‘हमारे लोगों को पुलिस ने किडनैप किया’, CJP के आरोपों से दिल्ली में हलचल
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सदस्य सौरव दास ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से जुड़े नेताओं को अलग-अलग जगहों पर रखा गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप CJP के नेताओं ने लगाए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
यह विवाद दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। अगले दिन अदालत ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया।
CJP ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटों में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पार्टी के नेताओं को हिरासत में लेकर उनके साथ गलत व्यवहार किया।
रांका के मुताबिक, पार्टी की लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, लेकिन उनके अनुसार आयोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है।
रांका ने ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए काम करने का आरोप भी लगाया। यह CJP की राजनीतिक आलोचना है। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
#WATCH | Delhi: During a press conference, CJP National Spokesperson Ashutosh Ranka says, "We sincerely appreciate the way four former Chief Ministers—Arvind Kejriwal, Mamata Banerjee, Manik Sarkar, and Pinarayi Vijayan—took to the streets yesterday. We are deeply grateful for the battle they waged alongside the country's students and youth to safeguard our democracy, and we hope that all such organizations and political parties will continue to fight this battle together in the future. The protests are still ongoing. Even today, several colleagues from CJP have been detained and subjected to physical assault. The entire SFI team was detained today. Many members of AISF have also faced detention and assault over the past few days..."
— ANI (@ANI) October 11, 2026
सौरव दास बोले- तीनों नेताओं को अलग-अलग जगह रखा गया
CJP सदस्य सौरव दास ने हिरासत के दौरान अपने और अन्य नेताओं के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, उन्हें आरके पुरम में रखा गया था, जबकि आशुतोष रांका को वल्लभगढ़ और अभिजीत दिपके को किसी दूसरी जगह ले जाया गया।
दास ने आरोप लगाया कि पुलिस ने तीनों नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर रखा और उनके फोन भी अपने कब्जे में ले लिए। उन्होंने फोन की जांच किए जाने और उनमें सबूत रखे जाने की आशंका जताई।
हालांकि, फोन में सबूत रखे जाने का दावा फिलहाल एक आशंका के तौर पर सामने आया है। उपलब्ध विवरण में इस आरोप की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं दिया गया है।
CJP नेताओं ने हिरासत के दौरान वकीलों से संपर्क नहीं करने देने का आरोप भी लगाया। इस मामले में पुलिस का पक्ष और हिरासत से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, ताकि आरोपों और प्रमाणित घटनाओं के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
#WATCH | Delhi: Cockroach Janta Party (CJP) Chief Spokesperson Saurav Das says, "They seized our phones but did not provide a seizure memo... We suspect our phones were hacked or cloned. Just as has happened to other activists over the years, we fear they may have hacked into our devices to plant documents or other material to be presented later as evidence... We want to state here that our phones have likely been compromised..."
— ANI (@ANI) October 11, 2026
अभिजीत दिपके की दादी के निधन का भी उठा मुद्दा
आशुतोष रांका ने अभिजीत दिपके की दादी के निधन का जिक्र करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, अभिजीत को परिवार में हुई इस घटना की जानकारी दी गई, लेकिन उस समय भी पुलिस ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
रांका ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम को तमाशे की तरह पेश किया गया। CJP का कहना है कि हिरासत के दौरान लोगों के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए और उन्हें अपने परिवार तथा कानूनी प्रतिनिधियों से संपर्क करने का अवसर मिलना चाहिए।
यह आरोप भी पार्टी के बयान पर आधारित है। हिरासत के दौरान संबंधित अधिकारियों ने क्या प्रक्रिया अपनाई और परिवार से संपर्क को लेकर क्या व्यवस्था थी, इसे स्पष्ट करने के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
प्रदर्शनकारियों की छवि खराब करने की कोशिश का आरोप
सौरव दास ने दावा किया कि दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों, दुकानदारों और यात्रियों को परेशानी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों को बंद करने और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने से प्रदर्शनकारियों की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की गई।
दास ने यह भी दावा किया कि सुरक्षा बलों को दूसरे क्षेत्रों से दिल्ली लाया गया था। हालांकि, इन दावों के संबंध में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत आधिकारिक आंकड़े या स्वतंत्र पुष्टि शामिल नहीं हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए कार्रवाई की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और नेताओं को हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई के पीछे कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख हुआ है।
बंगला साहिब गुरुद्वारे को लेकर भी जताई नाराजगी
CJP सदस्य सौरव दास ने बंगला साहिब गुरुद्वारे के कथित अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर धार्मिक भावनाओं और नागरिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया।
दास ने सरकार पर पत्रकारों और आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, इस मामले में यह समझना जरूरी है कि गुरुद्वारे से जुड़ी घटना में वास्तव में क्या हुआ, किसकी भूमिका थी और क्या कोई आधिकारिक जांच या बयान सामने आया है।
धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में तथ्यों की पुष्टि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। किसी समुदाय की भावनाओं पर असर डालने वाले दावे की जांच प्रत्यक्ष जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर होनी चाहिए।
रत्ना सिंह ने महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप लगाया
CJP के कानूनी मामलों को देखने वालीं रत्ना सिंह ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद से खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी उन पर नजर रख रहे थे। उनके मुताबिक, बाद में पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया।
रत्ना सिंह ने सवाल किया कि इस कार्रवाई के आदेश किसने दिए। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी किए जाने का आरोप भी लगाया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड अहम होंगे। फिलहाल, इस खबर में रत्ना सिंह के दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अदालत ने CJP के तीन नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया
10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने के बाद अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद 11 अक्टूबर को तीनों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।
इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस की शक्तियों और नागरिकों के कानूनी अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर CJP पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
अब इस विवाद में पुलिस का विस्तृत पक्ष और हिरासत के दौरान हुई घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अहम होगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि लगाए गए आरोपों में किन बातों की पुष्टि होती है और किन पर आगे जांच की जरूरत है।
