गोपालगंज में बिना योगदान शिक्षिका के खाते में 17.49 लाख ट्रांसफर, शिक्षा विभाग में हड़कंप
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के गोपालगंज जिले में शिक्षिका के खाते में 17.49 लाख रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। मांझा प्रखंड के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षिका खुशबू कुमारी के नियुक्ति और योगदान को लेकर विवाद चल रहा है। इसी बीच उनके बैंक खाते में 17,49,507 रुपये एरियर के रूप में ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि योगदान से जुड़ा विवाद होने के बावजूद इतनी बड़ी राशि का भुगतान कैसे हुआ।
मामले में विभागीय अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। वहीं, शिक्षिका के नियोजन से संबंधित मूल दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
क्या है गोपालगंज में 17.49 लाख रुपये के भुगतान का पूरा मामला?
यह मामला गोपालगंज जिले के मांझा प्रखंड स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, रूपनछाप कर्णपुरा से जुड़ा है। यहां शिक्षिका खुशबू कुमारी की नियुक्ति और योगदान की वैधता को लेकर विवाद सामने आया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खाते में 26 मई को वेतन एरियर के तौर पर 17 लाख 49 हजार 507 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस भुगतान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षिका के योगदान की स्वीकृति पर ही विवाद है, तो भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई।
शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभागीय स्तर पर यह जांच की जा रही है कि भुगतान से संबंधित फाइल किसने तैयार की, किन अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और राशि जारी करने की अनुमति कैसे मिली।
तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक से मांगा गया जवाब
इस प्रकरण में विभाग ने स्कूल के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार चौधरी को नोटिस जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, 13 अक्टूबर को जारी नोटिस में उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
विभाग ने विशेष रूप से पूछा है कि जब खुशबू कुमारी का योगदान स्वीकार नहीं किया गया था, तब उनके ई-शिक्षा कोष फॉर्म पर हस्ताक्षर कैसे किए गए और उसकी एंट्री कराने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
ई-शिक्षा कोष से जुड़े रिकॉर्ड इस जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इनके माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि शिक्षक से संबंधित विवरण कब दर्ज किए गए और भुगतान की प्रक्रिया में किन स्तरों पर कार्रवाई हुई।
अब विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि मामला दस्तावेजों की त्रुटि, प्रक्रिया में लापरवाही या किसी अन्य वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। इसका जवाब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।
नियुक्ति के दस्तावेजों पर भी उठे सवाल
विभागीय रिकॉर्ड में शिक्षिका का यू-डायस कोड 10151109 और शिक्षक आईडी 1521602100068 दर्ज बताया गया है। उनकी नियुक्ति कर्णपुरा पंचायत के नियोजन प्राधिकार की ओर से 4 फरवरी 2016 को जारी आदेश के आधार पर बताई गई है।
हालांकि, पंचायत के तत्कालीन मुखिया अवधेश कुमार ने ऐसी किसी नियुक्ति की जानकारी होने से इनकार किया है। उनके इस बयान के बाद नियुक्ति आदेश और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि नियुक्ति आदेश वास्तव में किस प्राधिकार ने जारी किया था। साथ ही, संबंधित अभिलेखों में दर्ज हस्ताक्षर, आदेश संख्या और अन्य विवरणों का मिलान भी किया जा सकता है।
यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति मिलती है, तो विभाग को यह भी देखना होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे और उनकी क्या भूमिका रही।
सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं शिक्षिका
मामले की जांच के दौरान शिक्षिका खुशबू कुमारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) विनय कुमार सुमन ने उन्हें नोटिस जारी कर नियोजन से जुड़े मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के 12 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में डीपीओ कार्यालय ने 21 सितंबर से सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। शिक्षिका को अपने नियोजन से जुड़े सभी मूल दस्तावेज जमा करने के लिए 7 अक्टूबर तक का समय दिया गया था।
हालांकि, निर्धारित समय पर शिक्षिका सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं। इससे दस्तावेजों की जांच और उनके पक्ष को समझने की प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुनवाई में अनुपस्थित रहने मात्र से किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो जाते। विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर निष्कर्ष निकालना होगा।
जांच पूरी होने के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने और मामले में संलिप्त लोगों की पहचान होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान रहेगा। पहला, शिक्षिका की नियुक्ति और योगदान की वैधता। दूसरा, ई-शिक्षा कोष में दर्ज विवरण और भुगतान की स्वीकृति। तीसरा, 17,49,507 रुपये की राशि जारी करने में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका।
यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या दस्तावेजों में जानबूझकर गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, भुगतान की राशि को लेकर भी विभाग नियमों के अनुसार निर्णय ले सकता है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
गोपालगंज का यह मामला सरकारी विद्यालयों में नियुक्ति, शिक्षक रिकॉर्ड और वेतन भुगतान की प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है। किसी भी सरकारी भुगतान से पहले संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है।
ऐसे मामलों में रिकॉर्ड की नियमित जांच, डिजिटल एंट्री की निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण है। इससे संभावित गड़बड़ियों को समय रहते पकड़ने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग नियुक्ति से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करके जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।
