ध्रुव राठी का बड़ा बयान, बोले- राजनीति में नहीं आऊंगा, सभी दल साथ आएं
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यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रिहाई के बाद साफ कर दिया है कि वह राजनीति में कदम नहीं रखना चाहते, लेकिन देश के गंभीर मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को एक साथ आना चाहिए। ध्रुव राठी ने रविवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हैसियत से शामिल हुए हैं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और देश की संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को गंभीर बताते हुए सामूहिक विरोध की जरूरत पर जोर दिया।
राठी के मुताबिक, केवल वीडियो बनाकर अपनी बात रखने के बजाय इस बार उन्हें जमीन पर उतरकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होना जरूरी लगा। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने मतभेद हो सकते हैं, लेकिन गंभीर मुद्दों पर उन्हें मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
राजनीति में आने से ध्रुव राठी ने किया इनकार
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ध्रुव राठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या राजनीति में प्रवेश करने का इरादा नहीं है। उन्होंने आंदोलन में अपनी भागीदारी को व्यक्तिगत फैसला बताया।
राठी ने कहा कि अगर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियां किसी मुद्दे को उठाती हैं, तो यह उनकी राजनीतिक भूमिका है। लेकिन उनकी अपनी भागीदारी का उद्देश्य किसी पार्टी से जुड़ना नहीं है।
उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि वह फिलहाल राजनीतिक पद या दलगत पहचान के बजाय उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहते हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक महत्व का मानते हैं।
SIR और संस्थाओं की स्वतंत्रता पर क्या बोले?
ध्रुव राठी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अदालत को भी विचार करना चाहिए कि देश की संस्थाओं के पास कितनी स्वतंत्रता और अधिकार हैं।
राठी ने मीडिया, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव होने के आरोपों का भी जिक्र किया। हालांकि, संस्थाओं पर दबाव से जुड़े उनके बयान आरोप और उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में देखे जाने चाहिए; इन्हें अपने आप में किसी आधिकारिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में मतदाता सूची की प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और चुनावी व्यवस्था पर भरोसे जैसे सवाल महत्वपूर्ण हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थाओं के पक्ष को समझना भी जरूरी है।
अलग-अलग प्रदर्शन नहीं, सभी दल एक साथ आएं
ध्रुव राठी ने कहा कि अलग-अलग दिनों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रदर्शन करने के बजाय सभी को मिलकर विरोध करना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के बीच आपसी मतभेद और अहम के मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन गंभीर विषय पर साझा आवाज उठाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और आम लोगों का संयुक्त प्रदर्शन ही इस तरह के मुद्दों पर व्यापक दबाव बना सकता है। राठी ने आगे होने वाले प्रदर्शनों में शामिल होने की संभावना पर विचार करने की बात भी कही।
हालांकि, उन्होंने किसी आगामी प्रदर्शन में अपनी भागीदारी को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की। इसलिए इसे फिलहाल उनकी संभावित भागीदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हिरासत के अनुभव के बाद पुलिसकर्मियों पर भी बोले राठी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ध्रुव राठी ने हिरासत के दौरान अपने अनुभव का जिक्र करते हुए पुलिसकर्मियों की कामकाजी परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिरासत में रहने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि उन पर कितना दबाव रहता है।
राठी ने अपने अनुभव की तुलना करते हुए कहा कि वह लगभग 24 घंटे के लिए हिरासत में थे, जबकि पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। उन्होंने पुलिस के काम के बोझ और वेतन को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
उनके मुताबिक, इस अनुभव के बाद उन्हें पुलिसकर्मियों की परिस्थितियों के प्रति सहानुभूति महसूस हुई। यह टिप्पणी उनके व्यक्तिगत अनुभव और नजरिये पर आधारित थी।
घर के आसपास लोगों की तैनाती का भी लगाया आरोप
ध्रुव राठी ने यह दावा भी किया कि उनके घर के आसपास करीब 50 लोग तैनात रहते हैं। उनके अनुसार, ये लोग 24 घंटे उनकी तस्वीरें लेते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
यह दावा राठी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इस संबंध में स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का जवाब उपलब्ध होने पर ही आरोप की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ध्रुव राठी के बयान से क्या संकेत मिलता है?
ध्रुव राठी के बयान का मुख्य संदेश यह है कि वह राजनीति में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन SIR और संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर सार्वजनिक भागीदारी को जरूरी मानते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अलग-अलग विरोध करने के बजाय साझा मंच पर आने की अपील की।
उनकी आगे के प्रदर्शनों में भागीदारी को लेकर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल इस अपील पर क्या रुख अपनाते हैं और SIR से जुड़े मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
