IRCTC केस में लालू-राबड़ी-तेजस्वी की कोर्ट में पेशी, अगली तारीख तय
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👉 WhatsApp से जुड़ेंIRCTC होटल टेंडर केस में शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपी पेश हुए। IRCTC होटल टेंडर केस में अदालत ने पहले ही 16 में से नौ आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। 3 अक्टूबर की कार्यवाही में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, जबकि मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की गई है।
मामला उस अवधि से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, रांची और पुरी स्थित रेलवे के दो होटलों के टेंडर में कथित अनियमितता हुई और इसके बदले पटना की जमीन से जुड़ा लेन-देन हुआ।
लालू-राबड़ी-तेजस्वी समेत आरोपी कोर्ट पहुंचे
शनिवार की सुनवाई में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव अदालत के सामने पेश हुए। मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहा है।
10 सितंबर 2026 को विशेष अदालत ने 16 आरोपियों में से नौ के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। सात अन्य आरोपियों को उस आदेश में आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।
अदालत के 10 सितंबर के आदेश में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया था।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत द्वारा आरोप तय करना किसी आरोपी को दोषी ठहराने के बराबर नहीं होता। मामले में आरोपों की न्यायिक जांच और आगे की सुनवाई जारी रहती है।
क्या है IRCTC होटल टेंडर मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन और विकास से जुड़े टेंडर से संबंधित है।
ED का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर कर सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी ने इस कथित लाभ को पटना की जमीन से जुड़े लेन-देन से जोड़ा है।
अदालत के 10 सितंबर के आदेश में ED की ओर से लगाए गए आरोपों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, पटना की कुछ जमीनें कथित तौर पर कम कीमत पर एक कंपनी को हस्तांतरित हुईं और बाद में उस कंपनी के शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को कम कीमत पर स्थानांतरित किए गए।
जांच एजेंसी इस पूरे लेन-देन को कथित ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी एक लाभ के बदले दूसरे लाभ से जोड़ती है। यह जांच एजेंसी का आरोप है, जिसकी अंतिम पुष्टि ट्रायल में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
अदालत के आदेश में क्या कहा गया?
10 सितंबर के आदेश में अदालत ने कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नौ आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आगे बढ़ने के पर्याप्त आधार हैं।
अदालत ने कथित टेंडर प्रक्रिया, पटना की जमीन के लेन-देन और कंपनी के शेयरों के हस्तांतरण को मामले के प्रमुख पहलुओं में शामिल किया। आदेश में कहा गया कि इन पहलुओं से जुड़े गवाहों और दस्तावेजों को ट्रायल के दौरान देखा जाएगा।
अदालत ने सात आरोपियों को इस चरण पर आरोपों से मुक्त भी किया। यानी मामले में सभी 16 आरोपियों के खिलाफ एक जैसी स्थिति नहीं रही।
2018 में ED ने दाखिल की थी चार्जशीट
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में रेलवे होटल टेंडर और पटना की जमीन से जुड़े कथित लेन-देन को जोड़ा गया।
मामले में RJD नेता पीसी गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता और संबंधित कंपनियों समेत कई लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है।
ED की कहानी के अनुसार, कथित तौर पर पहले जमीन का लेन-देन हुआ और बाद में संबंधित कंपनी के शेयरों का हस्तांतरण किया गया। जांच एजेंसी इसे कथित आपराधिक गतिविधि से हासिल संपत्ति यानी proceeds of crime से जोड़ती है।
लालू परिवार का क्या कहना है?
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों से इनकार किया जाता रहा है। बचाव पक्ष ने अदालत में जांच और आरोपों से संबंधित कई दलीलें रखी हैं।
10 सितंबर के आदेश में अदालत ने आरोपियों की ओर से लगाए गए राजनीतिक प्रतिशोध से जुड़े तर्कों पर भी विचार किया था। अदालत ने उस चरण पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया।
मामले में अंतिम दोष या निर्दोषता का फैसला ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अब 30 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
3 अक्टूबर की कार्यवाही के बाद अब मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी। इस दौरान केस की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
IRCTC होटल टेंडर से जुड़ा यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा है और इसमें CBI तथा ED की जांच के अलग-अलग पहलू जुड़े हुए हैं। आने वाली सुनवाई में आरोपों और संबंधित दस्तावेजों पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल अदालत के रिकॉर्ड में नौ आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत मामला आगे बढ़ रहा है, जबकि सात आरोपियों को 10 सितंबर के आदेश में डिस्चार्ज किया जा चुका है।
