हजारीबाग में आसमान से गिरा कोरियाई उपकरण, पैराशूट देख गांव में मची हलचल
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झारखंड के हजारीबाग जिले में बुधवार देर रात आसमान से एक अनोखा उपकरण गिरने के बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा शुरू हो गई। बड़कागांव प्रखंड के सीकरी गांव में पैराशूट लगा यह उपकरण सहदेव राम के घर के पास मिला। इस पर ‘मेड इन कोरिया’ और WHR-301D मॉडल लिखा हुआ था। उपकरण में लाल रंग की लाइट भी जल रही थी। हजारीबाग के बड़कागांव में मिले इस उपकरण को देखने के लिए सुबह बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इसे अपने कब्जे में ले लिया।
शुरुआत में ग्रामीणों को समझ नहीं आया कि आखिर पैराशूट के साथ आसमान से गिरा यह सामान क्या है और इसका इस्तेमाल किस काम में होता है। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि, स्थानीय पुलिस के अनुसार यह कोई खतरनाक उपकरण नहीं, बल्कि मौसम से संबंधित आंकड़े जुटाने वाला रेडियोसोंडे है।
सीकरी गांव में पैराशूट के साथ गिरा उपकरण, ग्रामीणों में कौतूहल
जानकारी के मुताबिक, बुधवार देर रात सीकरी गांव के लोगों ने आसमान से एक वस्तु नीचे गिरते देखी। इसके साथ पैराशूट लगा हुआ था और उपकरण पर लाल रंग की लाइट चमक रही थी। कुछ देर बाद यह सहदेव राम के घर के पास जमीन पर आ गिरा।
घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे। उपकरण पर लिखे विदेशी नाम और मॉडल नंबर ने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। कई लोग इसकी पहचान जानने की कोशिश करते रहे।
गांव में लगभग दो दिनों तक इस घटना को लेकर चर्चा होती रही। कुछ ग्रामीणों ने इसके किसी विशेष तकनीक से जुड़े होने की आशंका जताई, जबकि अन्य लोग इसे लेकर सवाल पूछते रहे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने कब्जे में लिया WHR-301D रेडियोसोंडे उपकरण
सूचना मिलने पर सीकरी ओपी प्रभारी रामकुमार राम और अवर निरीक्षक निरंजन प्रकाश पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने उपकरण की जांच की और उसे अपने कब्जे में ले लिया।
उपकरण पर लगे लेबल के अनुसार, यह वेदर्ली कंपनी का रेडियोसोंडे बताया गया है। इसका मॉडल नंबर WHR-301D है। लेबल पर ‘मेड इन कोरिया’ के साथ जनवरी 2026 की तारीख भी अंकित है।
घटनास्थल पर वार्ड सदस्य पृथ्वीराज गुप्ता समेत कई स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। इनमें अरुण कुमार राम, अनुज कुमार, मिथुन कुमार गुप्ता, सुजीत कुमार गुप्ता, सागर कुमार, सिद्धेश्वर राम और अवध कुमार महतो शामिल थे।
थाना प्रभारी रामकुमार राम ने बताया कि यह मौसम संबंधी जानकारी एकत्र करने वाला उपकरण है। उन्होंने ग्रामीणों से इसे लेकर अनावश्यक डर नहीं रखने की बात कही। उनके अनुसार, ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल भारत में भी किया जाता है।
हालांकि, उपकरण के सीकरी गांव तक पहुंचने की पूरी परिस्थितियों और इसके इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या होता है रेडियोसोंडे और कैसे करता है काम?
रेडियोसोंडे एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जिसका इस्तेमाल वायुमंडल की स्थिति का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। मौसम वैज्ञानिक इसे विशेष मौसम संबंधी गुब्बारे के साथ आसमान में भेजते हैं।
इसमें कई तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो अलग-अलग ऊंचाइयों पर मौसम से जुड़े आंकड़े रिकॉर्ड करते हैं। इसके जरिए मुख्य रूप से तापमान, हवा में नमी और वायुदाब की जानकारी प्राप्त की जाती है।
कुछ रेडियोसोंडे प्रणालियां हवा की गति और दिशा से संबंधित आंकड़े भी उपलब्ध कराती हैं। उपकरण इन जानकारियों को रेडियो सिग्नल के माध्यम से जमीन पर मौजूद रिसीविंग स्टेशन तक पहुंचाता है।
इन आंकड़ों की मदद से मौसम वैज्ञानिक वायुमंडल में होने वाले बदलावों को समझते हैं। इससे बारिश, आंधी, तूफान और अन्य मौसमी परिस्थितियों का पूर्वानुमान तैयार करने में मदद मिलती है।
गुब्बारा फटने के बाद पैराशूट से नीचे आता है उपकरण
रेडियोसोंडे को लेकर एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया भी समझना जरूरी है। मौसम संबंधी गुब्बारा जब आसमान में ऊपर जाता है, तो ऊंचाई बढ़ने के साथ बाहरी वायुदाब कम होने लगता है। इससे गुब्बारे का आकार बढ़ता जाता है।
एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद गुब्बारा फट सकता है। इसके बाद उससे जुड़ा रेडियोसोंडे नीचे आने लगता है। कई उपकरणों में पैराशूट लगाया जाता है, ताकि जमीन पर उतरते समय गिरने की गति कम हो सके।
सीकरी गांव में मिला उपकरण भी पैराशूट के साथ देखा गया। हालांकि, यह किस ऊंचाई से आया और किस मौसम निगरानी अभियान का हिस्सा था, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
समस्तीपुर और जमशेदपुर में भी मिल चुके हैं ऐसे उपकरण
आसमान से रेडियोसोंडे गिरने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर इलाके में भी 23 अक्टूबर को रात के समय ऐसा उपकरण गिरने की जानकारी सामने आई थी।
इसके अलावा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में अगस्त महीने में भी पैराशूट लगा उपकरण मिला था। पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान में जनवरी में ऐसी घटना सामने आने की बात भी बताई गई है।
इन घटनाओं के बाद ग्रामीण इलाकों में ऐसे उपकरणों को लेकर उत्सुकता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, रेडियोसोंडे मौसम विज्ञान के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक है।
ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानी: अगर किसी इलाके में पैराशूट लगा अज्ञात इलेक्ट्रॉनिक उपकरण गिरता दिखाई दे, तो उसे खुद खोलने या छेड़छाड़ करने से बचना चाहिए। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को देनी चाहिए।
