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“मोदी का बाप भी जाएगा” बोल गए खरगे, बिहार में मचा बवाल!

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“मोदी का बाप भी जाएगा” बोल गए खरगे, बिहार में मचा बवाल!

 बिहार में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के दौरान उस समय हंगामा हो गया, जब एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी की। इसके जवाब में खरगे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे कार्यक्रम का राजनीतिक माहौल गरमा गया। खरगे की मोदी पर टिप्पणी अब चर्चा का विषय बन गई है। यह घटनाक्रम बिहार केशरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आया।

कार्यक्रम में खरगे ने श्रीकृष्ण सिंह के योगदान को याद किया। उन्होंने जमींदारी प्रथा समाप्त करने, वंचित वर्गों के उत्थान और बिहार में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा।

खरगे के भाषण के दौरान क्यों हुआ हंगामा?

डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में खरगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री के योगदान पर बात कर रहे थे। इसी दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि वे कहीं नहीं जाएंगे।

इस टिप्पणी के जवाब में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। बयान की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया ने भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी को फिर चर्चा में ला दिया।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उस व्यक्ति की पहचान और उसकी टिप्पणी के पीछे का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं है। इसलिए घटना को समझने के लिए कार्यक्रम के दौरान कही गई बातों और उनके राजनीतिक संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है।

श्रीकृष्ण सिंह को याद कर खरगे ने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष ने बिहार केशरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को राज्य के प्रमुख नेताओं में शामिल बताते हुए कहा कि उन्होंने बिहार में लोकतंत्र की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों को भी याद किया।

खरगे ने जमींदारी प्रथा समाप्त करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री बाबू के योगदान ने बिहार के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने आयोजन समिति का आभार जताया और कहा कि देश आज भी श्रीकृष्ण सिंह को याद करता है।

खरगे ने बिहार को लोकतंत्र की जन्मभूमि के रूप में भी संबोधित किया। उनका भाषण ऐतिहासिक योगदान की चर्चा से शुरू हुआ, लेकिन बाद में राजनीतिक मुद्दों और भाजपा-आरएसएस की विचारधारा पर उनकी टिप्पणियों ने इसे समकालीन सियासत से जोड़ दिया।

श्रीकृष्ण सिंह कब तक रहे बिहार के मुख्यमंत्री?

अपने संबोधन में खरगे ने बिहार में कांग्रेस सरकारों के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1937 में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में पहली कांग्रेस सरकार बनी थी। इसके बाद 1947 में दूसरी सरकार स्थापित हुई।

ब्रिटिश शासन के दौरान मुख्यमंत्री के पद के लिए ‘प्रीमियर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। आजादी के बाद भारतीय संविधान के तहत 1952 में बिहार विधानसभा के पहले चुनाव हुए। श्रीकृष्ण सिंह राज्य के मुख्यमंत्री रहे और उनका कार्यकाल 3 जनवरी 1961 तक चला।

बिहार के राजनीतिक इतिहास में श्रीकृष्ण सिंह का नाम शुरुआती शासन व्यवस्था, प्रशासनिक निर्माण और सामाजिक बदलावों से जुड़ा है। उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में खरगे ने इसी विरासत को याद करते हुए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी राय रखी।



RSS और भाजपा पर खरगे ने साधा निशाना

खरगे ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में आरएसएस की विचारधारा बने रहने तक शांति स्थापित होने में कठिनाई होगी। यह टिप्पणी कांग्रेस और भाजपा के बीच वैचारिक मतभेदों को दर्शाती है।

खरगे ने बिहार के लोगों से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने इस अभियान को “आजादी की दूसरी लड़ाई” बताया। यह उनका राजनीतिक आकलन था, जिसे उन्होंने अपने भाषण के दौरान रखा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस बिहार के प्रमुख नेताओं की विरासत को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए अपनी चिंता जाहिर की।

उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लेते हुए भी टिप्पणी की। खरगे ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि समाजवादी पृष्ठभूमि वाले नीतीश कुमार ऐसे लोगों के साथ चले गए, जिनकी विचारधारा से कांग्रेस सहमत नहीं है।

‘शुद्धिकरण’ विवाद और राहुल गांधी का भी किया जिक्र

खरगे ने अपने भाषण में कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना का उल्लेख किया और कहा कि इसमें शामिल लोगों की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले की जांच कराने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

खरगे ने राहुल गांधी की हल्द्वानी यात्रा का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इन आरोपों और घटनाओं के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

इस मुद्दे पर खरगे की टिप्पणी ने उनके भाषण को और अधिक राजनीतिक बना दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में भाजपा या आरएसएस की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

बिहार की राजनीति में बयानबाजी क्यों है अहम?

बिहार में ऐतिहासिक नेताओं की विरासत, सामाजिक न्याय, जातीय समीकरण और राष्ट्रीय राजनीति लंबे समय से चुनावी विमर्श के महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती जैसे कार्यक्रमों में दिए गए राजनीतिक भाषणों पर व्यापक ध्यान जाना स्वाभाविक है।

खरगे की टिप्पणी ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक मंचों पर नेताओं के शब्द किस तरह चर्चा का केंद्र बन जाते हैं। एक ओर कार्यक्रम में बिहार के इतिहास और श्रीकृष्ण सिंह के योगदान की बात हुई, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी और आरएसएस पर हमले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।

फिलहाल, इस घटनाक्रम का असर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और आगे होने वाली बयानबाजी से स्पष्ट होगा। पूरे मामले को समझने के लिए भाषण के मूल संदर्भ, संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

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