संगीत और सहज बोल। तीसरी, शशि कपूर और मुमताज की पर्दे पर दिखाई गई चुलबुली केमिस्ट्री।

तोता और मैना का रूपक गाने को यादगार बनाता है। इसमें प्रेम को भारी-भरकम शब्दों के बजाय सरल बातचीत और शरारत के जरिए दिखाया गया है। इसी कारण गीत का भाव आसानी से समझ आता है और इसकी धुन याद रह जाती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अल्ट्रा बॉलीवुड के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर इस गाने को 31 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। यह आंकड़ा डिजिटल दौर में भी पुराने फिल्मी संगीत के प्रति लोगों की दिलचस्पी को दिखाता है।

कुल मिलाकर, एक डाल पर तोता बोले, एक डाल पर मैना सिर्फ एक पुराना रोमांटिक गीत नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस दौर की याद है, जब सरल बोल, मधुर संगीत और कलाकारों की सहज अदाकारी मिलकर गानों को खास बना देती थी। यही वजह है कि पांच दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी यह गीत पुराने गानों के शौकीनों की पसंद में शामिल है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1