बिहार के ADM के ठिकानों पर छापा, 3.12 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के बीच गोपालगंज ADM छापेमारी का मामला चर्चा में है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने अपर जिला दंडाधिकारी राजेश्वरी पाण्डेय से जुड़े पटना, रोहतास और गोपालगंज के चार ठिकानों पर तलाशी ली। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कार्रवाई में करीब 3.12 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। अधिकारियों का आरोप है कि संपत्ति ज्ञात वैध आय से 135 प्रतिशत अधिक है। गोपालगंज ADM छापेमारी के दौरान बैंक खातों, जमीन, फ्लैट, आभूषण और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले। हालांकि, संपत्ति के स्रोत और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
ADM राजेश्वरी पाण्डेय के चार ठिकानों पर छापेमारी
उपलब्ध समाचार जानकारी के अनुसार, SVU की टीम ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में शुक्रवार को तलाशी अभियान चलाया। टीम ने पटना के रूपसपुर स्थित भवानी सिटी अपार्टमेंट के फ्लैट, रोहतास जिले के करगहर प्रखंड के ठोरसन गांव स्थित पैतृक मकान, गोपालगंज कलेक्ट्रेट में ADM कार्यालय और उनके सरकारी आवास की तलाशी ली।
यह कार्रवाई बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेश्वरी पाण्डेय के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी है। SVU अधिकारियों के अनुसार, शिकायतों के सत्यापन के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और फिर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार के हवाले से बताया गया कि तलाशी में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं। पैतृक गांव में देर शाम तक तलाशी जारी रहने की भी जानकारी दी गई थी।
3.12 करोड़ की संपत्ति में क्या-क्या मिला?
जांच एजेंसी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तलाशी के दौरान कई तरह की संपत्तियों और वित्तीय निवेश से जुड़े दस्तावेज मिले। शुरुआती विवरण में जमीन, फ्लैट, बैंक जमा, आभूषण और निवेश शामिल हैं।
प्रमुख बरामदगी और संपत्ति का ब्योरा इस प्रकार बताया गया है:
अचल संपत्ति: पटना, वाराणसी, सासाराम और रोहतास में 12 जमीनों और फ्लैटों से जुड़े दस्तावेज; अनुमानित कीमत करीब 1.32 करोड़ रुपये।
बैंक खाते: अलग-अलग बैंकों में 35 खाते मिले, जिनमें कुल 1,49,17,400 रुपये जमा होने की जानकारी दी गई।
सोने-चांदी के आभूषण: अनुमानित कीमत करीब 32 लाख रुपये।
फिक्स्ड डिपॉजिट: लगभग 8.5 लाख रुपये के निवेश दस्तावेज।
नकदी: आवास से 1.85 लाख रुपये मिलने की जानकारी।
शेयर और म्यूचुअल फंड: विभिन्न कंपनियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज।
बीमा: LIC और SBI Life Insurance की पॉलिसियों से संबंधित कागजात।
ये आंकड़े उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में बताए गए शुरुआती विवरण पर आधारित हैं। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों का सत्यापन और संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन जांच के दौरान बदल सकता है।
35 बैंक खातों में जमा मिले 1.49 करोड़ रुपये
इस मामले में सबसे अधिक ध्यान बैंक खातों में जमा रकम पर गया है। SVU के मुताबिक, तलाशी में SBI, पंजाब नेशनल बैंक, HDFC और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत विभिन्न बैंकों के 35 खातों की जानकारी मिली।
इन खातों में कुल 1 करोड़ 49 लाख 17 हजार 400 रुपये जमा होने की बात सामने आई। इसके अलावा 8.5 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े दस्तावेज भी मिले।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इन खातों में जमा रकम किन स्रोतों से आई और क्या उसका संबंध अधिकारी की ज्ञात आय से है। केवल बैंक खाते या निवेश मिलना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता; जांच में आय, खर्च, संपत्ति और वैध स्रोतों का तुलनात्मक आकलन जरूरी होता है।
जमीन, फ्लैट और परिवार के नाम पर संपत्ति
तलाशी में पटना, वाराणसी, सासाराम और रोहतास में जमीन तथा फ्लैट खरीदने से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें कुछ संपत्तियां अधिकारी, उनकी पत्नी और पुत्र के नाम पर बताई गई हैं।
इन संपत्तियों की अनुमानित कुल कीमत करीब 1.32 करोड़ रुपये बताई गई है। इनमें पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र स्थित भवानी सिटी अपार्टमेंट का फ्लैट भी शामिल है।
अब जांच का एक अहम हिस्सा संपत्ति खरीदने की तारीख, भुगतान के स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करना होगा। एजेंसी को यह भी देखना होगा कि संपत्तियां किस आय से खरीदी गईं और क्या उनके लिए घोषित वित्तीय स्रोत पर्याप्त थे।
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और बीमा में भी निवेश
SVU की तलाशी में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से जुड़े निवेश दस्तावेज मिलने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में अडानी पावर, हबटाउन और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियों के शेयरों का उल्लेख है।
इसके साथ LIC और SBI Life Insurance की पॉलिसियों से जुड़े कागजात भी मिलने की जानकारी दी गई। जांच के दौरान इन निवेशों की वास्तविक कीमत, खरीद की तारीख और भुगतान के स्रोत का आकलन किया जा सकता है।
शेयर, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे निवेश सामान्य वित्तीय साधन हैं। इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित निवेशों के लिए इस्तेमाल की गई रकम अधिकारी की ज्ञात वैध आय से मेल खाती है या नहीं।
16 साल की नौकरी और 135 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आरोप
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राजेश्वरी पाण्डेय ने वर्ष 2010 में सरकारी सेवा शुरू की थी। SVU का आरोप है कि उनके पास ज्ञात वैध आय की तुलना में 135 प्रतिशत अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं।
रिपोर्ट में कुल संपत्ति का आंकड़ा 3 करोड़ 12 लाख 47 हजार रुपये से अधिक बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
हालांकि, इस आंकड़े को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। जांच के दौरान अधिकारी को आय के वैध स्रोतों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है। मामले में दोष तय करने का अधिकार अदालत के पास है।
पहले किन पदों पर काम कर चुके हैं ADM?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राजेश्वरी पाण्डेय बिहार लोक सेवा आयोग के 47वें बैच के प्रशासनिक अधिकारी हैं। गोपालगंज में ADM के पद पर तैनाती से पहले उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों और विभागों में काम किया है।
उनकी पूर्व तैनातियों में पूर्णिया में सीनियर डिप्टी कलेक्टर, धमदाहा में अनुमंडल पदाधिकारी और कटिहार के बारसोई में ADM की जिम्मेदारी शामिल बताई गई है। उन्होंने पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में आपदा प्रबंधन से जुड़ी भूमिका भी निभाई थी। योजना एवं विकास विभाग में विशेष कार्य अधिकारी के रूप में काम करने का भी उल्लेख है।
फिलहाल SVU की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। संपत्ति के स्रोत, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों के समर्थन में कौन-से साक्ष्य सामने आते हैं।
