बिहार MLC चुनाव में RJD का बड़ा उलटफेर, BJP से छीन लीं 2 सीटें
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बिहार विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बड़ा उलटफेर करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) से दो सीटें छीन ली हैं। बिहार MLC चुनाव में पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक सीट पर राजद उम्मीदवारों की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को नई चर्चा दी है। पटना में संजीव सिंह ने पांच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को हराया, जबकि दरभंगा में अनिल झा ने आखिरी राउंड में बाजी पलट दी। इन नतीजों से राजद के उत्साह में बढ़ोतरी हुई है और पार्टी ने बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई है।
पटना में संजीव सिंह ने नवल किशोर यादव को हराया
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इस चुनाव के सबसे चर्चित नतीजों में शामिल रहा। राजद उम्मीदवार संजीव सिंह ने भाजपा के मौजूदा एमएलसी नवल किशोर यादव को 1,057 वोटों से पराजित किया। नवल किशोर यादव लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। करीब तीन दशक से उनके प्रभाव वाली इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता था। संजीव सिंह की जीत ने इस राजनीतिक धारणा को चुनौती दी है। संजीव सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में रही। राजद में आने से पहले वह जनता दल यूनाइटेड (JDU) से जुड़े थे और खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। इस जीत के बाद राजद को पटना शिक्षक सीट पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिला है। वहीं, भाजपा के लिए यह नतीजा अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली हार की समीक्षा करने का संकेत देता है।
दरभंगा में आखिरी राउंड में पलटा चुनाव का नतीजा
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भी काफी दिलचस्प रहा। यहां मतगणना करीब ढाई दिन तक चली और शुरुआती चरणों में भाजपा उम्मीदवार एवं मौजूदा एमएलसी सर्वेश कुमार बढ़त बनाए हुए थे। पहली वरीयता के मतों की गिनती में किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी कोटा नहीं मिला। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया के तहत दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और उम्मीदवारों के एलिमिनेशन का दौर शुरू हुआ। इस चरण में भी सर्वेश कुमार आगे रहे, लेकिन वह निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सके। आखिरी राउंड में जन सुराज उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज को मिले दूसरी वरीयता के मतों की गणना ने मुकाबले की दिशा बदल दी। राजद उम्मीदवार अनिल झा ने अंतिम चरण में बढ़त हासिल कर ली और सर्वेश कुमार को करीब 450 वोटों से हरा दिया। इस तरह राजद ने दरभंगा स्नातक सीट पर अप्रत्याशित जीत दर्ज की। इस परिणाम ने दिखाया कि वरीयता आधारित मतगणना में शुरुआती बढ़त हमेशा अंतिम जीत की गारंटी नहीं होती। उम्मीदवारों को मिले मतों के स्थानांतरण और अंतिम गणना का परिणाम पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
दो सीटें जीतकर राजद ने बढ़ाई अपनी ताकत
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें पिछली स्थिति राजद के लिए चुनौतीपूर्ण थी। पार्टी के पास इन सीटों में से कोई सदस्य नहीं था। अब पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक सीट जीतने के बाद परिषद में राजद के दो सदस्य बढ़ गए हैं। इन नतीजों से पार्टी को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर मजबूती मिली है। भाजपा के दो मौजूदा एमएलसी को हराने से राजद को यह संदेश देने का अवसर भी मिला कि वह परिषद के चुनावों में मुकाबला करने की स्थिति में है। हालांकि, केवल दो सीटों की जीत के आधार पर पूरे बिहार में राजनीतिक समर्थन के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। विधान परिषद की अलग-अलग सीटों पर मतदाता समूह, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ भी नतीजों को प्रभावित करती है।
बैलट पेपर से चुनाव कराने की राजद ने उठाई मांग
दो सीटों पर जीत के बाद राजद ने बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग फिर उठाई। पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बैलट पेपर से सभी चुनाव कराए जाएं तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने पटना और दरभंगा में राजद की जीत का उल्लेख करते हुए पार्टी के पक्ष को सामने रखा। यह राजद की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इस बयान को पार्टी के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि सभी चुनाव प्रणालियों में किसी दल की जीत या हार का प्रमाण। राजद ने भोजपुर स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में मिली अपनी जीत का भी जिक्र किया। पार्टी इन परिणामों को अपने पक्ष में बने माहौल के तौर पर पेश कर रही है।
महागठबंधन में आपसी मुकाबले से विपक्ष को नुकसान
बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन के भीतर भी मतभेद सामने आए। राजद और कांग्रेस ने पांच सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे। इससे विपक्षी दलों के बीच तालमेल पर सवाल उठे। दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, तिरहुत शिक्षक सीट पर महागठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के मौजूदा एमएलसी संजय सिंह भी चुनाव हार गए। ऐसे नतीजों ने विपक्षी गठबंधन के सामने सीटों के बंटवारे और आपसी समन्वय की चुनौती को उजागर किया। जब सहयोगी दल एक ही सीट पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारते हैं, तो मतों के बंटवारे का असर चुनावी परिणाम पर पड़ सकता है। इसके बावजूद पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक सीट पर राजद की जीत ने विपक्ष को दो महत्वपूर्ण सफलताएं दीं। पार्टी के लिए अब चुनौती इन जीतों को संगठनात्मक मजबूती में बदलने और भविष्य के चुनावों में बेहतर तालमेल बनाने की होगी।
बिहार की राजनीति के लिए क्या हैं इन नतीजों के मायने?
पटना और दरभंगा में राजद की जीत ने बिहार विधान परिषद की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। भाजपा को अपने दो मौजूदा सदस्यों की हार का विश्लेषण करना होगा, जबकि राजद को अपनी जीत के कारणों को समझकर आगे की रणनीति तैयार करनी होगी। इन चुनावों में उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, मतदाताओं का रुझान और मतगणना की प्रक्रिया अहम रही। दरभंगा में आखिरी राउंड में बदला परिणाम इस बात का उदाहरण है कि वरीयता आधारित चुनाव में अंतिम गणना तक मुकाबला खुला रह सकता है। महागठबंधन के लिए भी यह परिणाम दोहरी तस्वीर पेश करता है। एक तरफ राजद ने दो सीटें जीतकर राहत दी, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और सीपीआई की हार ने विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े किए।