Khagaria: कांशीराम ने बहुजन समाज को दिखाई सत्ता में भागीदारी की राह
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खगड़िया में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कांशीराम के संघर्ष, सामाजिक न्याय के विचारों और वंचित समुदायों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के उनके प्रयासों को याद किया। सदर प्रखंड के नन्हकू मंडल टोला स्थित मेनका-कार्तिकेय सदन के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सभा की अध्यक्षता दलित युवा संग्राम मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने की।
कार्यक्रम में कांशीराम के विचारों को वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में प्रासंगिक बताते हुए शिक्षा, संगठन और राजनीतिक चेतना को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बहुजन समाज की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरूरी है।
खगड़िया में कांशीराम की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा
शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कांशीराम के जीवन और सामाजिक परिवर्तन के लिए किए गए प्रयासों को याद किया। सभा में उनके विचारों को आगे बढ़ाने और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि कांशीराम ने अपना जीवन बहुजन समाज को सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया। उनके अनुसार, कांशीराम ने दलितों, महादलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दिलाने का प्रयास किया।
वक्ताओं ने कहा कि कांशीराम के संघर्ष ने लोगों को अपने अधिकारों, सम्मान और प्रतिनिधित्व के महत्व को समझने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने बहुजन समाज के बीच संगठन और राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई चेतना पैदा करने में भूमिका निभाई।
1984 में बसपा की स्थापना से राजनीतिक भागीदारी पर जोर
आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने अपने संबोधन में वर्ष 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम का उद्देश्य बहुजन समाज को केवल जागरूक करना नहीं था, बल्कि उसे राजनीतिक रूप से संगठित करके निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित स्थान दिलाना भी था।
उनकी राजनीति का एक प्रमुख पक्ष यह था कि वंचित समुदाय अपनी सामाजिक स्थिति को समझें और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस सोच के तहत उन्होंने संगठन निर्माण और राजनीतिक भागीदारी को सामाजिक बदलाव के महत्वपूर्ण माध्यमों के रूप में प्रस्तुत किया।
सभा में कहा गया कि लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का महत्व केवल चुनाव लड़ने या मतदान करने तक सीमित नहीं है। समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सुनी जानी चाहिए।
‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ नारे की चर्चा
श्रद्धांजलि सभा में कांशीराम के चर्चित नारे, “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का भी उल्लेख किया गया। आचार्य शास्त्री ने इसे सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी की भावना से जुड़ा बताया।
इस नारे के माध्यम से प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी के सवाल को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी और अधिकारों पर चर्चा आज भी महत्वपूर्ण है।
कांशीराम के विचारों को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए जागरूकता के साथ-साथ संगठित प्रयास भी जरूरी हैं। उनके अनुसार, समाज के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेना चाहिए।
शिक्षा, संगठन और राजनीतिक चेतना को मजबूत करने की अपील
आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि कांशीराम के विचारों को व्यवहार में उतारने के लिए शिक्षा, संगठन और राजनीतिक चेतना पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने समाज को शिक्षित, संगठित और जागरूक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षा लोगों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद करती है। वहीं, संगठन सामूहिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने का माध्यम बन सकता है। राजनीतिक चेतना से लोग प्रतिनिधित्व, नीति निर्माण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
सभा में कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय सामाजिक समानता, सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जोड़ने की बात कही।
श्रद्धांजलि सभा में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर जयजयराम पासवान, सुबोध पासवान, अंकेश कुमार पासवान, विभूति कुमार ज्वाला, रघुवंश प्रसाद यादव, रंजन साह, हरिवंश कुमार, चंदन पासवान, जीवन शर्मा, सूर्यवंश कुमार और पवन दास सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
सभी ने कांशीराम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक परिवर्तन, बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी और वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर उनके योगदान को याद किया गया।
खगड़िया में आयोजित यह सभा कांशीराम के विचारों और उनके संघर्ष को स्मरण करने का अवसर बनी। वक्ताओं ने शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता के जरिए समानता तथा अधिकारों के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की अपील की।
