बिहार में टेककनेक्ट पोर्टल लॉन्च, बाढ़ से लेकर विकास योजनाओं तक बदलेगा कामकाज
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार में तकनीक के जरिए विकास योजनाओं और सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने की दिशा में नई पहल हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना की डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में आयोजित स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026 के दौरान टेककनेक्ट पोर्टल का शुभारंभ किया। इस मौके पर बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए। सरकार की इस पहल का उद्देश्य अंतरिक्ष आधारित तकनीक, रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक आंकड़ों की मदद से बाढ़ प्रबंधन, कृषि नियोजन और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
टेककनेक्ट पोर्टल से क्या होगा फायदा?
टेककनेक्ट पोर्टल के शुभारंभ को बिहार में तकनीकी नवाचार और सरकारी विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञों, वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है, ताकि नई तकनीकों का उपयोग राज्य की वास्तविक जरूरतों के अनुसार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से ऐसी तकनीक विकसित करने की अपील की, जिसका लाभ आम लोगों, किसानों और प्रशासन को मिल सके। उनका जोर केवल तकनीकी प्रयोगों पर नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर रहा।
अंतरिक्ष आधारित तकनीक और रिमोट सेंसिंग की मदद से जमीन, जल संसाधन और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। इस जानकारी का उपयोग योजनाओं की तैयारी, निगरानी और बेहतर निर्णय लेने में किया जा सकता है।
हालांकि, पोर्टल के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं, विभागवार सेवाओं और इनके लागू होने की समयसीमा की विस्तृत जानकारी संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी।
सर्वे ऑफ इंडिया और BIRSAC के बीच समझौता
कार्यशाला के दौरान बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य तकनीकी सहयोग को मजबूत करना और विकास कार्यों में अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक आंकड़े किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, भूमि उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों को समझने में उपयोगी हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं में ऐसे आंकड़ों के इस्तेमाल से योजना निर्माण और निगरानी को बेहतर बनाने की संभावना रहती है।
बिहार जैसे राज्य में, जहां बाढ़, जल प्रबंधन और कृषि से जुड़ी चुनौतियां कई क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं, वहां वैज्ञानिक आंकड़ों का महत्व और बढ़ जाता है। इन तकनीकों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग आंकड़ों का उपयोग कितनी प्रभावी तरीके से करते हैं।
बिहार में बाढ़ प्रबंधन के लिए तकनीक क्यों जरूरी?
बिहार में हर साल बाढ़ कई इलाकों में जनजीवन, खेती और आधारभूत सुविधाओं को प्रभावित करती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी राज्य की बाढ़ संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
राज्य में नेपाल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की ओर से आने वाले जल प्रवाह का असर अलग-अलग क्षेत्रों में पड़ सकता है। ऐसे में नदियों के जलस्तर, वर्षा और जल प्रवाह से जुड़े आंकड़ों की निगरानी बाढ़ प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकती है।
रिमोट सेंसिंग और वैज्ञानिक पूर्वानुमान के संभावित उपयोगों में शामिल हैं:
नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी
बाढ़ प्रभावित इलाकों की पहचान में सहायता
जल संसाधनों की स्थिति का आकलन
कृषि और सिंचाई योजनाओं की बेहतर तैयारी
विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी
संबंधित विभागों के बीच सूचना और समन्वय बेहतर करना
मुख्यमंत्री ने वर्षा में लगभग 32 प्रतिशत कमी के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण गंगा, सोन और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने वैज्ञानिक पूर्वानुमान, जलस्तर की लगातार निगरानी और समन्वित जल प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया।
गंगा के पानी का बेहतर उपयोग करने पर जोर
बिहार में जल प्रबंधन केवल बाढ़ से निपटने तक सीमित नहीं है। पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। मुख्यमंत्री ने गंगा के जल का वर्षभर बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल करने पर जोर दिया।
वैज्ञानिक आंकड़ों और तकनीकी निगरानी से जल संसाधनों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इससे सिंचाई की जरूरतों, जल उपलब्धता और संबंधित योजनाओं की तैयारी में सहायता मिलने की संभावना है।
हालांकि, जल प्रबंधन की सफलता के लिए तकनीकी आंकड़ों के साथ मजबूत योजना, विभागों के बीच समन्वय और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी होगा।
तकनीकी शिक्षा और नई टाउनशिप की योजना
मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में पांच रुपये की फीस की व्यवस्था युवाओं को तकनीकी शिक्षा हासिल करने का अवसर देती है।
उन्होंने ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना का जिक्र करते हुए नियोजित शहरी विकास में आधुनिक तकनीक की उपयोगिता पर भी जोर दिया।
शहरी नियोजन में भू-स्थानिक आंकड़ों और आधुनिक तकनीकी साधनों का इस्तेमाल भूमि उपयोग, आधारभूत सुविधाओं और विकास कार्यों की योजना बनाने में सहायक हो सकता है। लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके विस्तृत स्वरूप, क्रियान्वयन और उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
कार्यशाला में कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद
पटना की डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में आयोजित दो दिवसीय स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026 की थीम ‘प्रगतिशील बिहार के लिए अंतरिक्ष आधारित समाधानों का उपयोग कर शासन को सशक्त बनाना’ रखी गई।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी सहित अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने विज्ञान, तकनीक और नवाचार को बिहार के विकास से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसी ऐतिहासिक ज्ञान परंपराओं का उल्लेख करते हुए आधुनिक वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
