कुअमा में मां दुर्गा के जयकारों से गूंजा इलाका, निकली भव्य कलश यात्रा

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कुअमा में मां दुर्गा के जयकारों से गूंजा इलाका, निकली भव्य कलश यात्रा

शारदीय नवरात्र के छठे दिन बिहार के शिवहर जिले के पिपराही प्रखंड स्थित कुअमा में मां दुर्गा की आराधना को लेकर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। कुअमा कलश शोभायात्रा के दौरान बेल न्योतन पूजन के लिए श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। कुअमा कलश शोभायात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। मां दुर्गा के जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। आयोजकों ने बताया कि षष्ठी के दिन बेल न्योतन की परंपरा के जरिए मां दुर्गा को पूजा स्थल पर आमंत्रित किया जाता है।

कुअमा में बेल न्योतन के लिए निकली कलश शोभायात्रा

पिपराही प्रखंड के कुअमा में शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा पूजा के लिए बेल न्योतन पूजन का आयोजन किया गया। इसी क्रम में कलश शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

यात्रा में स्थानीय मुखिया डॉ. रिंकी महतो और उनके पति डॉ. अवधेश कुमार मौजूद रहे। इसके अलावा पूजा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, सचिव जय मंगल महतो और कोषाध्यक्ष मनोज प्रसाद सहित कई स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

शोभायात्रा में शिवचंद्र ठाकुर, पवन यादव, उपेंद्र यादव, जियालाल पंडित, राम प्रसाद महतो, जयप्रकाश जायसवाल, कामेश्वर यादव, मनोज राम और उपेंद्र पासवान सहित अन्य श्रद्धालु भी शामिल हुए।

क्या है बेल न्योतन की परंपरा?

बेल न्योतन दुर्गा पूजा से जुड़ी एक धार्मिक परंपरा है। इसमें बेल के वृक्ष की पूजा कर मां दुर्गा को प्रतीकात्मक रूप से पूजा स्थल पर आने के लिए आमंत्रित किया जाता है। कई क्षेत्रों में यह अनुष्ठान शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल वृक्ष को पवित्र माना जाता है। पूजा की परंपरा में बेल वृक्ष के समक्ष विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा के बोधन और आगमन का आह्वान किया जाता है।

डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि षष्ठी के दिन बेल वृक्ष के नीचे पूजा करके मां दुर्गा को आमंत्रित करने की परंपरा निभाई जाती है। इस अनुष्ठान का उद्देश्य दुर्गा पूजा के धार्मिक कार्यक्रमों को विधिवत आगे बढ़ाना है।

अलग-अलग क्षेत्रों में बेल न्योतन और बोधन की विधियों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।

मां कात्यायनी की पूजा का क्या है महत्व?

नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें साहस, शक्ति और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का प्रतीक माना गया है।

भक्त मां कात्यायनी की आराधना सुख, समृद्धि, साहस और परिवार की मंगलकामना के लिए करते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

कुअमा में भी श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा को लेकर उत्साह दिखाया। बेल न्योतन के आयोजन ने धार्मिक वातावरण को और खास बना दिया। श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार पूजा में हिस्सा लेकर मां के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

जनप्रतिनिधियों और पूजा समिति के सदस्यों ने लिया हिस्सा

कलश शोभायात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पूजा समिति के सदस्यों की भागीदारी रही। मुखिया डॉ. रिंकी महतो और डॉ. अवधेश कुमार की मौजूदगी के साथ समिति के पदाधिकारियों ने भी आयोजन में हिस्सा लिया।

पूजा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, सचिव जय मंगल महतो और कोषाध्यक्ष मनोज प्रसाद सहित स्थानीय श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में सहयोग किया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से कार्यक्रम सामूहिक आस्था का केंद्र बना।

ऐसे आयोजन गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को एक साथ आने का अवसर देते हैं। धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सहभागिता भी मजबूत होती है।

नवरात्र के छठे दिन क्यों खास होता है आयोजन?

शारदीय नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के साथ कई स्थानों पर दुर्गा पूजा के विशेष अनुष्ठान शुरू होते हैं। बंगाल और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में षष्ठी का दिन दुर्गा पूजा के सार्वजनिक आयोजनों के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।

बेल न्योतन और बोधन जैसे अनुष्ठान मां दुर्गा के आगमन से जुड़े धार्मिक प्रतीक माने जाते हैं। कुछ स्थानों पर कलश यात्रा, पारंपरिक गीत, वाद्ययंत्र और जयकारों के साथ श्रद्धालु पूजा में शामिल होते हैं।

कुअमा में आयोजित कलश शोभायात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही। कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं ने नवरात्र की आस्था और स्थानीय संस्कृति को अभिव्यक्त किया।

भक्तिमय माहौल में आगे बढ़ी दुर्गा पूजा की तैयारी

कुअमा में बेल न्योतन के लिए निकाली गई कलश शोभायात्रा ने दुर्गा पूजा की तैयारियों को धार्मिक उत्साह प्रदान किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी और स्थानीय लोगों के सहयोग से आयोजन संपन्न हुआ।

डॉ. अवधेश कुमार ने बेल न्योतन की धार्मिक महत्ता बताते हुए कहा कि षष्ठी तिथि पर मां दुर्गा को आमंत्रित करने की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान मां कात्यायनी की आराधना भी की गई।

नवरात्र के अवसर पर ऐसे आयोजन श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक परंपराओं से जोड़ते हैं। कुअमा में निकली शोभायात्रा ने भी क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बनाया।

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