PTEC रामपुर जलालपुर में ‘Learning Beyond Books’ सेमिनार, शिक्षकों को मिला नया संदेश
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय स्थित रामपुर जलालपुर के प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय में Learning Beyond Books Seminar का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षु शिक्षकों को किताबों से आगे बढ़कर बच्चों को सिखाने के तरीकों से परिचित कराया गया। Learning Beyond Books Seminar में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों, खेल आधारित शिक्षण और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
महाविद्यालय की प्राचार्य शारदा कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार में शिक्षा जगत से जुड़े विशिष्ट अतिथियों, प्राध्यापकों और द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षु शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. इफ्तेखार इमाम के निर्देशन में तैयार एक रिसर्च रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और बच्चों के अनुभवों से जोड़ने के तरीकों पर विचार करना रहा।
रामपुर जलालपुर में ‘लर्निंग बियॉन्ड बुक्स’ पर हुआ सेमिनार
प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, रामपुर जलालपुर में आयोजित इस सेमिनार का विषय ‘लर्निंग बियॉन्ड बुक्स’ यानी किताबों से आगे सीखना था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों की शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और कक्षा में पढ़ाए जाने वाले पाठ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
बच्चों को आसपास के वातावरण, खेल, गतिविधियों और रोजमर्रा के अनुभवों से भी सीखने का अवसर मिल सकता है। ऐसे तरीकों से पढ़ाई को बच्चों के लिए अधिक सहज और दिलचस्प बनाया जा सकता है।
सेमिनार में प्रशिक्षु शिक्षकों को इस दृष्टिकोण पर विचार करने का अवसर मिला कि वे भविष्य में कक्षा के भीतर और बाहर सीखने के अलग-अलग माध्यमों का उपयोग कैसे कर सकते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों पर हुई चर्चा
सेमिनार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षा नीति का व्यापक उद्देश्य बच्चों के सीखने को अधिक प्रभावी बनाना, उनकी क्षमताओं के विकास को बढ़ावा देना और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक उपयोगी बनाना है।
कार्यक्रम में अतिथियों ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षक बच्चों को केवल किताबों में दी गई जानकारी याद कराने तक सीमित न रखें। उन्हें ऐसी गतिविधियों से भी जोड़ें, जिनसे बच्चे समझने, सवाल पूछने और अपने अनुभवों के आधार पर सीखने की क्षमता विकसित कर सकें।
इस चर्चा का प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए विशेष महत्व रहा, क्योंकि शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए तरीके आगे चलकर उनकी कक्षा में पढ़ाने की शैली को प्रभावित कर सकते हैं।
कुमारी विभा और रामानुराग झा ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित प्रधानाध्यापिका कुमारी विभा और रामानुराग झा उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने बिना किताबों पर पूरी तरह निर्भर हुए बच्चों को पढ़ाने के तरीकों पर जोर दिया।
उन्होंने इस विचार को सामने रखा कि बच्चों के सीखने में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ समझाने तक सीमित नहीं होती। शिक्षक गतिविधियों, अनुभवों और सहभागिता के माध्यम से भी बच्चों को नई बातें समझने में मदद कर सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य, विशिष्ट अतिथियों और प्राध्यापकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का स्वागत मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग, चादर और हरे पौधे भेंट करके किया गया।
इससे कार्यक्रम में स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा और शिक्षा के महत्व का सुंदर मेल देखने को मिला।
प्राध्यापकों और प्रशिक्षु शिक्षकों ने भी रखे विचार
सेमिनार की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य शारदा कुमारी ने की। कार्यक्रम में प्राध्यापक विक्रम कुमार, रजनी कुमारी, अर्चना कुमारी, मेधाविका कुमारी, गौतम कुमार और राजकुमार ने भी अपने विचार रखे।
द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षु शिक्षकों ने भी चर्चा में भाग लिया। इस तरह कार्यक्रम में अनुभवी शिक्षकों और भविष्य के शिक्षकों को शिक्षा से जुड़े विचार साझा करने का अवसर मिला।
ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से प्रशिक्षु शिक्षकों को पढ़ाने के विभिन्न तरीकों पर सोचने और अपने अनुभवों को व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
खेल आधारित शिक्षण पर रिसर्च रिपोर्ट का विमोचन
सेमिनार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खेल आधारित शिक्षण पर तैयार रिसर्च रिपोर्ट का विमोचन रहा। प्राध्यापक डॉ. इफ्तेखार इमाम के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनकी रचित रिपोर्ट “Impact of Play Based Pedagogy on Student Academic Performance in Primary School of Samastipur District” का विमोचन किया गया।
रिपोर्ट का विषय समस्तीपुर जिले के प्राथमिक विद्यालयों में खेल आधारित शिक्षण पद्धति का विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रभाव है। इसका विषय इस सवाल से जुड़ा है कि खेल और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने का तरीका बच्चों के सीखने में किस तरह भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रिपोर्ट के शोध निष्कर्ष, नमूने का आकार या विद्यार्थियों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसलिए इसके वास्तविक परिणामों के बारे में कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
फिर भी, रिपोर्ट का विषय प्राथमिक शिक्षा में शिक्षण के वैकल्पिक तरीकों पर शोध और चर्चा की उपयोगिता को सामने लाता है।
मोना कुमारी और शिवम कुमार ने किया कार्यक्रम का संचालन
सेमिनार का संचालन प्रशिक्षु शिक्षक मोना कुमारी और शिवम कुमार ने किया। कार्यक्रम में प्रिंस कुमार, विनोद मौर्या और द्वितीय वर्ष के सभी प्रशिक्षु शिक्षक मौजूद रहे।
पूरे आयोजन में किताबों से आगे सीखने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और खेल आधारित शिक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे। इन चर्चाओं ने प्रशिक्षु शिक्षकों के सामने शिक्षण को अधिक गतिविधि-आधारित और अनुभवपरक बनाने के विचार रखे।
