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दरभंगा तारामंडल में बनेगी ISRO स्पेस गैलरी, 61 करोड़ का प्रोजेक्ट

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दरभंगा तारामंडल में बनेगी ISRO स्पेस गैलरी, 61 करोड़ का प्रोजेक्ट

मिथिला के विद्यार्थियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया अब और करीब आने वाली है। दरभंगा तारामंडल में ISRO की अत्याधुनिक स्पेस गैलरी और स्पेस इनोवेशन सेंटर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दरभंगा तारामंडल में प्रस्तावित इस परियोजना पर करीब 61 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने स्थल का निरीक्षण भी किया है।

इस परियोजना के पूरा होने पर दरभंगा में विद्यार्थियों को चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है। यहां केवल मॉडल और प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीखने और प्रयोग करने की सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है।

2 एकड़ जमीन पर विकसित होगी अत्याधुनिक स्पेस गैलरी

प्रस्तावित योजना के अनुसार, दरभंगा तारामंडल परिसर में लगभग 2 एकड़ जमीन पर स्पेस गैलरी और इनोवेशन सेंटर बनाया जाएगा। इस परिसर में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनी, आधुनिक प्रयोगशालाएं और तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

स्पेस गैलरी में भारत के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इसमें चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य एल-1 और गगनयान मिशन से जुड़े मॉडल और शैक्षणिक सामग्री शामिल करने की योजना है।

इसके अलावा प्रक्षेपण यानों के थ्री-डी मॉडल के माध्यम से विद्यार्थी रॉकेट और अंतरिक्ष अभियानों की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे किताबों में पढ़ी जाने वाली वैज्ञानिक जानकारियों को वास्तविक मॉडल और तकनीक के जरिए समझने में मदद मिलेगी।

वर्चुअल रियलिटी और स्पेस वॉक सिमुलेशन होगा खास

इस प्रस्तावित केंद्र की खासियत आधुनिक तकनीक आधारित अनुभव होंगे। विद्यार्थियों को 3D मॉडल, वर्चुअल रियलिटी (VR) और स्पेस वॉक सिमुलेशन जैसी सुविधाओं का अनुभव कराने की योजना है।

इन तकनीकों के माध्यम से बच्चे अंतरिक्ष की परिस्थितियों और अंतरिक्ष यात्रियों के काम करने के तरीकों को समझ सकेंगे। स्पेस वॉक सिमुलेशन उन्हें अंतरिक्ष में गतिविधियों का अनुभव कराने में मदद कर सकता है।

इस तरह की सुविधाएं विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे अनुभव और प्रयोग से जोड़ेंगी। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह उपयोगी हो सकता है, जिनकी रुचि खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और इंजीनियरिंग में है।

रोबोटिक्स, रॉकेट्री और कोडिंग की मिलेगी ट्रेनिंग

स्पेस इनोवेशन सेंटर का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष से जुड़ी प्रदर्शनी दिखाना नहीं है। यहां विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की भी योजना है।

प्रस्तावित केंद्र में रॉकेट्री, रोबोटिक्स, मिनी सैटेलाइट और कोडिंग जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं।

इससे स्कूली बच्चों के साथ इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले युवाओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। वे तकनीक को समझने के साथ छोटे-छोटे प्रोजेक्ट और प्रयोगों के माध्यम से अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित कर सकेंगे।

61 करोड़ रुपये की परियोजना, 36 करोड़ की मिली स्वीकृति

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर स्थानीय सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में दरभंगा परिसदन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना की प्रगति और इसके विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत करीब 61 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। शेष राशि और निर्माण से जुड़े अगले चरणों की जानकारी परियोजना की आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि इस केंद्र के स्थापित होने से मिथिला के छात्र-छात्राओं और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।



मिथिला के विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा?

दरभंगा में स्पेस गैलरी और इनोवेशन सेंटर बनने से क्षेत्र में विज्ञान शिक्षा को नया अवसर मिल सकता है। विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विषयों को देखने, समझने और व्यावहारिक रूप से सीखने का मंच मिलेगा।

इसके प्रमुख संभावित लाभ इस प्रकार हैं:

  • अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी: चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य एल-1 और गगनयान जैसे मिशनों को समझने का अवसर।

  • आधुनिक तकनीक का अनुभव: 3D मॉडल, वर्चुअल रियलिटी और स्पेस वॉक सिमुलेशन से सीखने की सुविधा।

  • तकनीकी प्रशिक्षण: रोबोटिक्स, रॉकेट्री, मिनी सैटेलाइट और कोडिंग से जुड़ी गतिविधियां।

  • विज्ञान में रुचि: स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों को अनुसंधान के प्रति प्रोत्साहन।

  • स्थानीय स्तर पर सुविधा: अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों के लिए दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता कम होने की संभावना।

दरभंगा की पहचान को मिल सकता है नया आयाम

दरभंगा तारामंडल में ISRO स्पेस गैलरी और इनोवेशन सेंटर की प्रस्तावित स्थापना से इसकी भूमिका का विस्तार हो सकता है। अभी तक तारामंडल को मुख्य रूप से खगोलीय प्रदर्शन और मनोरंजन के माध्यम से जाना जाता है, लेकिन नई परियोजना इसे विज्ञान शिक्षा और नवाचार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।

इससे केवल दरभंगा ही नहीं, बल्कि मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

हालांकि, परियोजना की वास्तविक सुविधाएं, निर्माण की समयसीमा और आम लोगों के लिए इसे खोलने की तारीख आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल ISRO विशेषज्ञों के निरीक्षण और परियोजना की समीक्षा से मिथिला में अंतरिक्ष विज्ञान शिक्षा के नए केंद्र की उम्मीद बढ़ी है।

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